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हरियाणवी फिल्म महोत्सव पर मंथन की जरूरतः कमलेश भारतीय

September 22, 2016 1:01 pm by: Category: खबर खास, मनोरंजन खास 1 Comment A+ / A-

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हिसार में कुछ दिन पहले ही हरियाणा फिल्म महोत्सव बड़े जोश के साथ संपन्न हुआ । सोशल मीडिया पर अभी तक इसकी फोटोज डाली जा रही हैं । यानी इसका खुमार चढा हुआ है । अच्छी बात है । इससे पहले यमुनानगर के डी ए वी आर्य गर्ल्स कॉलेज में बीते वर्षों में इसकी शुरुआत हो चुकी थी । चार बार वहीं फिल्म महोत्सव मनाया गया ।

अब सवाल यह उठता है कि हरियाणा फिल्म महोत्सव से हरियाणवी फिल्मों के भविष्य पर कितना मंथन हुआ ? यह सुखद बात है कि पिछले वर्ष राजीव भाटिया द्वारा निर्देशित फिल्म पगड़ी- द ऑनर और इस वर्ष सतरंगी फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला । यही नहीं हरियाणा सरकार ने भी दस दस लाख रुपये इनाम के अलावा टैक्स फ्री करने की घोषणा की । संयोग यह भी है कि इन दोनों हरियाणवी फिल्मों में हिसार के यशपाल शर्मा ने भूमिका निभा कर अपना वादा पूरा किया । हर बार यशपाल शर्मा से मीडिया यही सवाल करता कि हरियाणवी फिल्म के लिए क्या करोगे ? यशपाल शर्मा का कहना था कि बस, जब कोई नये ढंग से फिल्म बनायेगा तो वे अवश्य सहयोग करेंगे । यशपाल शर्मा ने वादा पूरा किया ।

चार दिन चले हरियाणवी फिल्म महोत्सव में इन दोनों हरियाणवी फिल्मों की धूम रही । बाकी धूम रही सेल्फी लेने की ।

इस चार दिवसीय फिल्म महोत्सव में हरियाणा के हर कोने से छोटे बडे कलाकार, फिल्मों के विषय से जुड़े अन्य लोगों का एक जगह, एक मंच पर आना सुखद कहा जा सकता है । मुम्बई में शायद ये हरियाणा के कलाकार इतना समय न मिले हों , जितना हिसार में मिल सके । किनके नाम लिखूं , किनके नहीं ? पर इस महोत्सव से यह बात सामने नहीं आई कि आखिर हरियाणा सरकार से प्रदेश के कलाकार क्या उम्मीद करते हैं ? सिनेमाघर लगभग बंद हो चुके हैं मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों में महंगी टिकट लेकर हरियाणवी फिल्म देखने कितने लोग जाते हैं या गये ? हरियाणा सरकार खेल नीति बनाती हैं, फिल्म नीति क्यों नहीं ? हरियाणवी फिल्मों के विषय क्या होने चाहिए ? सिर्फ एक-दूसरे से मिलना ही काफी नहीं , मिलकर विचार करना भी जरूरी है । क्या प्रस्ताव या कोई मसौदा तैयार हुआ ? किन लोगों को आमंत्रित किया, नहीं किया या सम्मान देने से चूक गए ? चंद्रावल फिल्म से जुड़े किसी कलाकार को स्मरण किया, जिस फिल्म ने पहली बार हरियाणवी फिल्म को चर्चा दिलाई । क्या उदयभानु हंस पर बनी एक घंटे की फिल्म को जगह मिली ?

सवाल बहुत से हैं । फिल्म महोत्सव के आयोजन पर आयोजकों को बहुत बहुत बधाई, पर अब थोडा खुमार उतर गया हो तो क्या इन सवालों पर कुछ विचार करेंगे ? जिससे हरियाणवी फिल्म निर्माण को और गति मिलेगी सके । अन्यथा न लें । यह एक सार्थक शुरुआत होगी । कुछ मित्र मुझ पर भी सवाल उठा सकते हैं क्योंकि मैं कोई फिल्म समीक्षक नहीं , मात्र एक दर्शक हूं । दर्शक के तौर पर जो बात मन में उठी , उसे पूरी विनम्रता से आप तक पहुंचाना अपना फर्ज समझा । आप क्या कहेंगे ?

लेखक परिचय

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लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

 

हरियाणवी फिल्म महोत्सव पर मंथन की जरूरतः कमलेश भारतीय Reviewed by on . हिसार में कुछ दिन पहले ही हरियाणा फिल्म महोत्सव बड़े जोश के साथ संपन्न हुआ । सोशल मीडिया पर अभी तक इसकी फोटोज डाली जा रही हैं । यानी इसका खुमार चढा हुआ है । अच् हिसार में कुछ दिन पहले ही हरियाणा फिल्म महोत्सव बड़े जोश के साथ संपन्न हुआ । सोशल मीडिया पर अभी तक इसकी फोटोज डाली जा रही हैं । यानी इसका खुमार चढा हुआ है । अच् Rating: 0

Comments (1)

  • kamlesh bhartiya

    haryana khas ek achhi site hai aur isme rajniti se lekar sahitya v manoranjan tak ki khabron ko khas dangh se parosa jata hai. badhai.

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