Tuesday , 26 September 2017

Home » खबर खास » हरियाणा की तिग्गी

हरियाणा की तिग्गी

September 23, 2016 10:33 pm by: Category: खबर खास, साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

haryana-ki-tiggi

तिग्गी का मतलब तीन चीजां का तिग्गड्डा, मतलब तीन चीज इकट्ठी। एक तिग्गी का मतलब ताश की तिग्गी। पान की तिग्गी, ईंट की तिग्गी, चिड़ी की तिग्गी अर हुकम की तिग्गी। दूसरी तुरुप की तिग्गी। तुरुप की तिग्गी साधारण इक्के नै बी पढ़ण बिठादे सै। कई बै तिग्गी की ट्रेल दो इक्यां के पेयर का भी भूत बणादे सै। या ताशां की तिग्गी माणसां का बहोत सत्यानाश करै सै। फेर जै ताशां की तिग्गी जब समाज का धुम्मां ठा सकै तो माणसां की असली तिग्गी समाज का के कर सकै सै या बात हरियाणा के हरेक माणस कै आसानी तै समझ मैं आ सकै सै । हरियाणा की किस्मत कहवां अक बदकिस्मत मेरै  कम समझ मैं आवै सै। म्हारे हरियाणा में गऊ, गऊ का गोबर अर गऊ मूत्र की तिग्गी नै सदियां तै गुल खिलाये सैं अर ईब तो हद होगी अक दुलिना मैं गउआं के बदलै 5 माणसां की बलि चढ़ाकै बहुत खुश हुये म्हारे समाजी भाई। हालांकि आज ताहिं सिद्ध नहीं हो लिया अक एक बी गऊ उन मरण आल्यां नै मारी थी। हरियाणे के समाज मैं एक तिग्गी और बताई – दलित विरोध, महिला विरोध और विज्ञान विरोध की तिग्गी। इस तिग्गी नै तो पढ़े लिखे माणसां के दिलां मैं भी घणी डूंगी जड़ जमा राखी सैं  वट वृक्ष की ढालां। इस तिग्गी का काम सै अक मजाल सै जै तर्क अर विवेक की खुली हवा किसे खिड़की के म्हां कै घर कै भीतर चली जावै। इसे ढाल कई ढाल की तिग्गी सैं जिन करकै हरियाणा मैं  आर्थिक विकास तो होग्या फेर सामाजिक विकास कै कसूती कैंची मार राखी सै इन तिग्गियां नै। कई बर तो ये पिछाण मैं ए कोन्या आत्ती। आज ताहिं जिसनै इन तिग्गियां नै  छेड़न की हिमाकत करी सै तो छेड़निया का ए नुकसान हुया सै। मजे की एक बात और सै अक तर्क, विवेक और वैज्ञानिक रुझान की तिग्गी नै सदिया तै इन सामाजिक अवरोध पैदा करण आली तिग्गियां तांहीं चुनौती दी सै अर आज बी देवण लागरी सैं। जब ब्रूनो नै कहया अक सूरज धरती के चारों तरफ कोनी घूमता बल्कि धरती सूरज के चारों कान्हीं घूमै सै तो ब्रूनो को धर्म, राष्ट्रवाद अर परंपरा की तिग्गी नै जिंदा जला दिया था। आज बी कोए कैहकै तो देखो अक जिब कोए चीज जलै से तो कार्बनडायक्साइड पैदा हो सै मतलब वातावरण मैं असुद्धि पैदा हो सै फेर हवन मैं भी तो चीज जलैं सैं तो शुद्धि क्यूंकर होवै सै? खैर इसपै फेर कदे सही।

