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सीएम मनोहर लाल को लाल बदमाशी का जवाब

March 8, 2018 8:38 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वामपंथी विचारधारा के लोगों को बदमाश कहकर संबोधित किया है जिसके जवाब में मार्क्सवादी पार्टी के एक साधारण सदस्य ने सीएम को खुल्ले पत्र के रूप में जवाब लिखा है।

माननीय महोदय,

आपने 6 मार्च 2018 को हरियाणा विधान सभा के बजट सत्र में आंगनवाड़ीकर्मियों की हड़ताल व आन्दोलन पर विपक्षी पार्टियों के प्रश्नों का जवाब दिया है। वह जवाब देते हुए आपने कहा है,’’ ये लाल झंडे वाले बदमाशी कर रहे हैं। कईं राज्यों में हमने इनका सफाया कर दिया है हरियाणा से भी इनको जल्द बाहर कर देंगे।’’ माननीय महोदय मैं आपके पद की गरिमा की कदर करता हूं और आपकी उम्र की भी। उम्र में आप मेरे बाप के समान हैं। परन्तु आपने जो कहा है उसका जवाब दिये बिना मैं अपने आपको नहीं रोक सकता, इसलिए आपसे क्षमा याचना करता हूं।

महोदय क्योंकि विधान सभा का बजट सत्र चल रहा है। विपक्षी पार्टियों के सवालों के बाद आप जब उतर में यह जवाब विधान सभा में दे रहे होंगे, आपकी पार्टी ही नहीं बल्कि विपक्षी पार्टी या उनके विधायक, खुश हो रहे होंगे। क्योंकि जिस पार्टी के विधायक सदन में मौजूद हैं उनके मन में भी लाल झंडे के प्रति ऐसा ही भाव होगा या रहा होगा जब उनकी पार्टी सता में थी। फर्क सिर्फ इतना है कि आपने आपके दिल की बात जुबान पर ला दी, वें शायद ऐसा नहीं कर सके। और आप शायद इसलिए कह पाए महोदय क्योंकि जिस संगठन में आपने वर्षों तक खाकी निक्कर व काली टोपी पहन कर अन्य के साथ जीवन गुजारा है वहां हमारे बारे में यही भाषा सिखायी जाती है। आपका यह कसूर नहीं है।

हरियाणा की सत्ता में रही बाकि पार्टियां बेशक पुंजीपतियों व सरमायेदारों की जी-हुजूरी में लगी रही हों। उनका भी मजदूरों व मेहनतकशों के प्रति घृणा व जायज मांगों तथा आन्दोलन को लाठी-गोली के दम पर दबाने का इतिहास रहा हो परन्तु आपमें उनमें से एक गुण ज्यादा है। वह गुण यह है कि आप नागपुर मुख्यालय के कट्टर सिपाही हैं, और आपका यह हौंसला इसलिए भी बना होगा क्योंकि त्रिपुरा में आपने आतंकी संगठनों के साथ मिलकर हाल ही में विधान सभा चुनाव जो जीता है। जी हां वही त्रिपुरा जहां के मुख्यमंत्री 20 साल तक राज में रहे जिन्हें सबसेे गरीब व ईमानदार मुख्यमंत्री कहा जाता रहा है और जिनकी नौकरी से रिटायर पत्नी अपने घर के काम के लिए अभी भी किराये के रिक्शे में बाजार जाती हैं। वहां आपके साथी सेवकों द्वारा आतंकियों के साथ मिली जीत के बाद जो तांडव किया जा रहा है, घर फुंके जा रहे हैं, लाल झंडे वालों को निशाना बनाया जा रहा है, दूनिया के मेहनतकशों व मजदूरों के हीरो लेनिन की प्रतिमाओं को उखाड़ा जा रहा है। यह आपका उत्साह बढ़ाने वाला तो जरूर है। कल विधान सभा में दिया गया जवाब शायद इन घटनाओं से उत्साह पाकर ही दिया लगता है। खैर यह सही अवसर था जिसका आपने सही इस्तेमाल किया।

महोदय, जिस लाल झंडे व उसको उठाकर चलने वालें को आप बदमाशों की संज्ञा दे रहे हैं क्या वास्तव में वे बदमाशी कर रहे हैं?  या बदमाश हैं? जब इस पर मैनें काफी समय तक दिमाग लगाया तो समझ में आया कि हम वास्तव में बदमाश हैं। क्योंकि हम मुनाफों पर पलने वाली भेड़ों, मजदूरों व मेहतकशों का खून चूसकर शासक वर्ग बने शासकों, गरीब मजदूरों-किसानों की फसलों को मंडियों में लूटवा कर, उससे अकूत मुनाफे बनाने वाले साहुकारों-बड़े व्यापारियों, इस देश के धन-संपदा, भूमि, खदानों, प्राकृतिक संसाधनों की लूट करने वालों की लूट में बड़ी बाधा हैं। हमीं तो हैं जो पूंजीपतियों, बड़े ठेकेदारों व व्यापारियों द्वारा सरकारी विभागों को अपने कब्जे में लेने व लूटने की निजीकरण की नीतियों के आड़े आ रहे हैं। इस मामले में शासकों के प्रति आपकी वफादारी पिछली कांग्रेस सरकार व उनके मुख्यमंत्री से कम नहीं है। जिन्होंने मारूति कम्पनी के विवाद में 250 मजदूरों को बिना किसी सबूत के वर्षों जेलो में सड़ाया व कम्पनी को केस लड़ने के लिए वकील मुहैया करवाकर उसको 9 करोड़ का भुगतान सरकारी खजाने से किया। और आपने क्या किया? कोर्ट द्वारा बरी किए गए व आजीवन कारावास की सजा पाए सभी मजदूरों को फांसी दिलवाने हाई कोर्ट चले गए। और आप ही हैं जिन्होंने रोहतक में आईसिन के 600 के करीब पक्के मजदूरों को बाहर करने वाले जापानी मालिकों का बाल भी बांका नहीं होने दिया। इससे पहले इनेलो राज में भी हम यह देख चुके हैं।

