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हरियाणा में जिलेवार भर्ती – सरकार की मंशा पर उठते सवाल

28 जून की बैठक में लग सकती है फैसले पर मुहर

June 25, 2016 11:45 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

एक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छाती ठोक कर कहते हैं कि देश में नौकरियां लिखित परीक्षाओं के आधार दी जायेंगी लेकिन इसके ठीक उलट हरियाणा की भाजपा सरकार ने लिखित परीक्षा को दरकिनार कर साक्षात्कार ही नौकरियों का पैमाना बनाने का मन बना लिया है। हाल ही में हरियाणा सरकार द्वारा अनुबंध आधार पर जिलानुसार नौकरियां देने का जो फैसला लिया है उसकी चौतरफा निंदा की जा रही है और इसे अपने चहेतों को एडजस्ट करने की साजिश बताया जा रहा है आइये जानते हैं एक नजर नौकरी के इस नए पैमाने के।

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जिलेवार भर्तियां

 

सरकार का पक्ष – सरकार का तर्क है कि पिछली सरकारों के दौरान भर्तियां क्षेत्रवाद की शिकार हुई हैं और राजनीतिक हस्तक्षेप से एक क्षेत्र विशेष के लोगों को तरजीह दी गई है। जिलेवार भर्तियां होने से यह समस्या सामने नहीं आयेगी।

विपक्षी दलों और आम जन की प्रतिक्रिया – सरकार के इस फैसले से विपक्षी दलों, कर्मचारी नेताओं से लेकर आम लोगों तक यही संदेश गया है कि सरकार पर नेताओं का दबाव है, कार्यकर्ता अनदेखी से नाराज हैं। जिलेवार भर्तियां होने से बीजेपी नेताओं की फिर से पूछ होने लगेगी और अपनों को एडजस्ट करके सरकार कार्यकर्ताओं को खुश करने की कोशिश में है। यह पूछने पर कि ऐसा क्यों लगता है कि सरकार चहेतों को एडजस्ट करना चाहती है तो लोग जवाब देते हैं सब कुछ साफ-साफ नजर आ रहा है एक और जहां सभी भर्तियों में लिखित परीक्षा ही मैरिट का आधार बनती जा रही है वहीं सरकार केवल साक्षात्कार के आधार पर ही भर्तियां करेगी। इतना ही नहीं भर्तियों के लिये जिलानुसार कमेटियां भी गठित की जायेंगी इन कमेटियों में कौन लोग शामिल होंगे। और फिर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग जैसी संस्थाओं का सरकार क्या करेगी। सरकार के बचाव में लोग कहते तो हैं कि यदि किसी पद के लिये 200 रिक्तियां हैं और आवेदन 20 हजार के करीब आते हैं तो लिखित परीक्षा भी ली जायेगी। जिलेवार भर्तियों में तो यह तर्क भी बेमानी लगता है। यदि सरकार की मंशा निष्पक्ष भर्तियों की होती तो वह अब तक भर्तियां कर चुकी होती। लोगों का तो यहां तक कहना है कि भाई केंद्र मैं मोदी अर हरियाणा मैं इस खट्टर ती गद्दी पै बिठाकै बहोत बड़ी गलती कर ली। वैसे तो सरकार सरकार के मंत्री ठेकेदारी, आऊटसोर्सिंग पर भर्तियों का विरोध करती रही है लेकिन वहीं प्रक्रिया सरकार शुरु करने जा रही है।

हालांकि अभी तक भर्तियों के लिये क्या पैमाना, क्या मापदंड, क्या रूप-रेखा अपनाई जायेगी इसका खाका सरकार ने जारी नहीं किया है लेकिन इससे यह साफ है कि सरकार की मंशा लोगों को ठीक नहीं लग रही।

भर्ती के लिये गठित की जाने वाली जिला कमेटियां भी सरकार के लिये चुनौति पूर्ण काम होगा। इन कमेटियों में लोगों को किस आधार पर रखा जायेगा। संभवत सरकार को सोचना होगा कि अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपने को दे की कहावत से वह कैसे बचे।

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