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कालेधन के महायज्ञ से कितना पुण्य…?

December 15, 2016 9:54 am by: Category: खबर खास 1 Comment A+ / A-

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महात्मा गांधी  ने एक महत्वपूर्ण बात कही है कि साध्य ही नहीं, साधन भी पवित्र होना चाहिए यानी मंजिल ही नहीं, मंजिल तक पहुंचाने का मार्ग भी पवित्र होना चाहिए। पर हमारे हरियाणा के भिवानी में चार दिसंबर से शुरू हुए लक्षचंडी महायज्ञ के समापन पर पंडितों को जो दक्षिणा दी गई, उसे लेकर हंगामा हो गया। महायज्ञ संपन्न करवाने के लिए मथुरा, वृंदावन व उज्जैन के लगभग दो हजार पंडितों को बुलाया गया था। महायज्ञ के संपन्न होते ही पंडितों को दक्षिणा के रूप में जो रुपए दिए गए, उसे देखकर पंडितों ने हंगामा कर दिया क्योंकि दक्षिणा में चलन से बाहर कर दिए गए एक-एक हजार के तीन व पांच-पांच सौ का एक-एक नोट थमा दिया गया। इस तरह कुल 70 लाख रुपए बांट दिए गए, जिस पर पंडितों ने विरोध शुरू कर दिया। छोटी काशी के रूप में प्रसिद्ध भिवानी में लक्षचंडी महायज्ञ के आयोजकों पर पंडितों ने दुहाई भी दी कि उनके पास न किराए के पैसे हैं और न ही खाने-पीने के। इसके बावजूद आयोजकों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

चलिए, अब आप यह जान लीजिए कि इस महायज्ञ की प्रथम आहुति किसने दी थी। वे थे हरियाणा के राज्यपाल महामहिम कप्तान सिंह सोलंकी। वे कहां जानते थे कि जिस महायज्ञ में वे प्रथम आहुति अर्पण कर रहे हैं, उसकी पूर्णाहुति पर पंडितों को पुराने नोट दिए जाएंगे। अब लगे हाथों यह भी जान लें कि महायज्ञ के सरंक्षक थे हरियाणा पशुधन आयोग के चेयरमैन और भाजपा नेता ऋषि प्रकाश शर्मा। मजेदार बात यह है कि राज्यपाल के बाद महायज्ञ में आहुति डालने वालों में हरियाणा के शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा, कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़, राज्यमंत्री नायब सैनी, मुख्य संसदीय सचिव कमल गुप्ता और सांसद धर्मवीर सिंह भी प्रमुख तौर पर शामिल हुए। इन सबको भी कहां मालूम था कि यज्ञ संपन्न होने पर पंडितों को कालेधन से दक्षिणा दी जाएगी। अब आप ही सोचें कि कालेधन से दी गई दक्षिणा के बाद संपन्न महायज्ञ से कितना पुण्य मिलेगा? अब कहा जा रहा है कि दक्षिणा यजमानों ने दी है, आयोजन समति का इससे कोई सरोकार नहीं। आयोजक महोदय का यह भी कहना है कि कुछ लोगों को अच्छा काम हजम ही नहीं होता। जब दक्षिणा यजमानों ने दी तो कालाधन कहां से?

वाह! कितने भोले और मासूम बन रहे हैं आयोजक महोदय? अगर महायज्ञ को संपन्न करवाने वाले पंडित ही प्रसन्न होकर नहीं गए तो महायज्ञ का पुण्य कहां से मिलेगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कालाधन को खत्म करने के महायज्ञ में उसी कालेधन से पंडितों को दक्षिणा? यही तो हजम न होने वाली बात है। क्या राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी इस मामले के सामने आ जाने पर कोई कार्यवाही करने का आदेश राज्य सरकार को देंगे? अरे, आजकल तो मंदिरों के बाहर भी नोटिस लगा रखे हैं कि कृप्या दानपेटी में पुराने नोट न डालें और कई मंदिरों ने दानपात्र हटा ही दिए हैं क्योंकि दिल है कि मानता नहीं। लोग न-न करते भी पुराने, चलन से बाहर नोट भगवान के चरणों में अर्पित कर ही जाते हैं। जिन मंत्रियों ने आहुति डाली, क्या वे आयोजक से पूछेंगे कि छोटी काशी में कालेधन से महायज्ञ क्यों करवाया? महात्मा गांधी की बात याद दिला रहा हूं कि जब साधन ही पवित्र नहीं, तो साध्य कहां से मिलेगा? पुराने नोटों से नाराज पंडित यजमानों को आशीर्वाद कैसे देंगे? अगर यजमानों का मन रखने के लिए, ऊपर से आशीर्वाद दे ही दिया हो तो मन ही मन पता नहीं क्या बद्दुआ दी हो? ऐसे महायज्ञ को सचमुच कल्याण का कार्य मान सकते हैं?

कबीर का यह दोहा बड़ा याद आ रहा है:

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,

कर का मन का डारि दे, मन का मनका फेर।

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लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

कालेधन के महायज्ञ से कितना पुण्य…? Reviewed by on . महात्मा गांधी  ने एक महत्वपूर्ण बात कही है कि साध्य ही नहीं, साधन भी पवित्र होना चाहिए यानी मंजिल ही नहीं, मंजिल तक पहुंचाने का मार्ग भी पवित्र होना चाहिए। पर ह महात्मा गांधी  ने एक महत्वपूर्ण बात कही है कि साध्य ही नहीं, साधन भी पवित्र होना चाहिए यानी मंजिल ही नहीं, मंजिल तक पहुंचाने का मार्ग भी पवित्र होना चाहिए। पर ह Rating: 0

Comments (1)

  • kamlesh bhartiya

    haryanakhas ki prastuti behtar hoti ja rahi hai. isne apna sthan bana liya hai. badhai.

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