इसलिए महोदय हमें बदमाश समझने वाले आप ही नहीं है और भी हैं। और हमें बदमाश सदियों से समझा व कहा जाता रहा है। तब से कहा जा रहा है जब दुनियां में कपड़े का अविष्कार भी नहीं हुआ था, लाल झंडे की बात तो दूर की बात। यह संघर्ष व बदमाशी का फट्टा सभ्यता की गुलाम अवस्था से चला आ रहा है महोदय। गुलामों के मालिकों ने यही कहा, फिर खेती करने वालों के जमीदारों ने यही कहा, राजे-रजवाड़ों ने यही कहा और अब पूंजीपतियों के लोकतंत्र के स्तंभ के रूप में आप जैसे रक्षक यही कह रहे हैं। महोदय, यह लाल झंडा लाल वैसे ही नहीं बना। सैंकड़ों वर्षो से पीड़ितों के संघर्ष, सताधीशों व उनके रक्षकों द्वारा भारी दमन, उत्पीड़न कत्लों-गारत सहन कर लड़ाईयों में अपना खून बहाकर मेहनतकशों क हितों के लिए भारी कुर्बानी देकर खून से रंगा है यह लाल झंडा।

लाल झंडा तो प्रतीक है महोदय, पूरी दूनिया में हमारी पीढ़ियों के संघर्ष के इतिहास व बलिदान का। आप शायद इतिहास कम जानते हैं क्योंकि आपकी शाखाओं में इतिहास नहीं नफरत का पाठ पढ़ाया जाता है। आपके यहां ज्ञान नहीं बल्कि ज्ञान को कुन्द कर अंधविश्वास व अंधराष्ट्रवाद का चश्मा लगाया जाता है। इसलिए आपके शाखा भक्त त्रिपुरा में जीत के बाद महान लेनिन पर बुलडोजर चलाकर मुर्तियां उखड़वा रहे हैं। अब तो सुना है अंबेडकर व पैरियार की भी आपके राज में मुर्तियां तोड़ने का काम शुरू हो चुका है। आपके नागपुर मुख्यालय की दिल्ली ब्रांच में दिनभर तैयारी करके रात 9 बजे जब जी न्यूज पर बैठकर एक एंकर (भांड) जब लेनिन के बारे बोलता है, तो उसकी पत्रकारिता पर तरस आता है। अल्पबुद्धि लिए यह भांड जिसे इतिहास का शायद तनिक भी ज्ञान नहीं है वह आपका स्टार है। शासकों व राज की सेवा में वह दूनिया में मजदूरों व क्रान्ति के नायक लेनिन को हत्यारा घोषित कर देता है। जिस लेनिन की जीवनी शहीद भगतसिंह फांसी से चन्द घंटे पहले भी पढ़ रहे थे। और यह भांड जैसी भांडगिरी करता है, गला तक सुखा लेता है, उस पर सचमुच तरस आता है।

महोदय, इसी लाल झंडे के नायक थे लेनिन। वही लेनिन जिनके नेतृत्व में रूस में मजदूरों-किसानों व साधारण जनता ने जारशाही राज को उखाड़ फैंका। जिन्होंने पूरी दुनिया को दिखाया की मजदूरों के हाथ में सता आने के बाद विकास किस शिखर पर पंहुच सकता है। लाल झंडे के राज में ही रूस वह पहला देश बना जिसने महिलाओं व साधारण लोगों को वोट का अधिकार दिया, नई-नई खोजें की। अंतरिक्ष में पहला यान भेजा, फिर इंसान भेजा। जहां भुखमरी व गरीबी, महिलाओं की बदत्तर हालात खत्म हुई। और यही लाल झंडा है जिसने हिटलर जैसे तानाशाहों की कत्लों गारत से पूरी दूनिया को बचाया और उसी के देश में उसकी संसद राइख्स्टैग पर लाल झंडा लहराया था। दूनिया जानती है न केवल अपने देश के बल्कि मानवता को बचाने के लिए, इस लड़ाई में रूस ने लाखों की संख्या में अपने लाल झंडे के प्रहरियों को खोया था।

