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मेरा देश महान या लुटेरे पूंजीपतियों का

October 27, 2017 10:21 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

जब बचपन में स्कूल जाते थे तो ट्रकों, मकान के आगे, स्कूल के गेट पर लिखा मिलता था मेरा भारत महान।  बच्चे थे समझ नही पाते थे इसका मतलब टीचर से पूछा तो उसने बताया था कि मेरा जो भारत है वो सबसे अच्छा है। पूरी दुनिया में सबसे अच्छा, सर्वोपरी है। यहां 6 ऋतूए हैं, दुनिया के महान ग्रंथ हैं, दुनियां में सबसे अच्छा खान-पान, स्वास्थ्य, चिकित्सा हमारी है। अनाज के भंडारों से भरा हुआ, धन-धान्य से भरपूर, सोने की चिड़िया, बंधुत्व के सिद्धांत पर चलने वाला, मानवता के लिए सबको शरण देने वाला, यहाँ ब्रह्मांड के रचयिता ईश्वर ने बार-बार जन्म लिया। बहादुरी में हमारा कोई मुकाबला नही हमारी सेना महान है पड़ोसी देश पाकिस्तान को कितनी बार नाकों चन्ने चबाए है। चीन जरूर धोखाधड़ी से जीत गया। लेकिन बहादुरी में हमारे धर्म ग्रन्थ भरे पड़े है।

ऐसा है मेरा देश, मेरा महान देश, मेरा भारत महान था, है और जब तक धरती है

रहेगा.. रहेगा… रहेगा….

ये शब्द जैसे ही मेरे टीचर ने हमको सुनाए दिल खुशी से भर गया। ऐसा लगा जैसे इस भारत की धरती पर जन्म लेना मेरे पिछले जन्मों का फल है। सायद हम भारत के लोगो ने बहुत अच्छे कर्म पिछले जन्मों में किये होंगे तभी इस महान देश की महान धरती पर जन्म मिला। अक्सर पंडितों को सुना था बोलते हुए की जो इंसान पिछले जन्मों में अच्छे कर्म करता है तो भगवान उसको नए जन्म में अच्छी जगह जन्म देता है ताकि वो सुखी रहे। इस जन्म में अच्छे करेगा तो अगला जन्म सुधर जाएगा।

लेकिन बचपन में जब कुछ जातियों के साथ भेदभाव देखते, उनके साथ छुआ-छुत देखते तो मन में सवाल उठता की इनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों?

शायद इन्होंने हमारी जात वालो के मुकाबले पिछले जन्म में अच्छे कर्म कम किये होंगे। इसलिए प्रभु ने इनको छोटी जात में पैदा किया। ऐसा ही जब बिहार, बंगाल या पूर्व के मजदूर धान लगाने या कटाई करने आते तो उनके साथ ऐसा बुरा व्यवहार किया जाता उनके साथ हम जिनको छोटी जात मानते थे वो भी बुरा व्यवहार करते। उनको बिहारी या पूरबिया कहते। जब वो काम करके अपने घर लौट जाते तो यहाँ के लोग सबसे फटेहाल दिखने वाले को घृणा की नजर से देखते और पूर्बिया या बिहारी कहते। इनको देख कर लगता कि इन्होंने हमारे मुकाबले पिछले जन्मों में और ज्यादा कम अच्छे कर्म किये होंगे तभी तो इनको बिहार, बंगाल, असम की तरफ जन्म मिला।

अब तक एक बात क्लियर हो चुकी थी कि सबसे अच्छी हमारी जाति जिसमें भगवान ने जन्म लिया हमारे अच्छे कर्मों के कारण हमें ये मिली उसके बाद छोटी जाति वाले इसके बाद बिहारी ओर पूरबिये। मतलब महान देश में भी भगवान ने हमें सबसे अच्छी जाति और स्थान पर जन्म दिया। बस ये सोच-सोच कर खुशी से मन भर उठता। लेकिन अब जब बड़े हुए कुछ अच्छे प्रगतिशील देशी-विदेशी लेखकों को पढ़ने का अवसर मिला, समाज को, इतिहास को जानने की कोशिश की, धर्म के आडम्बरो को जाना तो दिमाक पर चढ़ी खुद के सर्वोत्तम होने की चादर खिसक गई। दिमाक पर जमी गन्दगी जो खुद को सर्वोत्तम होने का अहसास करवाती थी मेरा भारत महान होने का काल्पनिक अहसास करवाती थी वो धूल गयी। अब समझ में आया कि मेरा भारत महान कभी था ही नही….

