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HTET विश्लेषण-सुमित सिहँ भगत

December 28, 2017 2:45 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

HTET विश्लेषण-सुमित सिहँ भगत

10वीं तक पढ़ाने वालों के लिए चाणक्य या गूगल जैसा ज्ञान रखने या पीएचडी और रिसर्चर ढूंढने की कोशिश की जा रही है।

                   HTET विश्लेषण परिचर्चा~पेपर मुश्किल हो कोई बात नहीं यदि उस स्तर के सिलेबस में से आए जिसके आप अध्यापक बनने जा रहे हैं।

TGT social study का पेपर देखा आज। देखकर सिर पीट लिया। 10th की कक्षाओं को पढाना है मगर जो सेक्शन हिंदी का था उसे देखकर ऐसा लगा मानों शिक्षा विभाग व्याकरणाचार्य, भाषा के पण्डित ढूंढ रहा है।

10वीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वालों के इच्छुक और भावी अध्यापकों से आप एसएस में अर्थशास्त्र के टेक्निकल प्रश्न पूछ रहे हो। इतिहास के नॉन इम्पोर्टेन्ट और ऐसे सेलेक्टिव प्रश्न दिए हुए हैं जिनमें से ज्यादातर विद्यार्थियों को पिछले दस साल से ज्यादा समय मे ना तो पढ़ाए गए और ना पढ़ाये जाएंगे ।

इसके लिए आप पिछले 10 साल के विद्यार्थियों के वार्षिक प्रश्न पत्र चेक कर सकते हैं। ना सरकार और ना शिक्षा विभाग द्वारा इस परीक्षा के सिलेबस को लेकर कोई नॉर्म्स, मानक, कोई दायरा तय किया हुआ है।

बाल-मनोविज्ञान, पैडागोजी के बेहद अनसुने सवाल हैं जिनको सेलेक्शन के बाद कभी कोई शिक्षाविद, विभागीय अफसर आपको आकर कभी नहीं पूछेगा यदि आप अध्यापक बन जाते हैं।

तकरीबन 6 साल से ज्यादा का टीचिंग एक्सपीरियंस है इससे ज्यादा वाहियात पेपर कोई और नहीं हो सकता। ये केवल बेरोजगार साथियों को यथावत बेरोजगार रखने.. बेइज्जत करने और अगले साल फिर से HTET के नाम पर उनसे उगाही करने के अलावा और कुछ नहीं है।

ये बिल्कुल ऐसा होगा जैसे 9/11 के हमले के आरोपियों के खिलाफ पैरवी करने वाले वकील से जज ये पूछ ले कि तुम हमलावरों को आतंकी कहने से पहले ये बताओ कि जहाज को ट्विन टॉवर तक की ऊंचाई तक लाने के लिए कितने डिग्री का एंगल, कितनी रेस पर कौनसे गियर के साथ कितने ईंधन के साथ चलाने वाले ने क्रैश किया था।

ये बिल्कुल ऐसा है कि शादी के फेरो पर सातों वचन भरवाते हुए पण्डित पूछ लें कि होने वाले बच्चे की औरनाल बच्चे से अलग कैसे करते हैं।

ये पेपर बिल्कुल ऐसा है जैसे आप दूध लेने जाओ और जमींदार से कहो कि तुमको पशुपालन का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं क्योंकि तुम ये नहीं बता सकते कि काली रंग की भैंस हरे रंग का चारा खाकर सफेद दूध क्यों देती है।

ये बिल्कुल ऐसा होगा कि MBBS की वार्षिक परीक्षा में पोस्टमार्टम (एनोटॉमी) से रिलेटेड पेपर में दाह संस्कार और जनाजे को दफनाने की क्रियाविधि यह कहकर पूछ लिए जाए कि क्या पता मरीज की लाश लावारिस हो और आपको उसके धर्म के हिसाब से उसका अंतिम संस्कार या जनाजे की रस्म भी पूरी करनी पड़ जाए।

या रोडवेज की ड्राइवरी के प्रक्टिकल में कैंडिडेट्स को बस चलवाने की जगह एयरपोर्ट पर जहाज के केबिन में बिठाकर जहाज उड़ाने को कहा जाए।

10वीं तक पढ़ाने वालों के लिए चाणक्य या गूगल जैसा ज्ञान रखने या पीएचडी और रिसर्चर ढूंढने की कोशिश की जा रही है।

और अंतिम बात शिक्षा मंत्री को सोचनी चाहिए जो अपनी बेटी आशा शर्मा को अपने मंत्री कोटे से मनोनीत करके आईएएस बनाने की फिराक में है मगर बेरोजगार व गेस्ट साथियों से इस बेहद जटिल व सेलेक्टिव टेस्ट को पास करने की चुनौती देते हैं।

अध्यापन का पैमाना पांडित्य नहीं है । अध्यापन कोई शास्त्रार्थ नहीं है। अध्यापन अनगढ़ से बचपन को कभी उनका सहपाठी बनकर, कभी माँ बनकर, कभी पिता बनकर तो कभी गुरु बनकर उनका भविष्य बनाने का नाम है।

लेखक परिचय – सुमित सिंह भगत, हरियाणा हिसार के भाटोल रोगंङान गाँव में रहते है। पूर्व छात्र नेता व वर्तमान में अध्यापन से जुङे है।

 

नोट:- प्रस्तुत लेखे में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। Poem के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।

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