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19 फरवरी बलिदान दिवस – फिर चिंगारी पर हरियाणा

आरक्षण की चिंगारी को न सुलगने दो सरकार मान जाओ

February 18, 2017 11:28 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

सूरजकुंड के शिल्प मेले में हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर काका ने एक प्रकार से आरक्षण आंदोलन को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक ही कर डाली और लगे हाथों वहां पहुंचे विधायकों की राय भी टटोली। कभी एक गाने की पंक्ति बड़ी मशहूर हुई- बारूद के इक ढेर पे बैठी है, ये दुनिया। यह पंक्ति हथियारों के उपयोग के बढऩे और विश्वयुद्ध की आशंका की ओर इशारा करती है लेकिन हरियाणा के लिए खुद गुप्तचर विभाग ने जाट आरक्षण को लेकर दिए जा रहे धरनों के बारे में दी है, जो कि मुख्यमंत्री काका तक पहुंचने से पहले ही लीक हो गई, उसे देखते इतना ही कह सकते हैं कि आरक्षण की इक चिंगारी पर टिकी है हरियाणा की जनता, इस चिंगारी को सुलगने न दो सरकार। देर न हो जाए कहीं देर न हो जाए, बाद में पछताए तो क्या? लीक हुई रिपोर्ट में धरनों में भीड़ बढऩे और युवाओं के हथियार लेकर आने तक की बातें कही गई है। इस रिपोर्ट से हड़कंप मचा हुआ है। खासतौर पर 19 फरवरी को सभी धरनास्थलों पर बलिदान दिवस मनाए जाने को लेकर। यशपाल मलिक ने आंदोलन को उत्तर प्रदेश चुनाव से भी जोड़ दिया, यह घोषणा करके कि भाजपा प्रत्याशियों को हराओ। इससे लगता है कि केंद्र सरकार भी खट्टर काका पर इस आंदोलन को जल्द समाप्त करवाने का दबाव बनाए हुए है। यदि 19 फरवरी तक आंदोलन खिंच गया तो उत्तर प्रदेश के चुनाव पर इसका साया मंडराता रहेगा।

खट्टर काका को जो सुझाव सूरजकुंड मेले में मिले हैं, उनमें कानून के दायरे में ही जाट आरक्षण आंदोलनकारियों की बातें मानी जाएं। खासतौर पर जिनमें जिनके खिलाफ पिछले वर्ष के आंदोलन के दौरान धारा 302 व धारा 307 के केस बनाए गए हैं, उन्हें कैसे खारिज किया जा सकता है? दूसरे यह कि पीडि़तों के आश्रितों को नौकरी मैरिट के आधार पर दी जाए न कि उन्हें अनुकंपा के आधार पर, नहीं तो इससे गलत संदेश जाएगा। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने रोहतक में अपनी कोठी जलाए जाने और परिजनों को आंदोलनकारियों द्वारा गहरी परेशानी में फंसाने का हवाला दिया। अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रो. गणेशी लाल ने कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी पर भी ऐसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर अब किसी प्रकार की बयानबाजी करने पर अंकुश लगा दिया है। चेतावनी भी दी है कि यदि किसी प्रकार का बयान दिया तो अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। इस तरह खट्टर सरकार आंदोलन का हल निकालने के लिए एकमत नहीं है, जिस कारण आंदोलन खिंचते जाने के आसार बढ़ते जा रहे हैं, जो कि हरियाणा के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। सरकार को समय रहते इसका सर्वसम्मति से हल निकालना चाहिए। आज चौपालों पर ही नहीं, शहरों में भी इस आंदोलन को लेकर न केवल चर्चाएं गर्म हैं बल्कि कहीं किसी कोने में डर भी समाया हुआ है कि आंदोलन कहीं हिंसक रूप न ले ले।

इस आंदोलन को विपक्षी दलों का सहयोग भी मिलने लगा है। अभय चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बड़े भाई इंद्र सिंह हुड्डा भी धरनास्थल पर आंदोलनकारियों से मिले हैं। आरक्षण संघर्ष समिति के मलिक गुट ने दूसरे सांगवान गुट का बहिष्कार करने और ‘सरकारी’  कहे की घोषणा भी कर डाली। हवा सिंह सांगवान ने जवाब दिया कि बहिष्कार से कुछ लेना-देना नहीं। यह बात भी सामने आई है कि पिछले वर्ष हुए हिंसक आंदोलन के चलते संपत्ति के नुकसान पर 416 क्लेम पहुंचे हैं, जिन पर 22 मार्च को सुनवाई होगी। इस तरह अभी तक पिछले वर्ष हुए संपत्ति के नुकसान की भरपाई का फैसला नहीं किया जा सका। क्लेम नहीं दिया गया।

मुख्यमंत्री खट्टर काका कह रहे हैं कि बातचीत से ही इस समस्या का हल निकल आया तो अच्छा, फिर पानीपत के बाद सूरजकुंड में मंत्रिमंडल बैठक में कमी कहां रह गई? इसे जल्द दूर कर, आरक्षण की चिंगारी को सुलगने न दो सरकार।

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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