महान भारत सूदखोरों, काला बाजारियों, मुनाफाखोरों, पूंजीपतियों, सामन्तियो, धार्मिक आंडम्बरीयो, जात के ठेकेदारों का था और अब भी है।

ये सुन आपको अगर बहुत गुस्सा आ रहा है कि मै आपके देश को महान मानने से इनकार कर रहा हूँ तो अभी आपके दिमाग पर काल्पनिक महानता की गंदगी जमी हुई है जिस दिन ये गन्दगी धूल जाएगी, उस दिन आप खुद कहोगे की मेरा देश महान नही है। महान देश तो लुटेरे सामन्तियो, पूंजीपतियों ओर उनके लग्गे-भग्गो का है।

अब मेरे देश को भी देख लो वो महान नही है तो क्या है, वो तो एक लूटा हुआ मुल्क है, उसके जल-जंगल-जमीन को महान भारत के लोगो ने तबाह कर दिया है। मेरे भारत की जमीन को बंजर बना दिया है, महान मुल्क के लोगो ने अपनी राष्ट्रीयता को सर्वोपरि दिखाने के लिए कश्मीरी, आदिवासी, पूर्व की राष्ट्रीयताओं को कितनी बार बन्दूक की नाल से लाल किया है। विश्व बन्धुतत्व की बात करने वालों ने रोहिंगयो के साथ जो व्यवहार किया है पूरे विश्व ने देखा है। क्या ये ही विश्व बंधुत्व होता हैं जब पड़ोसी को जरूरत पड़े आप उसके काम आने कि बजाये उसको आंतकवादी कहो। उसको धक्के मार कर घर से निकाल दो।

मेरे भारत के लोग मेंहनत करते है, अन्न उगाते है फिर भी भूख से मरते हैं। दूध, दही, घी, सब्जी, फल, पैदा करते है लेकिन फिर भी ये और इनके बच्चे इनको खा नही सकते इनको खाते है महान देश के लुटेरे, और हम कुपोषण में पैदा होते है और कुपोषण में ही मर जाते है।  मेरे देश के बच्चे हस्पताल में बिना आक्सीजन के मर जाते है। पूरे विश्व में सबसे ज्यादा कुपोषण, खून की कमी, भूखमरी, बच्चों की मृत्युदर, मेरे मुल्क में। लेकिन महान मुल्क के लोग व उनके बच्चे बिना मेंहनत किये ऐसो आराम की जिंदगी व्यतीत करते है। गाड़ी, बस, रेल, हवाई जहाज, स्कूल, हस्पताल, होटल, मॉल सब महान मुल्क के लोगो के लिए है।

महान देश की छोटी से बड़ी हवेलियां, होटल, स्कूल बनाये मेरे देश के लोगो ने लेकिन खुद रहते है फुटपाथ पर, झुगी झोपड़ी में, स्कूल, हस्पताल के दरवाजे इनके लिए बन्द है। ये है मेरा मुल्क