बात तिग्गियां पै चाल रही थी। हरियाणा मैं एक खास बात और देखण मैं आवै सै। राजनीति के दंगल मैं भी म्हारे हरियाणा महान मैं तिग्गियां की गलेट लागैं सैं। एक दौर सै हरियाणा में लाल तिग्गी का इसनै चाहे पान की तिग्गी कहवां चाहे ईंट की तिग्गी। मतलब बंसीलाल, भजनलाल अर देवीलाल की तिग्गी। इस तिग्गी का नतीजा सै यू अधखबड़ा हरियाणा। अधखबड़ा क्यूंकर? यों न्यों अक आर्थिक तरक्की मैं तो गोआ पाछै इसका दूसरा नंबर अर सामाजिक तरक्की मैं यू सबतै फिसड्डी। इसा हरियाणा का मॉडल या लालां की तिग्गी ए रच सकैं थी और किसे के बाक्स की बात नहीं थी या। इस तिग्गी नै समझले हरियाणा पै 1966 सै लैकै 1985 ताहिं राज करया। इस तिग्गी मैं भी फेर आगै तिग्गी देखी जा सकैं सैं। बंसीलाल, सरोज अर सुरिंदर की एक तिग्गी। कई साल पूरा हरियाणा इननै खूब मोर की ढालां नचाया। मजाल किसकी अक कोए चूं बी करज्या। न्योंए फेर एक तिग्गी उभरी देवीलाल, ओमप्रकाश चौटाला अर रणजीत सिंह की। फेर देवीलाल के रैहन्ते इस तिग्गी का एकछत्र राज कोन्या चाल्या। फेर जिब औम प्रकाश चौटाला, अभय अर अजय की तिग्गी आई तो हरियाणा के एक बै फेर भाग जाग्गे। विकास के कामां का ढूं मार के गेर दिया। मजाल सै जै किसी चौथे माणस के कहे तैं  पत्ता बी हिलज्या हरियाणा मैं। फेर हरियाणे आल्यां की यादाश्त बहोतै कमजोर सै अर थोड़े से दिनां मैं पाछली बातां नैं भूल ज्यावै सैं। इस तिग्गी नै  हरियाणा मैं के के गुल खिलाये इसका किसनै नहीं बेरा। फेर बख्त तो परिवर्तनशील सै। इसे दौर में भजनलाल, चंद्रमोहन अर कुलदीप बिश्नोई की तिग्गी आई। या तिग्गी अपनी तुरुप चाल मैं फेल होगी अर इस ताहि एक दूसरी तिग्गी नै मात दे दी। या मात देवण आली तिग्गी बड़े कमाल की सै। या तिग्गी सै भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा अर आशा हुड्डा की हरियाणा मैं पड़गहाट उठरया सै। इस तिग्गी की चौधराहट के नशे-नशे मैं दो साल तो काढ दिये। फेर ईब मुशीबत होरी सै लोगां नैं। निरी चौधराहट तै कद पेट भरया सै। आई किम्मै समझ मैं हरियाणा की तिग्गी अक नहीं। म्हारे भारत देश मैं भी तिग्गी की अवधारणा कदे कदीमी तै चाल्ली आवै सै। ब्रह्मा शिव गणेश की तिग्गी ने कोण नहीं जानता। फेर ईब देखना योहे सै अक तर्क विवेक, वैज्ञानिकता की तिग्गी क्यूंकर हरियाणा मैं पैर फैलावै इन ढाल ढाल की। तिग्गियां जो असली विकास विरोधी अर मानव विरोधी सैं उनतै निजात मिलै । फेर हरियाणा आल्यां कै ईबै जच नहीं ली सै अक इस तिग्गी की जकड़न तै छुटकारा मिल सकै सै। इसके बाद की फेर कदे सही। गेर रै गेर पत्ता गेर ।

dr-ranbeer-dahiya

लेखक परिचय

लेखक डॉ. रणबीर सिंह दहिया, पीजीआई रोहतक से रि. सर्जन एवं समाजसेवी हैं। वर्तमान में डॉ. साहब जन स्वास्थ्य अभियान के तहत शिविर एवं ओपीडी के जरिये लोगों को अपनी निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. दहिया हरियाणवी साहित्य के मर्मज्ञ हैं और हरियाणवी भाषा में ही दैनिक ट्रिब्यून में लंबे समय से  स्तंभकार भी हैं।

हरियाणा की तिग्गी Reviewed by on . तिग्गी का मतलब तीन चीजां का तिग्गड्डा, मतलब तीन चीज इकट्ठी। एक तिग्गी का मतलब ताश की तिग्गी। पान की तिग्गी, ईंट की तिग्गी, चिड़ी की तिग्गी अर हुकम की तिग्गी। दूस तिग्गी का मतलब तीन चीजां का तिग्गड्डा, मतलब तीन चीज इकट्ठी। एक तिग्गी का मतलब ताश की तिग्गी। पान की तिग्गी, ईंट की तिग्गी, चिड़ी की तिग्गी अर हुकम की तिग्गी। दूस Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top