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इश्क़ अल्लाह की जात है इश्क़ अल्लाह का नाम

लव इज गॉड गॉड इज लव

February 16, 2017 11:28 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

-संजय पांचाल

 

इश्क अल्लाह की जात है इश्क अल्लाह का नाम

प्रतीकात्मक चित्र

इश्क़ अल्लाह की जात है

इश्क़ अल्लाह का नाम।।

            प्रेम मनुष्य समेत तमाम जीवों का एक नैसर्गिक गुण है। प्रेमके बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। प्रेम सृष्टि की चालक, उत्प्रेरक शक्ति है। हमने ऐसे भी बहुत से उदाहरण देखें हैं जब इंसान या दूसरे पशु भी किसी भी अन्य जीव को मुसीबत में देखकर अपनी जान की बाज़ी तक लगा देते हैं। आपने कुतिया को बिल्ली के बच्चों को दूध पिलाती या ऐसी ही अन्य कई फोटो देखी होंगी या जरूर कहानियां भी सुनी होंगी। कई इंसान जाति-धर्म का भेद भुलाकर दूसरे इंसानों के लिए अपना सब कुछ तक न्यौछावर कर देते हैं। माँ-बाप का बच्चों के प्रति, बच्चों का माँ-बाप के प्रति, पति-पत्नी के बीच, प्रेमी-प्रेमिका के बीच, लोगों का समाज के लिए प्यार के, त्याग और बलिदान के अनगिनत किस्से- कहानियां मौजूद हैं।

भारतीय समाज में भी हम लैला-मजनू, हीर-रांझा, सोनी-महिवाल, लीलो-चमन के प्यार और त्याग के किस्से सुन-सुन कर, फिल्मों में देख कर ही बड़े होते रहे हैं। उन दिनों अगर कहीं पर भी इन फिल्मों का पता चलता तो लोग दूर-दूर से इन फिल्मों को देखने आते थे। आज भी भारतीय फिल्म जगत में लव स्टोरी फिल्मों के हिट होने का एक सफल फार्मूला है। हर भारतीय फिल्म में प्यार को आधार जरूर बनाया जाता है। बेशक कुछ कट्टरपंथियों द्वारा विजातीय या विधार्मिक प्यार को समाज विरोधी, धर्म विरोधी, देश विरोधी साबित कर लव जिहाद के नाम पर समाज को तोड़ने की भरसक कोशिशें की जाती रहीं हैं, लेकिन आज भी जनता द्वारा फिल्मों में और आम समाज में भी इन्हें खुले दिल से ग्रहण किया जाता है। आज समाज में अंतर्जातीय, अंतर्धार्मिक विवाहों का दायरा तमाम खतरों के बावजूद बढ़ रहा है। समाज में लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता मिलने लगी है।

  अगर हम महाकाव्यों में भी देखें तो महाभारत में श्रीकृष्ण का राधा से अमर प्रेम, श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को अपनी बहन सुभद्रा को भगा ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। अर्जुन के बेटे ने उत्तरा से, भीम ने हिडिम्बा से प्रेम विवाह किया। ऐसे ही मध्यकाल में भक्तिकाल में मीरा का कृष्ण के प्रति प्रेम भक्ति की चरम सीमा है। कबीर ने लिखा-

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, इंसान भया कोए।

 ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होए।।

कबीर ने कहा-

ये तो घर है प्रेम को, खाला का घर नाही

प्रेम खेतौं नीपजै, प्रेम हाटि बिकाइ

प्रेम न किसी खेत में पैदा होता है और न ही किसी बाजार में बिकता है।इस प्रकार उन्होंने प्यार के प्रेम के महत्व को स्थापित किया।

नानक जी कहते है-

जिन प्रेम कियो दीन ही प्रभ पायो

संत वैलेंटाइन तीसरी शताब्दी में रोम में एक पादरी थे जिन्होंने क्रूर शासक क्लाडियस के आदेशों के बावजूद नौजवानों की शादियां करवाईं। सम्राट क्लाडियस को लगता था कि अविवाहित पुरुष विवाहित पुरुषों की तुलना में अच्छे सैनिक बन सकते हैं, इसलिए उसने किसी के भी प्रेम और विवाह करने पर पाबंदी लगा दी। लेकिन पादरी वैलेंटाइन ने इस आदेश का विरोध किया और अनेक सैनिकों और अधिकारियों की शादियां कार्रवाई। जिस कारण सम्राट क्लाडियस ने वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर उसे फांसी की सजा दी। इस तरह महान संत वैलेंटाइन प्रेम की बलिवेदी पर शहीद हो गए लेकिन कहते हैं कि मौत से पहले जेल में वैलेंटाइन ने जेलर की अंधी बेटी जैकोबस को अपनी आँखे दान कर दी और उसे एक पत्र लिखा जिस में लिखा था ‘तुम्हारा वैलेंटाइन’। बस तभी से उनकी याद में 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाने लगा।

