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हरियाणा की राजनीति की, बात न्यारी सै

March 28, 2017 10:22 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

हरियाणा की धरती के कुरूक्षेत्र में महाभारत हुआ था, कौरवों-पांडवों के बीच। कुरूक्षेत्र पवित्र स्थली है और कदम-कदम पर गीता का संदेश गूंजता है। श्री कृष्ण ने मात्र सारथी बनना स्वीकार किया था, पर सत्य यह है कि वे पांडवों के मार्गदर्शक थे। कितनी बार और कैसे-कैसे उन्होंने कुटनीति से पांडवों को हारते -हारते बचाया। यही कारण है कि हरियाणा की राजनीति देश में सबसे न्यारी सै। मात्र एक रूपया, एक वोट से चौधरी देवीलाल ने चुनाव खर्च करने और लोगों को जोड़ने का मंत्र दिया। फिर वृद्धावस्था पेंशन शुरू की। उत्तरप्रदेश में भी इसे समाजवादी पेंशन के तौर पर चलाया गया। अब वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि करने की होड़ और श्रेय लेने का प्रयास किया जाता है, लेकिन शुरू करने का श्रेय तो चौधरी देवीलाल को ही जाता है।

                हरियाणा ने ही गठबंधन और जोड़-तोड़ की राजनीति सिखाई। जुगाड़ राजनीति से केंद्र में भी कांग्रेस को हराने के लिए हरियाणा के इसी फार्मूले को अपनाया गया। जोड़-तोड़ और पाला बदल की आयाराम-गयाराम की राजनीति से चौधरी देवीलाल मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए। राज्यपाल तपाशे की ठुड्डी पकडऩे का फोटो आज तक याद है। अब असम, अरूणाचल, मणिपुर, गोवा में देखते-देखते कांग्रेस की सरकारें बनते-बनते भाजपा की सरकारें बनती गई। तब कहीं न कहीं हरियणा की जुगाड़ राजनीति काम करती दिखाई दी।

                विधानसभा चुनाव से पहले पाल बदलना, पार्टी बदलना, नई पार्टी बनाना और नए मंच का गठन करना ये सारे गुर हरियाणा की धरती से ही कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुंचें। विधायकों को उत्तराखण्ड, हिमाचल या तिरूपति मंदिर के दर्शन करवाना भी कम करतब नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इसी लिए इन सारे मंत्रों को सीखने और सीखाने के लिए कुरूक्षेत्र पहुंचे। पार्टियों को पारिवारिक बताते हुए इनेलो चौटाला, सपा यादव, बसपा मायावती की पार्टियां बताते हुए भाजपा पर कोई ठप्पा नहीं है, यह प्रवचन कर दिया। पर दिल है कि मानता नहीं। दिल है कि इसे शाह की तर्ज पर मोदी भाजपा कहने को बेकरार है। उत्तरप्रदेश में चुनाव में मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा गया। विरोधी कहते रह गए कि भाजपा ने मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं दिया। लो, अब चेहरा भी सामने आ गया और काम-काज भी दिखने लगा। पर चुनाव मोदी भाजपा ही लड़ी थी।

                कुरूक्षेत्र में अमित शाह के पहुंचने पर भाजपा के इसी क्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी स्वागत के लिए नहीं पहुंचे। हाईकामन के सामने इतना दम दिखाना किसी सैनी का ही साहस है। वे कहते हैं कि मुझे तो बुलाया ही नहीं गया, जबकि मंत्रियों में शाह का स्वागत करने और पांव छुने की होड़ लगी रही। बताओ, भाजपा के विधायक रणधीर कापड़ीवास ने भी अपने गांव के लिए निकट जौनियावास में कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा का स्वागत किया। यही नहीं पूर्व की हुड्डा सरकार की तारीफ करते हुए कि उस समय इलाके का विकास हुआ। अब हमारी भी जिम्मेवारी बनती है कि हम जनता की उम्मीदों पर खरे उतरें। उन्होंने कहा कि मेरे इलाके में सांसद आए तो स्वागत करना तो बनता ही है। अब अमित शाह हरियाणा में संदेश देकर नहीं बल्कि लेकर जाएंगे कि यहां कुछ भी हो सकता है। अभी भाजपा विधायक शांत नहीं हुए और ना ही संतुष्ट हुए हैं। इस तरह कांग्रेस सांसद का स्वागत कर और शाह के कार्यक्रम में ना पहुंचकर हाईकमान को संदेश तो दे ही दिया कि भाजपा सरकार में सबकुछ अच्छा नहीं है। तभी तो हम कह रहे हैं कि हरियाणा की राजनीति देश से न्यारी सै।

kamlesh-bhartiyaलेखक परिचय

कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

हरियाणा की राजनीति की, बात न्यारी सै Reviewed by on . हरियाणा की धरती के कुरूक्षेत्र में महाभारत हुआ था, कौरवों-पांडवों के बीच। कुरूक्षेत्र पवित्र स्थली है और कदम-कदम पर गीता का संदेश गूंजता है। श्री कृष्ण ने मात्र हरियाणा की धरती के कुरूक्षेत्र में महाभारत हुआ था, कौरवों-पांडवों के बीच। कुरूक्षेत्र पवित्र स्थली है और कदम-कदम पर गीता का संदेश गूंजता है। श्री कृष्ण ने मात्र Rating: 0

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