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वॉलीवाल के मक्का कौल की सूरत बदहाल

November 8, 2016 3:23 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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जी हां वॉलीवाल का मक्का कहा जाने वाले गांव कौल की सूरत आजकल बदहाल है। यहां चौपालें जर्जर हैं तो गलियों में गंदगी फैली है। मच्छर डेंगू व चिकनगुनियों के डंक मार रहे हैं तो उत्पाती बंदरों ने भी जीना मुहाल कर रखा है।

वॉलीवाल में दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाले और लगातार 15 सालों तक भारतीय वॉलीवाल टीम के कप्तान रहे बलवंत सिंह बल्लू का यह गांव भले ही आज भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा कर बल्लू की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है लेकिन पंचायत और प्रशासन की लापरवाही से लोगों को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। अगर पूरे गांव की तस्वीर देखें तो गांव किसी छोटे कस्बे से कम नहीं लगेगा लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद स्वच्छता अभियान की झाड़ू यहां तक नहीं पंहुची।

जर्जर चौपालें

चौपाल गांव की वह सार्वजनिक जगह होती है जहां पर ग्राम सभाओं, पंचायतों के आयोजन हो सकते हैं, बारातों के ठहरने की व्यवस्था हो सकती है, गांव के बुजूर्ग खाली समय में यहां इकट्ठे ठहाके लगा सकते हैं। कुल मिलाकर यह गांव का सामुदायिक केंद्र होती हैं। लेकिन आजकल सामाजिक भाइचारे की तरह ये चौपालें भी जर्जर होती जा रही हैं। पूंडरी के गांव कौल में स्थित कई चौपालों के फर्श टूटे हुए मिले और कई चौपालों की छत में दरार हो जाने से ये इमारतें खस्ताहाल हो गई हैं। टुण्डा पट्टी की चौपाल की हालत तो काफी जर्जर हो चुकी है। चौपालें आजकल दुर्दशा का शिकार हैं। जिन्हें मरमत्त की जल्द आवश्यकता है लेकिन मरम्मत की घोषणा के बाद भी इनमें एक इंट तक नहीं लगी। ग्रांट कब आई कब गई मिली या नहीं मिली किसी को कुछ पता नहीं।

सफाई व्यवस्था भी चरमराई

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त गांव को होना तो चाहिये साफ सुथरा लेकिन गंदगी का आलम इतना है कि लोग मच्छरों को आतंकवादियों की दृष्टि से देखते हैं और प्रशासन से चाहते हैं कि फोगिंग करवाकर मच्छरों पर भी सर्जिकल स्ट्राइक करवाई जाये। ऐसा नहीं है कि सफाई व्यवस्था की बदहाली का रोना पहली बार रोया जा रहा है लेकिन अभी दुर्गंध जिला स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका व जिला प्रशासन तक नहीं पंहुची है इसलिये कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

बंदरों का आतंक

उत्पाती बंदरों का आतंक भी कौल में काफी बढ़ चुका है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर अब उनके घरों से सामान उठाकर ले जाते हैं। जो लोग बंदरों को भगाने लगते हैं तो बंदर हमलावर बन जाते हैं। लोग इस समय बंदरों से आतंकित हैं। कई महिलाएं व बच्चे बंदरों के काटने का शिकार भी हो चुके हैं। जिला प्रशासन से ग्रामीणों ने बंदरों से निजात दिलवाने की मांग भी की है।

पूंडरी से कृष्ण प्रजापति की रिपोर्ट

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