लेकिन आज कुछ कट्टरपंथी ताकतें समाज में नफरत का राज कायम करने के लिए प्यार करने वालों के खिलाफ नैतिक पुलिस के रूप में उनके पीछे लठ लेकर पड़ी हैं। कहीं भी जोड़ों को पकड़कर उनके साथ दुर्व्यवहार करना, उनकी पिटाई करना, उनसे राखी बंधवाना ये उनकी कुंठित मानसकिता और समाज विरोधी कृत्य है। किसी को भी समाज में पहरे बिठाने और मार पीट व गलत करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। लेकिन आज सत्ता और पुलिस इनको रोककर जेल में डालने की बजाए इनके साथ गलबहियां कर रही है। बलात्कार के आरोपी महान हिन्दू सन्त आसाराम के चेलों द्वारा इसे मातृ-पितृ दिवस के रूप में और भगवा ब्रिगेड द्वारा पहले शहीद भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी व बाद में इसका भंडाफोड़ होने पर फांसी की सजा के दिन के रूप में भी प्रचारित करने की कोशिशें की गई जबकी उन्हें फांसी की सजा 7 अक्टूबर 1930 को सुनाई गई थी। ऐसा नहीं कि वैलेंटाइन डे के खिलाफ हिन्दू कट्टरपंथी ताकतें ही हों, मुस्लिम कट्टरपंथी भी इस होड़ में कुछ कम नहीं है, पाकिस्तान में वैलेंटाइन दिवस पर प्रतिबंध को इसी रूप में देखा जाना चाहिए। 0जहां एक तरफ सामंती, कट्टरपंथी ताकतें प्रेमियों की राह में रोड़े अटका रहे हैं वहीँ बाज़ारवादी ताकतें भी प्रेम, प्यार को  वैलेंटाइन दिवस के रूप में एक दिन में सीमित कर इसे अपने माल बेचने के लिए एक रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। प्यार का मतलब महंगे गिफ्ट, चॉकलेट, गुलाब के फूल, कपड़े और सेक्स के रूप में सत्यापित किया जा रहा है। जहां आज से कुछ साल पहले गुलाब के फूल और महंगे गिफ्ट का बाज़ार चर्म पर था और है, आज उसके साथ-साथ लाठियों का बाज़ार भी गरमाया है; यानि वैलेंटाइन मनाया जाए या विरोध किया जाए दोनों में बाज़ार मुनाफे में है।

  हमें प्यार को एक दिन में सीमित कर उसे महंगे गिफ्ट और सामान में समेटने या कट्टरपंथी सामंती ताकतों द्वारा प्यार के खिलाफ नफरत फैलाने जैसी दोनों ही मुहिमों का पुरजोर विरोध करना होगा। प्यार के बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता, प्यार समाज को एक कर भाईचारा आपसी सौहार्द बढाने का काम करता है। बाइबल भी कहती है- “LOVE IS GOD, GOD IS LOVE”

लेखक परिचय

संजय पांचाल लैंगिक संवेदनशीलता सहित महिलाओं से जुड़े बुनियादी सवालों को लेकर काम करने वाली एक प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) में बतौर सहायक प्रबंधक कार्यरत हैं।

इश्क़ अल्लाह की जात है इश्क़ अल्लाह का नाम Reviewed by on . -संजय पांचाल   [caption id="attachment_1632" align="aligncenter" width="630"] प्रतीकात्मक चित्र[/caption] इश्क़ अल्लाह की जात है इश्क़ अल्लाह का नाम।।           -संजय पांचाल   [caption id="attachment_1632" align="aligncenter" width="630"] प्रतीकात्मक चित्र[/caption] इश्क़ अल्लाह की जात है इश्क़ अल्लाह का नाम।।           Rating: 0

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