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परिवारवाद – प्रतिभा ही काम आती है, वंशवाद नहीं खुल कर बोले कंगना

July 25, 2017 11:21 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

काफी विद करण जौहर कार्यक्रम में करण जौहर के सामने कंगना रानौत ने मुम्बई की मायानगरी में भाई-भतीजावाद की बात स्वीकार क्या की कि बवंडर हो गया। कंगना रानौत को मायानगरी के भाई-भतीजों ने घेरना शुरू कर दिया। पर कंगना अपनी बात पर अडिग रही। अब आईफा अवार्ड समारोह में एक बार फिर करण जौहर, सैफ अली खान और वरूण धवन ने न्यूयार्क में भाई-भतीजावाद जिंदाबाद के नारे लगाकर कंगना रानौत को एक प्रकार से चिढ़ाया। करण जौहर ने तो यहां तक कहा कि कंगना कुछ न बोले तो अच्छा है, वह बहुत बोलती हैं। कंगना भाई भतीजावाद पर खुल कर बोलें। न रूको न चुप रहो। हालांकि करण जौहर और वरूण धवन ने सोशल मीडिया में चर्चा के आने के बाद माफी मांग ली जबकि सैफ अली खान माफी मांगने के बावजूद इस कला को अनुवंशिकी से जोडऩे से बाज नहीं आए। इस पर कंगना रानौत ने भी ट्वीट किया कि अगर सैफ के कहे अनुसार जीन से सब कुछ तय हो जाता है तो आज अभिनेत्री नहीं बल्कि किसान होती। कॉफी के प्याले से शुरू हुई बहस न्यूयार्क तक अपनी गर्माहट ले गई। कंगना ने गलत क्या कहा? क्या राजनीति की तरह मायानगरी में परिवारवाद को फलने-फूलने का पूरा अवसर नहीं दिया जाता? सबसे पहले कपूर परिवार को लीजिए। पापा के नाम से मशहूर पृथ्वीराज कपूर के तीनों बेटे राजकपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर फिल्मों में आए और छा गए। राज कपूर को फिल्म इंडस्ट्री का पहला शो मैन कहा गया। शम्मी कपूर याहू स्टाइल के लिए जाने गए और शशिकपूर अपने खिलंदड़े अंदाज से जाने गए। राज कपूर ने अपने तीनों बेटों को जमाने की कोशिश की लेकिन ऋषि कपूर ही दर्शकों को लुभा पाए।

रणधीर कपूर कुछ चले लेकिन राजीव कपूर तो राम तेरी गंगा मैली, से आगे नहीं बढ़ सके। राजेंद्र कुमार को जुबली कुमार कहा जाता था लेकिन पुत्र कुमार गौरव की पहली फिल्म लव स्टोरी ही चल पाई जबकि दूसरी फिल्म फूल में माधुरी दीक्षित जैसी सफल अभिनेत्री भी कुमार गौरव को कोई सहारा नहीं दे पाई। फिरोज खान ने अपने बेटे फरदीन को आगे बढ़ाया लेकिन ड्रग्स और खराब अभिनय से वे जल्दी ही बैकग्राऊंड में चले गए।  अफसोस इस बात का है कि धर्मेंद्र भी भाई भतीजावाद के शिकार हो गए हैं जोकि फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए मनोज कुमार के साथ फुटपाथ पर सोते रहे। उन्होंने खुशी जाहिर की है कि कपूर परिवार की तरह उनके परिवार ने भी जगह बना ली है। सन्नी द्योल, बॉबी द्योल, अभय द्योल के बाद अब सन्नी द्योल का बेटा फिल्मों में कदम रखने जा रहा है। सैफ अली खान को पता होना चाहिए कि यदि जीन की बात होती तो उनकी बहन सोहा अली इतनी जल्दी शादी करवाकर घर न बैठ जाती। यदि जीन की ही बात होती तो माला सिन्हा जैसी अभिनेत्री की बेटी प्रतिमा सिन्हा सिर्फ राजा हिंदुस्तानी में सिर्फ एक आइटम डांस के बाद ही फिल्मों से गायब न हो जाती। हेमा मालिनी की बेटियां भी फिल्मी दुनिया में अपनी जगह न बना सकीं। हेमा मालिनी  ड्रीम गर्ल बन कर भी अपनी बेटियों को जमा नहीं पाई। तनूजा की बेटी काजोल ने धूम मचाई लेकिन तनीषा नहीं चली। शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी नहीं चली। राजेश खन्ना ने स्टारडम के दिनों में डिम्पल की बहन सिम्पल के साथ अनुरोध फिल्म की लेकिन सिम्पल हीरोइन नहीं बन पाई। जाहिर सी बात है कि आखिरकार कलाकार की प्रतिभा ही काम आती है, जीन नहीं। इसलिए कंगना रानौत नाहन से आकर भी सफल है। खुल कर बोले कंगना।

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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