Monday , 20 November 2017

Home » खबर खास » रैली के गर्वीले चांद में दाग

रैली के गर्वीले चांद में दाग

September 12, 2016 3:28 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

jind-shah

‘रैलियों की भीड़ ही पैमाना होती तो शायद कभी ना जाती हुड्डा या चौटाला की सरकार।’ बात चाहे सही हो भी या नहीं, मगर किसी भीड़ का भीड़ की तरह नजर आना जरूरी होता है। पिछले दिनों रैली का न्यौता देने सोनीपत आए केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा था कि हरियाणा गौरव रैली विशुद्ध रूप से सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई है। चौधरी साहब बेबाक अंदाज में ये भी बोल गए थे कि रैली में हाजिरी भले कितनी ही हो लेकिन वे इस जनसभा के माध्यम से मिलजुल कर रहने की परंपरा को कायम करेंगे और किसी भी किम्मत पर हरियाणा की शांति को भंग नहीं होने दिया जाएगा। पांच सितंबर काे बोली गई ये पंक्तियां पुराने भाईचारे की भी याद दिलाती है और प्रदेश में आज की शांति व्यवस्था का भी प्रतिनिधित्व करती है।

हरियाणा में मौजूदा सरकार को लेकर जो हाय-थू हो रही है वो किसी से छुपी नहीं है। शायद कोई ऐसा बुद्धिजीवी नहीं होगा जिन्हें कालिख से पुते जाट दंगे याद न हो। उसमें मरने वाले लोग याद न हो, उसके उपरांत भी सरकार का एक्शन याद न हों। वहीं इसके बाद प्रकाश कमेटी को लेकर जो झमेला चला हो; उससे भी लोग भली-भांति परिचित हैं। हरियाणा में हर रोज होने वाले धरने, प्रदर्शन, हड़तालें शायद किसी से छुपी नहीं होगी।  हाल ही में घटित डिंगरहेड़ी कांड को ही ले लिया जाए। क्या गर्व की बात कहने वाले सरकार के नुमांईदे ये बात भूल जाते हैं कि उनके प्रदेश में आराम से सोते घरों पर हत्याओं के डाके डलते हैं, बलात्कार होते हैं, और तो और कांड के उपरांत पुलिसीया कार्रवाई में लेटलतीफी होती है सियासत होती है। वहीं आरोप के रूप में भी इसी सरकार के आरएसएस से जुड़े लोगों पर आरोप तय होते हैं।

खैर, अलग विषय हैं मगर इसी सरकार से जुड़ा और रैली के ठीक पूर्व तक जो पूरा घमासान इसी सरकार को लेकर मीडिया में होता है, तो बात अक्सर निकल पड़ती है। रैली के फ्लोप होने की खबरें जो तस्वीरों के साथ सोशल मीडिया पर आ रही थी वो भले ही फैक हो सकती है, तस्वीरें रैली शुरू होने से पूर्व भी ली जा सकती है और बाद में भी। वरिष्ठ पत्रकार दीपकमल सहारण ने भी सोशल मीडिया के जरिए रैली को लेकर प्रतिक्रिया दी है। बांगर में बीजेपी की इस रैली को लेकर दीपकमल लिखते हैं कि “रैलियों की भीड़ ही पैमाना होती तो कभी ना जाती हुड्डा या चौटाला की सरकार”। यहां पर इनकी बात से पूरी तरह से सहमत हुआ जा सकता है क्योंकि बीजेपी की रैली में जुड़ी भीड़ को चौटाला-हुड्डा की रैलियों के मुकाबले आधा भी नहीं माना जा रहा। उनके मुताबिक बीजेपी और बीरेंद्र सिंह इस पर इतरा सकते हैं कि जींद में उन्होंने अमित शाह के लिए ठीक-ठाक आकार का मैदान भर दिया लेकिन इस पैमाने पर पार्टी खुद को तुलना में ना ही डाले तो बेहतर है। वहीं उनका आंकलन ये भी बताता है कि रैली में बीरेंद्र समर्थकों को छोड़कर बाकि लोगों का ज्यादा जोश भी नहीं देखा गया।

