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हरियाणा विधानसभा में हुए कड़वे प्रवचनों का कड़वा विश्लेषण

August 27, 2016 9:10 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

muni tarun sagar in haryana vidhansabha

 “धर्म एक पति है और राजनीति पत्नी, पति का कर्तव्य है पत्नी का संरक्षण करना और पत्नी का कर्तव्य है पति के अनुशासन को स्वीकार करना। – जैन मुनि तरुण सागर

“धर्म एक पति है और राजनीति पत्नी, पति का कर्तव्य है पत्नी का संरक्षण करना और पत्नी का कर्तव्य है पति के अनुशासन में रहना।” ये नया ज्ञान हरियाणा के विधायकों और अफसरों सहित राज्यपाल तक ने मानसून सत्र के पहले दिन प्राप्त किया। मुझे पूरी उम्मीद है किसी ने कड़वें वचनों के प्रवक्ता जैन मुनि तरुण सागर के इन प्रवचनों पर प्रश्न नहीं किया गया होगा। उनसे किसी ने नहीं पूछा होगा कि दुनिया में बहुत सारे धर्म हैं राजनीति कौनसे धर्म की पत्नी है। अगर राजनीति को धर्मों की पत्नी मान लिया जाये तो उसकी दशा द्रोपदी जैसी रहेगी। जिस प्रकार द्रोपदी को हर साल पांच पांडवों में से एक के साथ रहना पड़ता था और अगले साल दूसरे के साथ रहने से पहले उसे अपना कौमार्य दोबारा हासिल करना पड़ता था। तो क्या हर पांच साल बाद बनने वाली सरकार को भी अलग धर्म की पत्नी बनना होगा।

क्या ये संविधान के खिलाफ नहीं है

मुनि जी कहते हैं राजनीति पर धर्म का अंकुश होना चाहिये जबकि हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है, तो क्या यह संविधान के खिलाफ नहीं है। वहीं उन्होंनें यह भी कहा कि धर्म के राजनीति में आने से रामायण होगा। और राजनीति के धर्म में आने से महाभारत। दोनों ही सूरतों में लोकतंत्र नहीं था राजशाही थी। क्या यह देश की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। बेहतर होता सदन में धार्मिक प्रवक्ता की बजाय राजनेताओं को कोई मानवीयता का पाठ सिखाता, कोई वादों पर खरा उतरने के नुस्खें उन्हें देता, कोई उन्हें स्मरण कराता कि जो शपथ उन्होंनें विधानसभा में प्रवेश करने से पहले ग्रहण की थी उसके तात्पर्य क्या हैं? इस तरह के प्रवचनों से तो लैंगिक भेदभाव और विवाह संस्था के प्रति उनकी बनी बनाई सोच ही पुख्ता होती है।

हालांकि जैन मुनि तरुण सागर का यह कोई पहला अनुभव नहीं है सदन को संबोधित करने का इससे पहले भी वह मध्यप्रदेश की विधानसभा में अपने प्रवचन दे चुके हैं। लेकिन हरियाणा विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका था। प्रदेश की भाजपा सरकार ने धार्मिक प्रवक्ता को सदन में बुलाकर यह नया चलन शुरु किया है अब देखना होगा कि दूसरे धर्मों के अनुयायी अगर अपने धर्म के प्रवक्ताओं को सदन में बुलाने की मांग करते हैं तो सरकार का क्या पक्ष रहेगा।

-जगदीप सिंह (लेखक हरियाणा खास के संस्थापक संपादक हैं)

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