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जाट आरक्षण आंदोलन – कोई आपके कंधे पर रखकर बंदूक न चलाने पाये

2 मार्च को संसद का घेराव करने का ऐलान

February 21, 2017 10:16 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

प्रतीकात्मक चित्र

जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर सरकार व आंदोलनकारियों के बीच दूसरे दौर की वार्ता भी विफल रही है। आरक्षण आंदोलन के नेता यशपाल मलिक ने बातचीत को विफल बताते हुए आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है साथ ही 2 मार्च को संसद का घेराव करने का ऐलान भी किया है। लेकिन इससे पहले आंदोलनकारियों ने 19 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाया। बलिदान दिवस के कार्यक्रम तो शांतिपूर्वक रहे लेकिन इसमें जो घोषणाएं या प्रस्ताव पास हुए हैं उनसे हरियाणवी समाज के बुद्धिजीवी वर्ग में एक बेचैनी पैदा हुई है और जाट आंदोलन से सहानुभूति रखने वाले भी इन फैसलों को सही नहीं मान रहे हैं खासकर सरकार के साथ असहयोग व बिजली बिल, कर्ज आदि की अदायगी न करने का फैसला। हरियाणा में एक दशक से भी लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे दो वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी फेसबुक टाइम लाइन पर जो चिंता जाहिर की है उसे हम अपने पाठकों के लिये यहां ज्यों का त्यों दे रहे हैं। आप भी इन्हें पढ़ें और खुद अंदाज लगायें कि कहीं कोई आपके कंधे पर बंदूक रखकर तो नहीं चलाना चाहता।

दीपकमल सहारण की वाल से –

“देखें कि कहीं वो आपकी भावुकता, अल्पज्ञान और ऊर्जा के कंधे पर रखकर अपने स्वार्थी और अपरिपक्व इरादों की बंदूक तो नहीं चलाने वाला?”

हताशा दिख रही आंदोलन नेतृत्व में, संवेदनाओं का फायदा उठाने की फिराक में कुछ नासमझ…

कहते भी तो हैं, अनाड़ी के हाथ में खेल का सत्यानाश। यहां अनाड़ी कम शातिर ज्यादा है। ना वे खुद को समझ पा रहे हैं, ना लोग उनकी काबिलीयत और इरादे भांप पा रहे हैं। इन स्वयंभू के हाथ में कमान है भी और नहीं भी। 19 तारीख के बलिदान दिवस की घोषणाओं में जिस तरह की दिशाहीनता दिखी है, उससे आशंका यह हो रही है कि आंदोलन इनके नियंत्रण में है भी या नहीं? जो ऐलान किए गए हैं, वे दूरगामी परिणाम लाने वाले हैं भी नहीं, बस 20 तारीख की बैठक से पहले सरकार पर दबाव बनाने वाले हो सकते हैं। मसलन कुछ युवाओं ने जिद करके रोहतक के मुख्य चौराहे पर हवन किया और वहां ‘जाट शहीद चौक’ का बैनर लगा दिया। ऐसी हरकत गैरकानूनी है और उकसाने वाली है। ऐसी हरकत को रोकने के लिए पुलिस सख्ती दिखाती तो जगह-जगह इकट्ठा हजारों लोग भड़क सकते थे। किसी और वर्ग के लोग इस पर एतराज जता देते तो भी टकराव होता। कुल मिलाकर, कुछ दिग्भ्रमित युवा पिछले साल की तरह निजी महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आंदोलन का दुरूपयोग कर सकते हैं।

महत्वकांक्षी लोग कच्चा-पक्के सच-झूठ परोस कर लोगों का साथ पाने की कोशिश करते हैं और ऐसी हरकत कर सकते हैं जो लोगों को भड़का कर टकराव की ओर ले जाए। कुछ महानता खुद कमांडर कर रहे हैं। पहले धर्म परिवर्तन की बात कर, फिर एक विवादित और आर्य समाज विरोधी डेरे का समर्थन लेकर लोगों को बेचैन कर चुके यशपाल मलिक अब बिजली-पानी के बिल ना भरने के लिए लोगों को उकसा रहे हैं। ये सब राजनीतिक और अपरिपक्व सोच के नमूने हैं। नेतृत्व में बड़प्पन और ठहराव होता है, उछलकूद और आवेश नहीं।

एक बात हम सब याद रखें कि जाति के नाम पर हर वर्ग के लोगों में जहर भर चुका है और तीर एक बार कमान से निकलने के बाद हालात काबू में करना आसान नहीं होगा। आवेश और आक्रामकता की बात करने वाले हर विचार और शख्स को हतोत्साहित करें।  देखें कि कहीं वो आपकी भावुकता, अल्पज्ञान और ऊर्जा के कंधे पर रखकर अपने स्वार्थी और अपरिपक्व इरादों की बंदूक तो नहीं चलाने वाला ?

