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आमिर ख़ान नोज़ पिन – कोका तेरा कुछ-कुछ कैंहदा

क्या है हरियाणवी नोज़ पिन का इतिहास

May 5, 2017 12:06 am by: Category: खबर खास, धरोहर खास Leave a comment A+ / A-

अपनी हर आने वाली फिल्म से पहले आमिर खान चर्चा में आ जाते हैं। बस उनका नया लुक भर आने की देर होती है। दंगल में आमिर को हरियाणा इतना भा गया है कि अपनी आने वाली फिल्म में के लिये भी उन्होंने हरियाणवी स्टाइल की नोज़ पिन अपनी नाक में डाल ली। अब इसके लिये उन्होंने अपनी नाक छिदवाई (हरियाणा में बिंधवाई) है या कुछ और कलाकारी है अभी यह पक्का नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आमिर का यह नया अवतार उनकी आने वाली फिल्म ठग ऑफ हिंदूस्तान में दिखाई देगा जो कि फिलिप कोटलर के उपन्यास कन्फेशन ऑफ ए ठग पर आधारित है। लेकिन हम यहां बात आमिर खान या उनके लुक की नहीं करेंगें बल्कि हम बात करेंगें जिस वजह से आमिर चर्चा में आये हैं उसकी। यानि हरियाणवी स्टाइल की नोज़ पिन (Nose Pin) की। क्या आप जानते हैं हरियाणवी में नोज़ पिन को क्या कहते हैं? हरियाणवी में इसे कहते हैं कोका। जी हां वही कोका जो पंजाबी गानों में भी आपने सुना होगा कोका तेरा कुछ कुछ कैंहदा।

कोका या कहें नोज़ पिन यह तो आप जान ही गये हैं कि नाक में पहनने का एक छोटा सा सुंदर सा आभूषण होता है जो नाक में डला हुआ बहुत ही महीन मनके या मोती जैसा दिखता है। लेकिन यह आभूषण हरियाणा में तो महिलाएं या लड़कियां ही पहने दिखती हैं। पुरूषों द्वारा नाक छिदवाने का कोई उदाहरण दिखाई नहीं देता।

स्त्री के श्रंगार में आभूषण अलंकार का काम करते हैं यानि चांद में चार चांद लगाने का काम करने वाले माने जाते हैं। इसी कारण आभूषणों के प्रति महिलाओं के प्रेम के अनेक किस्से भी साहित्यिक कहानियों और उपन्यासों का केंद्र रहे हैं। प्रेमचंद ने अपने उपन्यास गबन में जालपा जो उपन्यास की नायिका है के जरिये इस विषय को विस्तार से समझाया है। खैर आभूषण प्रेम अपनी जगह है और कोका अपनी जगह।

कैसे प्रचलन में आया कोका

कोका या कहें नोज़ पिन का उद्भव और विकास सदियों पुराना माना जा सकता है क्योंकि हिंदूओं में स्त्रियों को नाक और कान छेदन के संस्कार किये जाते हैं। पांव की अंगुलियों से लेकर मांग टीके तक स्त्रियां आभूषण पहनती हैं इनमें नाक और कान में आभूषण पहने के लिये इन अंगों में छेदन करवाया जाता है। हालांकि कान छेदन की परंपरा कुछ वर्गों में पुरूषों में भी रही है। लेकिन नाक छेदन की परंपरा सिर्फ स्त्रियों के लिये ही रही है। हरियाणवी स्टाइल की जो नोज़ पिन आमिर खान ने डाली है उस तरह के आभूषणों का आगमन मध्यकाल यानि मुगल सल्तनत के आगमन से माना जाता है। नाक छेदन संस्कार के दौरान तो कन्याओं के नाक व कान में नीम की टहनी के बहुत ही महीन तिनके को डाला जाता है। फिर उसमें हल्दी तेल आदि भी लगाया जाता है ताकि छेदन के दौरान हुए दर्द से निज़ात मिले और नीम से किसी तरह के दुष्प्रभाव का ख़तरा भी नहीं रहता।

यह भी है मान्यता

स्त्रियों के नाक में बांयी और छेदन किया जाता है इसके पिछे अक्सर यह धारणा बताई जाती है कि इससे स्त्रियों को मासिक धर्म में होने वाली पीड़ा में राहत मिलती है और उनकी यौनोत्तेजना में कमी आती है। यहां तक माना जाता है कि इससे स्त्रियों को प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा भी कम महसूस होती है। हालांकि कुछ प्रगतिशील सोच रखने वाले और महिला मुद्दों को लेकर काम करने वाले लोग इस तरह की धार्मिक मान्यताओं को महिलाओं के खिलाफ उनके शोषण का कारण भी मानते हैं। क्योंकि कुछ रूढ़ीवादी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोक प्रचलित धारणा यह भी है कि स्त्रियों को नियंत्रित करने के लिये ये छेदन संस्कार अनिवार्य हैं। स्त्रियों में कामाशक्ति पुरूषों की अपेक्षा अधिक होती है इसलिये इन पांव की अंगुलियों, टखनों, हाथ की ऊंगलियों हाथ, बाजू, गले, नाक, कान, मस्तक, से लेकर मांग तक स्त्रियों को आभूषणों के जरिये बांध कर, जकड़ कर रखा जाता है।

आमिर खान ने नोज़ पिन यानि कोका पहन कर एक अच्छा संदेश दिया है देखना होगा कि आमिर द्वारा चलाया यह फैशन लोगों को सिर्फ आकर्षित करता है या फिर इससे नोज़ पिन की मांग में भी कुछ वृद्धि होती है।

 

आमिर ख़ान नोज़ पिन – कोका तेरा कुछ-कुछ कैंहदा Reviewed by on . अपनी हर आने वाली फिल्म से पहले आमिर खान चर्चा में आ जाते हैं। बस उनका नया लुक भर आने की देर होती है। दंगल में आमिर को हरियाणा इतना भा गया है कि अपनी आने वाली फि अपनी हर आने वाली फिल्म से पहले आमिर खान चर्चा में आ जाते हैं। बस उनका नया लुक भर आने की देर होती है। दंगल में आमिर को हरियाणा इतना भा गया है कि अपनी आने वाली फि Rating: 0

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