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घूंघट में फंसी हरियाणा सरकार हो रही है थू-थू

कृषि संवाद में पर्दा प्रथा को बढ़ावा देने वाला विज्ञापन किया प्रकाशित

June 29, 2017 12:14 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

वैसे तो वर्तमान दौर में पठन पाठन की संस्कृति में ही गिरावट आई है उसमें भी पत्रिकाओं के पढ़ने वालों की संख्या सीमित है उनमें भी अंग्रेजी और हिंदी पत्रिकाओं के पाठक फिर उनमें समाचार, खेल, मनोरंजन प्रतियोगी परीक्षा आदि आदि का अपना पाठक वर्ग है। कुरुक्षेत्र व योजना जैसी पत्रिका के पाठक तो फिर भी अच्छी खासी संख्या में मिल सकते हैं। ऐसे में राज्य सरकारों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पत्रिकाओं के पाठक कितनी संख्या में होंगे इस पर अध्ययन किया जा सकता है। लेकिन पाठक भले जितने हों हरियाणा सरकार की पत्रिकाएं गाहे-बगाहे चर्चा में आ जाते हैं। वैसे तो हरियाणा सरकार भी चर्चा में रहती ही है। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक के बयान अक्सर सुर्खियां बटौर लेते हैं। लेकिन संवाद श्रृंखला की पत्रिकाओं में इस बार कृषि संवाद सुर्खियों में है। इससे पहले शिक्षा विभाग की पत्रिका बीफ खाने के लाभ को लेकर चर्चित हुई थी हालांकि उसमें विवादित जैसा कुछ खास नहीं था लेकिन उसी समय सरकार ने बीफ खाने पर प्रतिबंध लगाया था जिसके कारण यह मामला चर्चा में आया। वर्तमान में मामला है पर्दा प्रथा का।

शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा प्रदा प्रथा को हरियाणा की शान बताते हैं। कृषि संवाद के अंतिम पृष्ठ पर विनय विनय मलिक द्वारा ली गई तस्वीर से घूंघट को हरियाणा की आन बान शान कहा गया है यानि इस विचार के प्रति सरकार की सहमति है।

लेकिन कृषि संवाद पत्रिका के माध्यम से हरियाणा सरकार जिस प्रथा को अपनी आन बान और शान कह रही है इसी कृषि संवाद की बहन पत्रिका हरियाणा संवाद में घूंघट प्रथा की धज्जियां उड़ाने वालों का महिमा मंडन करने वाले लेख प्रकाशित हुए हैं। महिला सशक्तिकरण आधारित विशेष कहानियों में मोनिका गौतम और संगीता शर्मा की विशेष कवरेज में मोनिका गौतम ने घूंघट से आजादी दिलाती गुंडगांव व फरीदाबाद के एक गांव की महिला सरपंचों की कहानी छापी है। मोनिका गौतम की पहली स्टोरी का शीर्षक है घूंघट से आजादी दिलाती महिला सरपंच आखिर हरियाणा की आन बान शान के लिये खतरा बनी इन सरपंचों का महिमा मंडन कैसे किया जा सकता है सरकार को इस बारे में सोचना चाहिये विशेषकर शिक्षा मंत्री को इतना ही नहीं मोनिका फरीदाबाद की जिस सरपंच का जिक्र कर रही हैं वह नज़मा खान हैं। इससे अगली कहानी वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रांगण में स्थित युनिवर्सिटी कॉलेज में ऐसोसिएट प्रोफेसर एवं खाप नेत्री संतोष दहिया की लिखती हैं। जिन्हें घूंघट का विरोध करने पर राष्ट्रपति सम्मान तक मिला है अब बताओ हरियाणा की आन बान और शान की खिलाफत करने वाली महिलाओं को ही सरकार सम्मान दिला रही है यह सरकार तो अपनी ही नाक कटवाने पर तुली है। लिखा है कि हरियाणा की पर्दा प्रथा का विरोध ना केवल राज्य के गांवों में बल्कि जिला और शहरी स्तर पर राज्य की शिक्षित महिलाएं भी इस मुहिम को चलाने के लिए कमर कस रही हैं उनके इस प्रयास को ना केवल राज्य स्तर पर सरहाना मिली है बल्कि देश में भी उनका काफी नाम हुआ है।