प्रदीप डबास जी की वाल से – लेकिन अब जाट बहकावे में आने वाले नहीं हैं….

“जाट भोला होता है, दिल का साफ होता है शायद इसी लिए कुछ लोगों को ये लगता है कि जाटों को आसानी से बहकाया जा सकता है….लेकिन अब जाट बहकावे में आने वाले नहीं हैं”

सवाल बड़ा है क्या कोई जाट कभी मुफ्तखोर हो सकता है?…जाट ने हमेशा देना सीखा है….वो बिना मुनाफे के सदियों से खेती करता आ रहा है…जाट बिना सोचे किसी की भी मदद के लिए तैयार हो जाता है….सीमाओं की रक्षा करते हुए कभी अपने प्राणों की परवाह नहीं की तो क्या ऐसा हो सकता है कि जाट कोई चीज मुफ्त में ले ले….आज खुद को जाट नेता बताने वाले एक आदमी ने आरक्षण आंदोलन को लेकर जो कहा सो कहा साथ ही इस आदमी ने प्रदेश के जाटों से बिजली और पानी के बिल ना भरने और बैंक का कर्ज ना चुकाने की अपील भी की……

यहां एक अपील मैं भी अपने ग्रामीण भाइयों से करना चाहूंगा….इस तरह की भड़काउ बातों को ना मानने की अपील….ये वो लोग हैं जो मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं लेकिन जब जाट बिजली पानी के बिल नहीं भरेंगे और बैंक का कर्ज नहीं चुकाएंगे तो क्या उनपर और केस नहीं बनेंगे….ये सोचने की बात है….यहां थोड़ा समझने की जरूरत है….आरक्षण मिलना चाहिए, हर हाल में मिलना चाहिए बाकी दूसरी जो मांगें हैं वो भी अगर जायज हैं तो मनवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाना चाहिए लेकिन इसके लिए कोई ऐसा काम बिलकुल ना करें जिससे आप पर दिक्कत आये…क्योंकि अगर बिल नहीं भरा तो जुर्माना आप लगेगा ना खुद को जाटों का नेता बताने वाले उस आदमी पर जो मंच से बोलकर चला गया….अगर कर्ज नहीं लौटाया तो बैंक जुर्माना और ब्याज आप पर लगायेगा ना कि उस आदमी पर जिसने आपसे अपील की है….

सर छोटू राम ने कहा था कि जाट बोलना सीख ले और दुश्मन को पहचान ले….सर छोटूराम के सिद्धांतों से इस कौम को हमेशा बल मिला है…ये कौम आगे बढ़ी है लेकिन सर छोटूराम ने कभी किसी जाट को मुफ्तखोरी की सीख नहीं दी….उन्हें पता था क्या कहना है और क्या नहीं कहना है…. पिछले दिनों एक वीडियो आई जिसमें ट्रेन में एक आदमी को इस लिए थप्पड़ मार देता है क्योंकि उसने जाट को गंदा बोला या फिर जाट को देवता नहीं बोला…..कौम के अपमान से गुस्सा आता है लेकिन गुस्सा कहां उतारना है ये भी तो समझने की जरूरत है….

जाट भोला होता है, दिल का साफ होता है शायद इसी लिए कुछ लोगों को ये लगता है कि जाटों को आसानी से बहकाया जा सकता है….लेकिन अब जाट बहकावे में आने वाले नहीं हैं….

बलिदान दिवस पर जो प्रस्ताव पास हुए

एक मार्च से बढ़ेगी धरनों की संख्या भिवानी, जींद, कैथल, पानीपत, हिसार, करनाल, दादरी, कुरुक्षेत्र, मेवात व पंचकूला में बढ़ेंगें धरने।

26 फरवरी को मनेगा काला दिवस

सरकार के साथ असहयोग आंदोलन की होगी शुरुआत। बिजली, पानी के बिल व सरकारी कर्ज़ों का नहीं होगा भुगतान। 26 फरवरी के बाद एक दिन के लिये दूध व सब्जी की सप्लाई भी बंद होगी, तारीख की 26 को ही होगी।

राष्ट्रपति को ज्ञापन, संसद का घेराव, जन प्रतिनिधियों के लिखित समर्थन पत्र, 36 बिरादरी का भाईचारा मजबूत करने के लिये बैठक, सम्मेलन, रैलियों का आयोजन।

विवाह समारोह में डीजे, शराब, दहेज आदि का त्याग।

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