रैली में आए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, चौधरी बीरेंद्र सिंह, राव इंद्रजीत आदी नेताओं ने सरकार की तारीफों के पूल भी बांधे, हरियाणा को वीरों की धरती बताया गया। सदा की तरह विकास के वादे भी हुए। मोदी और खट्टर सरकार की तारीफें भी हुई लेकिन रैली के गौरव में दाग वहां आकर लग गया जहां जेबीटी टीचरों द्वारा अध्यक्ष जी को काले झंडे दिखाए गए। आपको बता दें कि हरियाणा में 9455 जेबीटी अध्यापकों की रिजल्ट घोषित होने के दो साल बाद भी जॉइनिंग नहीं हुई। जिसे लेकर उनका धरना प्रदर्शन लगातार जारी रहता है। इस और अच्छे से समझने के लिए वरिष्ठ पत्रकार दीपकमल सहारण की एक पोस्ट पर नजर डालते हैं…

“जिन लोगों ने 2010 या 2011 में जेबीटी की पढ़ाई की, 2011 में पात्रता परीक्षा पास की और फिर 2012 में नौकरी लगने के लिए इंटरव्यू दिया, वे 2016 में भी इसी उलझन में हों कि सरकारी नौकरी कर पाएंगे या नहीं तो ऐसे में वे क्या करें ?

14 अगस्त 2014 को दो साल पहले फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ और 9455 युवाओं को बता दिया गया कि आप अब हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे। इसके बाद शुरू हुआ दस्तावेजों की जांच और अदालतों के चक्कर का दौर। यानी 5 साल होने को आए, भर्ती पूरी नहीं हुई। सरकारी काम के ढीले रवैये का इससे बड़ा नमूना क्या होगा?

जींद आए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को काले झंडे दिखाकर अपना दुख बताते ये युवा वाकई हताश और मजबूर हैं। उम्र के इस दौर में जब उन्हें करियर और परिवार की दिशा तय करनी है, तब ऐसी दुविधा, आशंका बहुत मानसिक तनाव व निराश करने वाली होती होगी। कितनों को तो मैं जानता हूं जिनकी योजनाओं और परिवार को उथलपुथल कर दिया इस भर्ती ने। और 5 साल से पढ़ाई छोड़े ये युवा अब कितनी ताजगी के साथ पढ़ा पाएंगे। सब कचरा कर दिया सरकार की लापरवाही ने।

दस्तावेजों की जांच ऐसा क्या पहाड़ तोड़ने वाला काम हो गया कि निपटाए नहीं निपट रहा। कोर्ट की कार्यवाही को तेज करवाने की इच्छाशक्ति नहीं दिख रही सरकार की तरफ से।“

इस भावुक करती पोस्ट से निश्चय ही उनकी पीड़ा और मेहनत को आत्मसात किया जा सकता है। रैली में काले झंडे दिखाने की वजह यही थी। अहम सवाल ये है कि अपने ही मुख से हरियाणा को गौरवशाली बताने वाली सरकारें क्या ये भूल जाती है उनके गौरवशाली प्रदेश में कितने लोग बेरोजगार हैं, दिन रात पसीना बहाकर फसलें उपजाने वाले किसान को वक्त से खाद, पानी या दवाई मिलती भी है या नहीं? न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस प्रशासन यहां किस तरह काम करती है आदी आदी। भले ही कुर्सियां सजाकर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने अध्यक्ष जी का मन खुश जरूर कर दिया हो मगर लोगों की दिली इच्छाओं के बगैर, सरकार के लचर रवैये से परेशान जनता की विमुखता के पैमाने पर तो इस गौरव रैली को फ्लॉप ही कहा जाएगा। वहीं आपको बता दें कि हाल ही में ऐसा दूसरी बार हुआ है कि राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को काले झंडे देखने पड़े हों। हाल ही में गुजरात में भी उन्हें ऐसा  विरोध देखना पड़ा था।

रैली के गर्वीले चांद में दाग Reviewed by on . 'रैलियों की भीड़ ही पैमाना होती तो शायद कभी ना जाती हुड्डा या चौटाला की सरकार।' बात चाहे सही हो भी या नहीं, मगर किसी भीड़ का भीड़ की तरह नजर आना जरूरी होता है। 'रैलियों की भीड़ ही पैमाना होती तो शायद कभी ना जाती हुड्डा या चौटाला की सरकार।' बात चाहे सही हो भी या नहीं, मगर किसी भीड़ का भीड़ की तरह नजर आना जरूरी होता है। Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top