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भाईचारे की गाड़ी पटरी पर ही चलने दो सरकार…

February 22, 2017 4:31 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

पंजाबी का एक सूफियाना गाना है.. नित खैर मंगां सोहणिया बे तेरी,दुआ न कोई होर मंगदी…हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन को चलते तीन सप्ताह बीत गए और रोज गाने के यही बोल मन में गूंजते रहते हैं कि हरियाणा में सब तरफ खैर ही खैर हो, इससे ज्यादा और दुआ क्या मांगेंगे इन दिनों। हरियाणा की 36 बिरादरी एक साथ रह कर फलती-फूलती रहे और हंसी-खुशी, मिलजुल कर हर पर्व मनाएं। जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने अब चंडीगढ़ या दिल्ली में सरकार से बातचीत न करने का ऐलान कर रखा है। इसलिए पानीपत धरने पर बातचीत हुई है। सबसे बड़ी राहत खट्टर काका को यह मिली कि बलिदान दिवस शांति से गुजर गया और आंदोलनकारियों ने संयम बनाए रखते हुए रेलवे ट्रैक को खाली छोड़ रखा है, जिससे कि रेलगाडियों के आवागमन में कोई बाधा न आए। इसी प्रकार सड़क यातायात भी खुला है। बेशक सरकार ने खुद ही बलिदान दिवस पर हरियाणा रोडवेज की बसों का पहिया जाम करने का फैसला किया। पिछले वर्ष हुई हिंसक व आगजनी की घटनाओं से सबसे गहरा गाव 36 बिरादरी के भाईचारे पर ही लगा था, जिसे भरने की कोशिशें चल रही हैं, फिर भी आरक्षण आंदोलन से लोग अंदर ही अंदर सहमे हुए हैं और एक-दूसरे से पूछते रहते हैं कि आगे क्या होगा? कितने अच्छे दिन आएंगे?

सूरजकुंड मेले में भी खट्टर काका की मंत्रियों व विधायकों से हुई बातचीत कोई सुखद नतीजे तक नहीं पहुंची। पीडि़तों के आश्रितों को नौकरी, मकान या दुकान को हुए नुकसान के क्लेम और आरक्षण का मुद्दा जस का तस है। अंगद के पैर की तरह टस से मस नहीं हो रहा। ऐसे में बलिदान दिवस के अवसर पर दिल्ली में संसद का घेराव करने से लेकर असहयोग आंदोलन चलाने तक की चेतावनी दी गई है और 26 फरवरी को काली पट्टियां व काले कपड़े पहन कर धरनास्थलों पर प्रदर्शन करने की बात भी सामने आ रही है। अभी तक नेशनल हाइवे, रेलवे ट्रैक व नहरों के किनारे सुरक्षाकर्मी पूरी तरह चाक-चौबंद हैं। सरकार ने पिछले वर्ष 83 घायलों को मुआवजा राशि वितरित की है लेकिन नाराजगी बरकरार है क्योंकि मुआवजा राशि आधी दिए जाने की बात कही जा रही है। बलिदान दिवस पर आधा दर्जन जिलों में इंटरनेट सेवाएं ठप रहीं। पहली मार्च से असहयोग आंदोलन की शुरूआत होगी, यदि सरकार व आंदोलनकारियों के नेताओं के बीच बातचीत में सहमति न बनी। एक दिन के लिए दूध सब्जी की सप्लाई भी बंद होगी।

खट्टर काका व उनके मंत्री चिंतित हैं कि इनेलो व कांग्रेस आंदोलनकारियों का समर्थन कर रही हैं। आते-जाते नेता भी आंदोलन की अनदेखी नहीं करते, इनमें पहुंच ही जाते हैं। वैसे भाजपा नेताओं ने भी धरनास्थलों की ओर रुख किया है और आंदोलनकारियों के मन की बात जानने का प्रयास किया है। एक बात इस धरने में सबसे अच्छी निकलकर आई है कि ब्याह-शादियों में डीजे बजाना, शराब पीना और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों का त्याग करने का संदेश दिया जा रहा है। डीजे बजाने के साथ-साथ शस्त्र चलाने पर भी रोक लगाने पर भी विचार होना चाहिए। देखिए न, साध्वी देवा अब भी यह कह रही है कि आत्मरक्षा के लिए हथियार तो रखने ही पड़ते हैं। हथियार आत्मरक्षा के लिए ही रखतीं, न कि शक्ति प्रदर्शन के लिए। खैर, सबसे बड़ी बात यह होगी कि खट्टर काका के प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारी नेताओं में बातचीत से कोई सुखद रास्ता निकल आए, जिससे कि हरियाणा के भाईचारे की गाड़ी पटरी पर ही चलती रहे।

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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