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हार गये, कोई बात नहीं ! अगले ओलिंपिक पर ध्यान दो…

August 21, 2016 11:33 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

India in rio

ओलिंपिक, अगर इतिहास को ही देखा जाये तो भारत के लिये कुछ खास कमाल नहीं रहा है। हॉकी में एक जमाने में भले ही भारत की तूती बोली हो लेकिन अब तो पिछले तीन दशक बीत जाने के बाद भी अन्य टीम हमारे राष्ट्रीय खेल में भी हमारे पंजे नहीं टिकने देती। इस बार हालांकि भारत की पुरुष टीम ने हॉकी में बेहतर खेल दिखाया और उसके प्रदर्शन को निराशाजनक नहीं कहा जा सकता लेकिन महिला टीम से ओलिंपिक क्वालिफाई करने के बाद जितनी बड़ी उम्मीदें भारतवासियों ने लगानी शुरु की थी उससे उलट कहीं ज्यादा निराशाजनक प्रदर्शन महिला हॉकी टीम का रहा है। अन्य प्रतिस्पर्धाओं में भी कुछ खिलाड़ियों को छोड़ दिया जाये तो बाकि खिलाड़ी अपना खुद का श्रेष्ठ प्रदर्शन भी नहीं कर पाये। ओलिंपिक हालांकि अभी खत्म नहीं हुआ है लेकिन भारत की और से उम्मीद की किरण अब जो योगेश्वर दत्त से थी, रविवार शाम को वो भी खत्म हो गई, सिर्फ और सिर्फ बैडमिंटन में पीवी सिंधु ने जो प्रदर्शन किया उसे काबिले तारीफ कहा जाएगा। खैर, उसने भारत की झोली सिल्वर तो दिया ही, वहीं साक्षी मलिक ने भी भारत की लाज रखी, विनेश फोगाट की मेहनत को भी सलाम करना होगा जो कि चोट कारण एक मुकाबले में रह गईं।

बहुत सारे खिलाड़ी ऐसे हैं जो अपने स्तर पर तैयारियां करते हुए, तमाम अभावों को झेलते हुए ओलिंपिक तक पहुंचे हैं और बहुत से ऐसे हैं जिनके सपने बहुत पहले गांव के कच्चे मैदानों में धूमिल हो गए हैं। वहीं कुछ प्रयास करते हैं तो उनकी परिणति नरसिंह एक्ट की तरह होती है। क्या हमें अपने देश में खेल के अंदर खेल नजर नहीं आते? क्या हमें ओलिंपिक संघों के अंदर राजनीतिक मठाधीश नजर नहीं आते? क्या हमें एक लचर खेलनीति नजर नहीं आती? जितनी ईनाम राशि की घोषणा सरकार पुरस्कार लाने के बाद देने की करती है यदि इतनी राशि खिलाड़ियों को सुविधाएं प्रदान करने के लिये दी जायें तो कितनी ही दीपा करमाकर नये कीर्तिमान स्थापित करने के लिये आगे आ सकती हैं। कितनी निर्मला श्योराण अपने प्रदर्शन को बेहतर बना सकती हैं। डोप टेस्ट के मामले में जो कुछ हुआ उसका खेल साफ तौर पर नजर आ रहा है। एक ही चीज के लिये खिलाड़ियों के साथ अलग-अलग ट्रीटमेंट किया जायेगा तो सवाल भी जरुर उठेगा। ओलिंपिक हो या राष्ट्रमंडल खेल ध्यान हरियाणा के खिलाड़ियों पर जरुर रहता है लेकिन इस बार तो हरियाणा के खिलाड़ी भी अपना दमखम नहीं दिखा पाए। दो मुकाबले अच्छे से जीतने के बाद विकास कृष्ण का सफर खत्म हुआ तो मनोज एक जीत दर्ज कर सके। साक्षी और विनेश को अगर छोड़ दिया जाए तो बाकि पहलवान भी अपने दांव-पेच नहीं लड़ा पाए।

रियो ओलिंपिक में भारत बिजिंग वाले नजीतों से भी से भी पीछे लौट गया है। वर्तमान खेल स्थिति भारत के लिए चिंताजनक तो है ही, वहीं खेल नीतियों पर करोड़ों के बजट तैयार करने वाली और करोड़ों खर्चनें के दावे करने वाली सरकारों के लिए भी शर्मनाक है। अगर रियो की इस स्थिति पर चिंता जताने का हम प्रयास करें तो इस स्थिति में सुधार कर लेना ही इसका सही प्रायश्चित होगा।

हार गये, कोई बात नहीं ! अगले ओलिंपिक पर ध्यान दो… Reviewed by on . ओलिंपिक, अगर इतिहास को ही देखा जाये तो भारत के लिये कुछ खास कमाल नहीं रहा है। हॉकी में एक जमाने में भले ही भारत की तूती बोली हो लेकिन अब तो पिछले तीन दशक बीत जा ओलिंपिक, अगर इतिहास को ही देखा जाये तो भारत के लिये कुछ खास कमाल नहीं रहा है। हॉकी में एक जमाने में भले ही भारत की तूती बोली हो लेकिन अब तो पिछले तीन दशक बीत जा Rating: 0

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