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विकास कार्यों का ढिंडोरा पीटने का समय आ गया: मनोहर लाल खट्टर

कार और सरकार में बहुत फर्क होता है मुख्यमंत्री जी

April 30, 2017 3:43 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

करनाल में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दो टूक बात कही कि मुझे मालूम है कि कौन सा अफसर फाइल लेट करता है। हमारी सरकार के अढ़ाई साल बीत गए, अब मैं दूसरा गेयर लगाऊंगा। सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने में कहीं न कहीं पीछे रह गई है। अब समय आ गया है जब विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटना होगा।

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में प्रभारी अनिल जैन ने भी कहा कि हम सरकार में हैं और अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन न करें। सुभाष बराला और प्रो. गणेशीलाल ने भी अंसतुष्ट विधायकों को नसीहत दी कि पार्टी के प्रति अपनी बात पार्टी के अंदर और पार्टी के मंच पर ही रखें। इसके बावजूद करनाल के ही भाजपा सांसद अश्विनी चोपड़ा इस दो दिवसीय बैठक में एक बार भी नहीं पहुंचे, और जो पहुंचे उनमें अंबाला से सांसद रतनलाल कटारिया सेल्फी लेते दिखे तो स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज मोबाइल पर व्यस्त दिखे। क्या कार्यसमिति की बैठक में इतनी दिलचस्पी भी नहीं कि कौन क्या बोल रहा है, क्या सुझाव आ रहे हैं और क्या फैसले हो रहे हैं? कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ यह बात कह रहे हैं कि हमने उत्तर प्रदेश से ज्यादा काम किया है। इसके बावजूद हमारे कार्यकर्ता मुखर नहीं हैं। धनखड़ ने कहा कि आदित्यनाथ सरकार की पब्लिसिटी ज्यादा है पर उन्हें हमारे बराबर पहुंचने में समय लगेगा तो क्या हरियाणा का जनसंपर्क विभाग इतना सक्षम नहीं है कि सरकार की नीतियों का प्रचार कर सके। पब्लिसिटी पर सरकार कोई कम खर्च तो कर नहीं रही। फिर कार्यकर्ताओं पर ही यह काम क्यों डाला जा रहा है? एक बड़ा गुट भाजपा सरकार में कार्यशैली से नाराज क्यों है? विधायक उमेश अग्रवाल पूरी तरह मुखर हैं और अपने परिजनों पर केस दर्ज किए जाने पर उन्होंने कहा कि ये केस तो वर्ष 2011 से था, लेकिन हुड्डा सरकार ने भी केस दर्ज नहीं किया। भाजपा सरकार ने परिजनों पर केस दर्ज करवा दिया। यह बहुत ही दुखद है। पर हमारी लड़ाई जारी रहेगी, चाहे इस्तीफा ही क्यों न देना पड़े।

असंतुष्ट गुट के विधायकों और सांसद राजकुमार सैनी और अश्विनी चोपड़ा से परेशान खट्टर काका कह रहे हैं कि अब मैं दूसरा गियर लगाऊंगा। सरकार और कार चलाने में बहुत फर्क होता है। राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह भी कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री अफसरों पर ज्यादा विश्वास करते हैं जबकि कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी यही है कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते।

मुख्यमंत्री खट्टर ने यह भी बताया कि जब वे संगठन महामंत्री थे, तब अनुशासन के खिलाफ कदम उठाने पर पदाधिकारी मुझे सख्त हैडमास्टर कहते थे और अधिकारियों को भी वही रूप देखने को मिल सकता है। आने वाले दिन यह बताएंगे कि मुख्यमंत्री खट्टर कैसा गियर बदलते हैं और हैडमास्टर के रूप में किसकी क्लास लेते हैं- अफसरों की या असंतुष्ट विधायकों की?

खट्टर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बयान पर भी पलटवार किया। हुड्डा ने कहा था कि प्रधानमंत्री से एसवाईएल के मुद्दे पर एक साथ मिलने जाएंगे लेकिन अब अकेले ही मिलने चले गए। खट्टर ने कहा कि उनके नेता मोदी हैं, वे उनसे मिले। हुड्डा की नेता सोनिया गांधी हैं, वे उनसे मिलकर कहें कि पंजाब के मुख्यमंत्री पर हरियाणा का पानी देने के लिए दबाव डालें। खैर अब हरियाणा सरकार की गाड़ी कितनी तेजी से चलती है या रुकावटें आती रहती हैं?

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

 

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