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चौहान वंश की महिलाएं यहां नहीं मनाती करवा चौथ

October 18, 2016 12:09 am by: Category: खबर खास, तीज तयोहार Leave a comment A+ / A-

karwachauth

एक ओर जहाँ देश भर में महिलाएँ पतियों की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का उपवास रख रही हैं, अपने सुहाग के नाम की मेंहदी रचाकर सजने-सँवरने में लगी हैं। यमराज से पति के प्राण छीन लेने वाली कथाएँ सुन रहीं हैं। वहीं दूसरी और हरियाणा के करनाल जिले के तीन गाँव ऐसे हैं जहाँ करवाचौथ का त्यौहार मनाए सदियाँ बीत गई।

जिले के कतला हेडी, औंगद व गोंदर के क्षत्रिय समाज के चौहान गोत्र में पिछली कई पीढ़ियाँ बीत जाने के बाद भी पुरानी मान्यता के चलते करवाचौथ का त्यौहार नहीं मनाया जाता। बुजुर्ग बताते हैं कि करीब 700 साल पहले की बात है। हमारे पूर्वज महाराज बिरजू का विवाह कैथल के राहड़ा गाँव में हुआ था। उनकी पत्नी एक बार मायके गई हुई थी, जहाँ उन्हें सपना आया कि उनके पति की हत्या कर शव को जंगल में छुपा दिया गया है। उन्होंने तुरंत सपने के बारे में परिजनों को बताया और अपनी ससुराल औंगद जाने की कही। परिवार भी उनके साथ चल दिया। जब चलते-चलते वो जंगल में अपने पति के शव के पास पहुँच गई तो पूरा परिवार इसे देखकर दंग रह गया।

दुर्भाग्य से वह दिन करवा चौथ का ही दिन था। चूँकि उस दौर में स्त्रियाँ पति की मृत्यु के बाद उनकी चिता के साथ ही सती हो जाती थी इसलिए वे भी वहीं पर सती हो गई, लेकिन सती होने से पहले महिलाओं को करवाचौथ का व्रत न रखने की हिदायत दी। तब से लेकर आज तक इन गाँवों में चौहान वंश की महिलाएँ करवाचौथ का व्रत नहीं रखतीं। हालाँकि इच्छाएँ होती हैं कि वे भी इस दिन को बाकी लोगों की तरह उत्सव के रुप में मनाएँ लेकिन सदियों से चली आ रही परंपरा और अंधविश्वास से जुड़े भय खुशियों के आड़े आ जाते हैं।

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