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धरोहर की शोभा बढ़ाएगा गुहणा का दरवाजा

September 12, 2016 1:51 pm by: Category: धरोहर खास Leave a comment A+ / A-

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कहते हैं कुछ अलग करने की ललक अगर दिल में सवार हो जाए तो वो रातों को नींद नहीं आने देती। बात चाहे अभिनय की हो, साहित्य लेखन की हो, मिट्टी की मूर्तियां बनाने की  हो या फिर लकड़ी से बनाई जाने वाली किसी अन्य चीज की हो। दरअसल हरियाणा के कैथल जिले के गुहणा गांव में एक अनौखा लकड़ी का दरवाजा तैयार किया हुआ है जो देखने लायक है, लेकिन अब ये दरवाजा कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में धरोहर की शोभा बढाएगा।

क्या है धरोहर

धरोहर हरियाणा के कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र में बना एक संग्रहालय है जहां पौराणिक व पारंपरिक चीजों को रखा जाता है। आपको बता दें कि संग्रहालय निदेशक महासिंह पुनिया का इसके लिए खास योगदान रहा है। पुनिया अलग-अलग जगहों से पारंपरिक कारीगरी, बुनाई, कढाई एवं और भी कई सामान धरोहर के लिए उपलब्ध करवा चुके हैं।

किसने बनवाया था दरवाजा 

बता दें कि इस दरवाजे को बनाने की शुरूआत स्व. चौ. जातीराम जी चहल पुत्र स्व. नौरंग राम चहल पुत्र लालचंद चहल, श्योचंद चहल जीतराम चहल, आभेराम चहल, चंदगी राम चहल ने सन 1951 ( संवत 1921 ) में की। मिस्त्री मुलाराम गांव सीशमर व उनका एक साथी दोनो ने मिलकर ये दरवाजा गेट लगभग 14 महीनो में बनाकर तैयार किया। उनकी मजदूरी देशी घी की रोटी व 5 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से थी।

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इस दरवाजे की विशेषता यह है कि इस पर श्रीराम, सीता एवं लक्ष्मी और श्री कृष्ण की प्रतिमा अंकित की गई है। बता दें कि दरवाजे के लिए शीशम की लकड़ी का प्रयोग हुआ है और एक क्विंटल के करीब वजन की कीलें इस्तेमाल की गई है। वहीं इसकी विशेषता ये है कि इन दरवाजों में लकड़ी की छोटी छोटी गिट्टी बनाकर विशेष डिजाइनिंग दी गई है।

क्या खासियत है दरवाजे में

वहीं दोनों दरवाजों पर चार तोते बनाए गए हैं तो एक गेट में विशेष प्रकार की खिड़की लगाई गई है। बताया जा रहा है कि इस दरवाजे को बनाने वाले मिस्त्री कभी आधे दिन की मजदूरी नहीं लेता था, वहीं गेट की देखरेख कर रहे परिवार के लोगों का कहना है कि जब ये गेट बना था तो छह महीने तक इसे परदे में रखा गय़ा था, गांव में जब भी बारात आती या कोई रिश्तेदार आता तो इसे देखने जरूर आता था। आपको बता दें कि अब ये दरवाजा कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में देखने को मिलेगा, क्योंकि गुहणा के लोगों ने इसे विश्वविद्यालय की धरोहर हेतु दान कर दिया है।

धरोहर की शोभा बढ़ाएगा गुहणा का दरवाजा Reviewed by on . कहते हैं कुछ अलग करने की ललक अगर दिल में सवार हो जाए तो वो रातों को नींद नहीं आने देती। बात चाहे अभिनय की हो, साहित्य लेखन की हो, मिट्टी की मूर्तियां बनाने की  कहते हैं कुछ अलग करने की ललक अगर दिल में सवार हो जाए तो वो रातों को नींद नहीं आने देती। बात चाहे अभिनय की हो, साहित्य लेखन की हो, मिट्टी की मूर्तियां बनाने की  Rating: 0

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