वहीं संगीता शर्मा इनसे एक कदम और आगे बढ़ते हुए पूरे के पूरे गांव में ही महिलाओं को पर्दा प्रथा से मुक्ति दिलाने की गौरव गाथा कहती हैं और गुड़गांव के एक गांव भौंडसी की युवा सरपंच दुर्गा देवी की कथा कहती हैं वे लिखती हैं कि बड़ों की इज्जत करना हमें शुरू से ही परिवार में सिखाया जाता है। बड़ों-बुजुर्गों के प्रति सम्मान हमारी आंखों में झलकता है। मात्र घूंघट लेकर हम इस बात का दिखावा नहीं कर सकते। यह कहना गुडग़ांव के भौडसी गांव की सरपंच दुर्गा देवी का है। दुर्गा देवी बड़े गर्व से कहती है कि उनके गांव की कोई महिला घूंघट नहीं लेती और साथ ही लड़कियों की शिक्षा पर विशेष जोर देती हैं।

अब बताओ शिक्षा मंत्री जी को इनका कोई न कोई इंतजाम तो बांधना ही चाहिये। या फिर स्वयं को ही घूंघट ओढ़ लेना चाहिये। सोशल मीडिया पर हरियाणा सरकार का यह कारनामा काफी चर्चित हो रहा है। समाज सुधारकों से लेकर विपक्षी दलों के लोग हरियाणा सरकार विशेषकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा पर चुटकियां ले रहे हैं। जनवादी महिला समिति ने प्रैस बयान जारी कर सरकार के इस कृत्य की निंदा करते हुए सरकार से माफी मांगने व पृष्ठ से विज्ञापन को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग की है। महिला समिति ने पत्रिका की प्रतियों को जलाने की चेतावनी भी सरकार को दी है। अब देखना होगा कि सरकार का इस पर क्या रूख रहता है।

खैर घूंघट के बारे में पहले बहुत बाते हुई हैं और पर्दे के पिछे क्या क्या घुटता है यह भी लोकगीतों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने आह्वान गीतों में शामिल किया है फिर भी शिक्षामंत्री रामबिलास जी कहीं मिले तो उन्हें दिवंगत रामफल जख्मी जी का यह गीत अवश्य सुना देना।

पाड़ बगाद्यो बहना चुप की चुनरिया

इस चुंदड़ी नै गळे को घोट्या, जुल्म करे बोलम तै रोक्या

जकड़े राखी मैं, पिया की अटरिया

इस चुंदड़ी नै जुल्म गुजारया, चुंदड़ी मैं दुबक्या हाथ हमारा

खूब पिटाया हमें सारी हे उमरिया

चुंदड़ी पति परमेश्वर बोलै, जिंदा जळी चुंदड़ी के ओल्है

खड़ी-खड़ी हंस रही सारी हे नगरिया

एक दिन चुंदड़ी पड़ैगी बगाणी, मिलकै पड़ैगी तकलीफ मिटाणी

तब अपणी होंगी सारी हे डगरिया

महिला सशक्तिकरण पर घूंघट के विरोध वाले लेख पहले लिंक में तो सरकारी विज्ञापन दूसरे लिंक के अंतिम पृष्ठ पर मौजूद है।

http://www.haryanasamvad.gov.in/store/document/special_stories.pdf

http://haryanasamvad.gov.in/store/document/KRISHI%20SAMVAD%20March%20%202017.pdf

घूंघट में फंसी हरियाणा सरकार हो रही है थू-थू Reviewed by on . वैसे तो वर्तमान दौर में पठन पाठन की संस्कृति में ही गिरावट आई है उसमें भी पत्रिकाओं के पढ़ने वालों की संख्या सीमित है उनमें भी अंग्रेजी और हिंदी पत्रिकाओं के पा वैसे तो वर्तमान दौर में पठन पाठन की संस्कृति में ही गिरावट आई है उसमें भी पत्रिकाओं के पढ़ने वालों की संख्या सीमित है उनमें भी अंग्रेजी और हिंदी पत्रिकाओं के पा Rating: 0

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