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इस्मत चुग़ताईः आजाद औरत का पर्याय

August 15, 2016 10:26 pm by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

इस्मत चुग़ताई। दबे-कुचले वर्गों का दर्द उकेरने वाली कहानीकार। एक कहानीकार जिसने महिलाओं की समस्याओं को लिखा। जो सामाजिक मुद्दों के लिए अपनी कलम की धार बनी। चलते-फिरते गद्य, मानवीय वेदना और निडर होशियारी के बेबाक पहलुओं को पन्नों में समेटती कहानी की एक ऐसी इमारत, जो प्रेमचंद के बाद कृशन चंदर, बेदी और सआदत हसन मंटो के साथ आज भी अपनी पहचान रखती हैं।

ismat chugtai

आज ही के जन्मी थीं इस्मत आपा

15 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में जन्मी ये कलमकार अपने दौर की विवादित लेखिका मानी जाती है। 1941 में महिला-समलैंगिकता पर जब इनकी कहानी ‘लिहाफ’ प्रकाशित हुई, तो इन्हें लाहौर हाईकोर्ट में एक मुकदमें का भी सामना करना पड़ा। इसके लोकप्रिय कहानी संग्रहों में ‘चोटें’, ‘छुईमुई’ और ‘एक बात’ जैसे कई संग्रह शामिल है।

रचना-कर्म  

इनके अलावा ‘टेढ़ी लकीर’, ‘जिद्दी’, ‘एक कतरा-ए-खून’ और ‘दिल की दुनिया’ इनके प्रसिद्ध उपन्यास माने जाते हैं। ‘टेढ़ी लकीर’ के लिए 1974 में इन्हें गालिब अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा इन्होंने कई फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन भी किया जिसमे ‘जुगनू’, ‘छेड़छाड़’ और ‘गर्म हवा’ सहित तेरह फिल्मों के नाम शामिल है।

कई पुरस्कारों से सम्मानित

अपनी रचनाओं के लिए साहित्य अकादमी, इकबाल सम्मान, नेहरु अवार्ड और गालिब अवार्ड जैसे पुरूस्कारों से सम्मानित इस्मत आपा 24 अक्टूबर 1991 के दिन हमसे विदा हो गई। अपनी निर्भिक शैली के लिए पूरा लेखन जगत उन्हे हमेशा-हमेशा के लिए याद करता रहेगा।

एस. एस. पंवार ( लेखक हरियाणा खास के कंटेंट एडिटर हैं )

इस्मत चुग़ताईः आजाद औरत का पर्याय Reviewed by on . इस्मत चुग़ताई। दबे-कुचले वर्गों का दर्द उकेरने वाली कहानीकार। एक कहानीकार जिसने महिलाओं की समस्याओं को लिखा। जो सामाजिक मुद्दों के लिए अपनी कलम की धार बनी। चलते इस्मत चुग़ताई। दबे-कुचले वर्गों का दर्द उकेरने वाली कहानीकार। एक कहानीकार जिसने महिलाओं की समस्याओं को लिखा। जो सामाजिक मुद्दों के लिए अपनी कलम की धार बनी। चलते Rating: 0

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