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मलयालम पत्रिका के बहाने

March 4, 2018 1:48 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

जब कोई स्त्री बच्चे को स्तनपान कर रही होती है तो उसमें सिर्फ़ माँ दिखती है, और उस माँ को सिर्फ़ अपने बच्चे की भूख। हालांकि दूध पिलाती स्त्री के लिए सिर्फ़ श्रद्धा भाव ही मन में आता है, फिर भी घर के बाहर महिलाओं को दूध पिलाने से टोका जाता है, कोई देख लेगा, नज़र लग जायेगी.. यहाँ तक कि शर्म करो यूँ पब्लिक में !  बच्चे को लेकर घर से निकली ही क्यों?  सरीखे वाक्य बोले जाते हैं…. जबकि छः माह तक बच्चों को सिर्फ़ माँ का दूध ही पीना होता है, स्वास्थ एवं परिवार कल्याण भी इस विषय जागरूकता अभियान चला रहा है, जिसके अंतर्गत बने विडियो में एक स्त्री चलती बस में अपने बच्चे को स्तनपान कर रही है और सभी प्रशंसा भाव से देखते है तथा सहयोग देते है, जो कि होता भी है, सामान्यतः किसी को बुरा नहीं लगता पर फिर भी संकोच की एक दीवार है।

मलयालम पत्रिका ‘गृहलक्ष्मी’ ने अपने कवर शूट से समाज में एक संदेश देने की कोशिश की है। ‘गृहलक्ष्मी’ मैगजीन की एडिटर-इन-चीफ मॉन्सी जोसफ का कहना है कि ” अब हमें ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े टैबू को तोड़ने की ज़रूरत है। कई बार बच्चा भूखा होता है पर किसी के देख लेने के डर से मांएं उसे स्तनपान करवाने में झिझकती हैं। इसलिए इस महिला दिवस पर हमें इससे बेहतर मुहिम समझ में नहीं आई।”

इस कवर पेज को सोशल मीडिया में एक पत्रकार ने ट्वीट किया है–” ये गृहलक्ष्मी मैग्जीन का कवर पेज है। इसमें कहा गया है कि केरल से सारी माँएं बोल दें, कि हमें घूरना बंद करो क्योंकि हमें बच्चे को स्तनपान कराना है।”

पत्रकार के इस ट्वीट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। देखते ही देखते इस मैग्जीन कवर पर लोगों में बहस छिड़ गई। बहुत से लोगों ने फोटो शूट में गीलू जोज़फ के सिंदूर लगाने पर ऐतराज जताते हुए लिखा कि क्या बुर्के में महिला को स्तनपान कराते दिखा सकते हो? ऐसे लोगों के सवाल पर कुछ अन्य लोग भी अपनी बात रखते हुए कहने लगे कि गीलू जोज़फ हिंदू नहीं क्रिश्चियन हैं। साथ ही लोगों ने ये भी लिखा कि वैसे भी मां और बच्चे का किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं l बहरहाल, सभ्य समाज के सवाल जवाब जो भी हों, पर स्तनपान बच्चे और माँ दोनों की सेहत के लिए आवश्यक है।

फुल्लू किसी ने नोटिस नहीं की और पैडमेन के आग्रह पर सभी ने सेल्फ़ी लगाई और अभियान को आगे बढ़ाया, अब ज़रूरी है कि ब्रैस्टफीड कैम्पेन को भी आगे बढ़ाया जाये। टीम गृहलक्ष्मी को शुभकामनाएं।

(लेखिका पूजा मौलश्री एस एस के एनजीओ में सीनीयर कॉ-आर्डीनेटर व स्वतंत्र पत्रकार हैं। वे समय-समय पर विभिन्न विषयों पर स्वतंत्र लेखन भी करती रही हैं।)

मलयालम पत्रिका के बहाने Reviewed by on . जब कोई स्त्री बच्चे को स्तनपान कर रही होती है तो उसमें सिर्फ़ माँ दिखती है, और उस माँ को सिर्फ़ अपने बच्चे की भूख। हालांकि दूध पिलाती स्त्री के लिए सिर्फ़ श्रद्धा जब कोई स्त्री बच्चे को स्तनपान कर रही होती है तो उसमें सिर्फ़ माँ दिखती है, और उस माँ को सिर्फ़ अपने बच्चे की भूख। हालांकि दूध पिलाती स्त्री के लिए सिर्फ़ श्रद्धा Rating: 0

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