थोड़ा और सुन लो मेरे मुल्क के हाल

  • एक बच्ची सिर्फ इसलिए मर जाती है क्योंकि उसको मेरे सरकार की तरफ से मिलने वाला अनाज नही मिलता क्यो. क्योकि महान देश के लोगो ने जो पहचान का कागज बनाया है वो नही था।
  • कुछ किसान मेरे मुल्क के महान देश के महान शहर में आकर रहम-रहम चिल्लाते है। वो नंगे होकर प्रदर्शन करते है। वो कहते है कि हम अन्न पैदा करने वाले है, हम अन्न दाता है। आज हमारे पास न अनाज है, न कपड़े है। हमारे पास है तो सिर्फ कर्ज, इसलिए हे महान देश के लोगो हम पर थोड़ा रहम करो। महान मुल्क के लोगो हम बुरे दौर में है हमारी कुछ मद्दत करो। लेकिन महान मुल्क के लुटेरे खूब हंसते है।
  • मेरे मुल्क के कुछ लोग गाय खरीद कर लाते है ताकि बच्चों को दूध पीला सके, लेकिन महान मुल्क के लोग उनको घेरकर मार देते है फिर हंसते है उनकी मौत पर
  • मेरे मुल्क के एक लड़के को वो पीटते है उसको गायब करते है आज तक वो गायब ही है जब भी ढूंढने की गुहार महान मुल्क के लोगो से की ढूंढना तो दूर लाठियां खाई।
  • मेरे मुल्क के कुछ लोगो ने महान मुल्क के लुटेरे तंत्र के खिलाफ आवाज उठाई, उनके खिलाफ लिखा तो उनको गोली से मार दिया गया। उनकी मौत पर महान मुल्क के लोग हंसते है जश्न मनाते हैं और कहते है कि कुतिया मर गयी कुते की मौत
  • मेरे मुल्क के मेंहनतकश जब गैर बराबरी के खिलाफ, पिटाई के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो महान मुल्क के लोग उनका बहिष्कार कर देते है। कभी महान मुल्क के लोग मेरे मुल्क के इंसानो को गाड़ी से बांध कर पीटते है, कभी गोबर खिलाते हैं तो कभी थूक चटवाते है।
  • महान मुल्क के लुटेरों की लूट के कारण मेरे मुल्क के 3 लाख मेंहनतकश किसान पिछले 20 साल में मर गए, महान मुल्क के लोगो द्वारा फैलाई गन्दगी के गटर को साफ करने के लिए हर साल मेरे मुल्क के 22 हजार गरीब लोग गटर में ही समा जाते है।
  • इन महान देश के जालिमो ने कल ही तमिलनाडु में एक गरीब की जान ले ली। इस गरीब इंसान ने40 लाख सूद पर लिए 7 महीने में 2 लाख से ज्यादा लोटा भी दिए फिर भी महान भारत के जालिम इसको तँग कर रहे थे और रुपया देने के लिए इसको धमकियां दे रहे थे। इस गरीब इंसान ने जालिमो से तंग आकर आज महान भारत में खुद को और अपने 2 मासूम बच्चों को आग के हवाले कर दिया।

ये महान भारत के लोग हर रोज मेरे गरीब मुल्क के इंसानो का खुन पीते रहते है। खून पीती इन जोको का और इनके महान देश का सर्वनाश होना जरूरी है। ये भगत सिंह, आजाद के सपनो का देश नही है। ये देश काले अंग्रेजो का है।

उनका भारत महान मेरे लोगो के भारत को लूट कर बना है। मेरे भारत के लोगो को जिंदा रहना है तो इन महान देश के लुटेरे लोगो का सर्वनाश जरूरी है।

अब हम मेंहनतकश लड़ेगे ऐसा मुल्क के लिए जिसमें मेंहनत करने वाला महान हो। जिसमें कोई गरीब आग लगा कर न मरे। जिसमें कोई बच्ची भूख से न मरे, कोई बच्चा कुपोषित न हो, किसी को जात, धर्म के नाम पर कत्ल न किया जाये, कोई मेंहनतकश किसान आत्महत्या न करे, कोई गटर में न समा पाए, स्कूल, हस्पताल के दरवाजे सबके लिए खुले हो, कोई किसी की मेंहनत को लूट कर अय्याशियां न करे।

किसी मां का नजीब गायब न हो। उस दिन मेरे मुल्क के लोग महान होंगे।

एक हमारी और एक उनकी

मुल्क में हैं आवाजें दो।

अब तुम पर है कौन सी तुम

आवाज सुनों तुम क्या मानो।।जावेद अख्तर

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लेखक परिचय

उदय चे स्वतंत्र लेखक हैं एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। दलित एवं पीड़ितों के हक की आवाज़ के लिये अपने संगठन के माध्यम से उठाते रहते हैं। उदय चे हिसार के हांसी में रहते हैं।

 

नोट:- प्रस्तुत लेख में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। लेख के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।

मेरा देश महान या लुटेरे पूंजीपतियों का Reviewed by on . जब बचपन में स्कूल जाते थे तो ट्रकों, मकान के आगे, स्कूल के गेट पर लिखा मिलता था मेरा भारत महान।  बच्चे थे समझ नही पाते थे इसका मतलब टीचर से पूछा तो उसने बताया थ जब बचपन में स्कूल जाते थे तो ट्रकों, मकान के आगे, स्कूल के गेट पर लिखा मिलता था मेरा भारत महान।  बच्चे थे समझ नही पाते थे इसका मतलब टीचर से पूछा तो उसने बताया थ Rating: 0

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