खैर महोदय, इन बातों का आप व आपके सेवकों या भांडो पर कोई असर नहीं होने वाला क्योंकि शाखाओं का विचार तो हिटलर को आदर्श मानता है। हिटलर ने जो नफरत व नस्ल की राजनीति की वही तो हिन्दोस्तान में आप कर रहे हैं। जब पूरा देश आजादी के आन्दोलन में अंग्रेजों से लड़ रहा था, आपके सेवक कर क्या रहे थे? यही सब, नफरत व बंटवारें की राजनीति। नागपुर से राष्ट््रभक्ति की जो बयार चलती है वह झूठ के अलावा कुछ नहीं है महोदय। आपके पूरे संघ परिवार में आजादी के आन्दोलन में किसी ने उंगली तक नहीं कटवाई। जिस सावरकर को आप सबसे बड़ा देशभक्त स्थापित करने पर तुले हुए हैं, वह माफीनामा देकर जेंल से बाहर आए थे व पक्के अंग्रेज भक्त बन गए थे। आजादी के आन्दोलन का कोई भी युवा जिसने लाल झंडे उठाया था, ऐसा नहीं मिलेगा जिसने जेल न काटी हो व अंग्रजों की यातनाएं न सही हों।

महोदय यह लाल झंडा प्रतीक है हमारे संघर्षों का, यह गरीबों, मजदूरों-किसानों, मेहनतकशों, युवाओं, महिलाओं, दलितों अल्पसंख्यकों के हितों का रक्षक है। हां यह भी सही है कि देश के बड़े पूंजीपति, बड़े जागीरदार-सरमायेदार, बड़े ठग-व्यापरी, ठेकेदार या यूं कहें आपके अंबानी, अडाणी, माल्या, नीरव मोदी जैसों के हित की राजसता के लिए हम बदमाश ही हैं। और यह भी सही है कि आप हमारा सफाया कर सकते हैं। बंगाल में भी हमने जुल्म सहे हैं, त्रिपुरा में आप इसी काम में लगे हुए हैं और केरल में जहां लाल झंडे की सरकार बची है वहां भी क्या आप कसर छोड़ रहे हैं। लेकिन महोदय क्या आप असल में हमें साफ कर सकते हैं।

महोदय यही तो वर्ग संघंर्ष है। यह गली-सड़ी सता, जिसने इंसान को इसंान नहीं समझा, जो केवल मुनाफे बढ़ाने का औजार है जिसके लिए इंसानी जीवन केवल एक उत्पाद है, जो 1 फीसदी लोगों को देश की 73 फीसदी संपति का मालिक बनाने के रास्ते खोलती है। जो चंद अरबपतियों की संपति को साल भर में ही चार गुणा कर देती है, यह सता जिसने बच्चों से उनका बचपन छीन लिया, औरतों को जिसने भारी गरीबी में रखकर वेश्यावृति में धकेलने का काम किया है। आप ही तो हैं जो महिलओं के हितों की बात करते हैं और असल में उन्हें 1000-1000 रूपये महीना पगार देकर उनके शोषण की भारी लूट करते हो। आप ही हो जिसने मुनाफे की लूट के लिए हिन्दुओं व मुस्लिमों के बीच नफरत पैदा की है, जिसने अपनी संपति की रक्षा के लिए हमारे बेटों व बेटियों को सेना-पुलिस में भर्ती कर मरने पर मजबूर किया है, जिसने जातियों की सरंचनाओं को बनाया है, उन्हें सींचा है, आबादी के बड़े हिस्से को अछूत बनाकर रखा है अपनी सेवा के लिए। इसे बदलना चाहता है लाल झंडा व इसके सिपाही, जिन्हें आप बदमाश कह रहे हैं।

और महोदय, आप हमारा सफाया कर सकते हैं, हम पर हमले कर सकते हैं, हमारा जीवन छीन सकते हैं, लेकिन शोषण से मुक्ति के विचार को आप कभी साफ नहीं कर सकते। पीढ़ियां खप गई सताधारियों की, सफाया नहीं कर पाई। आजादी का विचार, अपने किए हुए काम की मजदूरी मांगना, बेहतर जीवन का सपना, नई सोच पर आप कभी लगाम नहीं लगा सकते। इसलिए इस संघर्ष में अन्ततः मौजूदा व्यवस्था को ही हारना है। हम बदमाश हैं, पूंजीपतियों की इस सता की नजर में। लेकिन जनता के लिए हम क्या हैं, यह आप हमारे पीछे चलने वाली कतारों की गिनती करके देखें। जनता तय करेगी हमारे नामों-उपनामों को। किसी भी तरह से सारे हथकंडे अपना, हर तरह के खराब/जाहिल/संगठनों/लोगों को भी साथ ले, पुंजीपतियों से अरबों रूपये लेकर चुनावों में पैसा लगाकर तथा वोट लेकर राज तक एक समय पर पंहुचा जा सकता है। लोगों के दिलों तक नहीं। हम पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। आप मुक्ति के विचार का कत्ल नहीं कर सकते।

-जयभगवान, साधारण सिपाही, लाल झंडा

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