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दारुल उलूम देवबंद का फतवा

(दरअसल, इस्लाम में रुपये से आने वाले ब्याज रीबा कहलाता है। इस्लामी कानून या शरीयत में ब्याज वसूली के लिए रकम देना और लेना शुरू से ही हराम माना जाता रहा है। इसके अलावा, इस्लामी सिद्धांतों के मुताबिक हराम समझे जाने वाले कारोबारों में निवेश को भी गलत माना जाता है। धन का अपना कोई स्वाभाविक मूल्य नहीं होता, इसलिए उसे लाभ के लिए निवेश नहीं किया जा सकता। )

January 5, 2018 12:50 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

दारुल उलूम देवबंद का फतवा

           दारुल उलूम देवबंद कह रहा हैं कि मुसलमानों को ऐसे परिवारों में रिश्ता करने से बचना चाहिए जिनका मुखिया बैंक में नौकरी करता हो।उसने कहा है कि बैंक की कमाई ब्याज से होती है जो इस्लाम में हराम है। दारुल उलूम के मुताबिक इसलिए इस तरह की नौकरी से कमाया गया पैसा भी हराम है।

चलिए यानी बैंक में जो मुसलमान काम करे उस से रिश्ता रखना सही नही है यानी दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मुसलमानो को बैंक में काम ही नही करना चाहिए, इस्लाम मे ब्याज लेना और देना दोनों हराम है, यानी क्या इसका मतलब यह है कि, मुसलमान आज कोई बिजनेस कर ही नही सकता क्योंकि आज के समय मे आप कोई बड़ा बिजनेस करोगे तो कम से कम बैंक से कर्जा तो लेना ही पड़ेगा, तो क्या मुसलमान लोगो को गाड़ियों सुधारने, पंचर पकाने जैसे छोटे मोटे काम ही करना चाहिए?

आज इक्कीसवीं शताब्दी में खड़े होकर यदि आप इतनी रूढ़िवादी बाते कैसे कर सकते है

इस तरह की बाते जब सामने आती है तो यह बात वाकई में हुई होगी यह सच लगता है

15वीं शताब्दी में जब इस्लाम और ईसाई के बीच परस्पर धर्म को लेकर युद्ध होते ही रहते थे उस वक्त तक अरब और युरोप की स्थिति एक बराबर ही थी।

जब योहानेस गुटेनबर्ग ने 1439 में छापेखाने (प्रिंटिंग प्रेस) का अविष्कार किया। जिससे यूरोप में ज्ञान विज्ञान में प्रगति हुई और उनकी बातें जब जल्द ही ज्यादा लोगों तक सुलभता पूर्वक पहुंच सकती थी। इस नए आविष्कार को अपनाने के बजाय मुस्लिम धर्मगुरु तुर्की के शैखुल इस्लाम ने इसके खिलाफ फ़तवा ज़ारी करके इसका उपयोग गैर इस्लामिक करार दे दिया।…………….

एक और ईसाई एक के बाद एक आविष्कार करते गए और मुस्लिम धर्मगुरु उन पर फतवे दर फतवे लगाते ही गए। 250 सालो तक मुस्लिमो ने छापेखाने नहीं बनाए तब तक पूरा यूरोप इसके जरिये तालीम में तुर्की और मुसलमानों से 250 साल आगे निकल गया,

आज भी यह ढाईसो सालो का अन्तर कई जगह दिख जाता है…

Girish Malviya कि फेसबुक से….

नोट:- प्रस्तुत खबर में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। खबर के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है

दारुल उलूम देवबंद का फतवा Reviewed by on . दारुल उलूम देवबंद का फतवा            दारुल उलूम देवबंद कह रहा हैं कि मुसलमानों को ऐसे परिवारों में रिश्ता करने से बचना चाहिए जिनका मुखिया बैंक में नौकरी करता हो दारुल उलूम देवबंद का फतवा            दारुल उलूम देवबंद कह रहा हैं कि मुसलमानों को ऐसे परिवारों में रिश्ता करने से बचना चाहिए जिनका मुखिया बैंक में नौकरी करता हो Rating: 0

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