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धूम्रपान – इन्सान के धीरे-धीरे मौत कि तरफ बढते कदम

बीड़ी-सिगरेट का धुआँ कोलेस्टेरॉल की पपड़ियों को धमनियों में जमाता है, फिर उनमें फटन पैदा करता है। यह प्लेटलेटों से बनने वाले हानिकारक थक्कों की संख्या बढ़ाता है। धमनियों में होने वाली इन दुर्घटनाओं को आप हार्ट-अटैक, फ़ालिज, नपुंसकता और गैंग्रीन के रूपों में देखते हैं। इनपर एक-एक करके हम विस्तार से बात करेंगे।

December 29, 2017 9:31 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

धूम्रपान – इन्सान के धीरे-धीरे मौत कि तरफ बढते कदम

धूम्रपान के माध्यम से भीतर लिये गये हानिकारक पदार्थों के हृदय और रक्त-संचार-तन्त्र पर अपने गहरे दुष्प्रभाव हैं।

संसार-भर में बदली जीवनचर्या के कारण कोरोनरी-हृदय-रोगों की प्रचलन-दर में बेतहाशा वृद्धि हुई है। हृदयाघात अब अधिक पड़ते हैं, जल्दी पड़ते हैं और उनमें पड़ते हैं, जिनमें ‘उम्मीद’ लोग नहीं करते। 

समस्या यह है कि हम और हमारे अंग रसायनों के एक सूप में नहा रहे हैं और चाह कर भी हम एक हद से अधिक उनमें फेर-बदल नहीं कर सकते है। फेर-बदल निजी स्तर पर कुछ हद किये जा सकते हैं, पूरा समाज बदलने के लिए व्यक्तिगत इच्छाशक्ति से अधिक सरकारी इच्छाशक्ति और कार्मकिता चाहिए होती है। ज़ाहिर है जब मुनाफ़ा सामने दिखायी देता है, तो बड़े-बड़े संगठन बड़े हितों को दरकिनार कर देते हैं। वे सिगरेटों का उत्पादन बन्द नहीं करेंगे, डिब्बों पर वैधानिक चेतावनी देकर अपने कर्त्तव्य की इति समझ लेंगे। बाकी जीवन आपका, बचना है तो अपने विवेक से बचिए। सरकारें आपको हाथ पकड़कर बचाने नहीं आएँगी।

धूम्नपान का ज़िक्र करना इसलिए करना आवश्यक हो जाता है क्योंकि संसार-भर में बढ़ते कैंसर, श्वास और हृदय-रोगियों की संख्या में इसने बड़ी भूमिका निभायी है। न सिर्फ़ भीतर प्रविष्ट हुआ धुआँ धमनियों में रक्त-प्रवाह अवरुद्ध करता है, बल्कि हृदय के निरन्तर चल रहे संकुचन पर भी बुरा असर लाता है। 

उम्र बढ़ने के साथ धमनियों की दीवारों में वसा (कोलेस्टेरॉल) और कोशिकाओं से निर्मित पपड़ियाँ जमा होने लगती हैं। धूमपान इस काम में हानिकारक कोलेस्टेरॉल के जमावड़े की मदद करता है। नतीजन खून का बहाव धीरे-धीरे सँकरे होते रास्ते से कम होता जाता है। फिर कभी अचानक यह मोटी हुई पपड़ी फट पड़ती है और उस स्थान पर प्लेटलेटों से बने थक्के पूरा रक्त-प्रवाह रोक देते हैं। हृदय की कोरोनरी धमनियों में होने वाली यही दुर्घटना मायोकार्डियल इन्फार्क्शन कहलाती है, जिसे आम लोग हार्ट-अटैक कहते हैं।

बीड़ी-सिगरेट का धुआँ कोलेस्टेरॉल की पपड़ियों को धमनियों में जमाता है, फिर उनमें फटन पैदा करता है। यह प्लेटलेटों से बनने वाले हानिकारक थक्कों की संख्या बढ़ाता है। धमनियों में होने वाली इन दुर्घटनाओं को आप हार्ट-अटैक, फ़ालिज, नपुंसकता और गैंग्रीन के रूपों में देखते हैं। इनपर एक-एक करके हम विस्तार से बात करेंगे।

बात यह नहीं कि धूम्नपान नहीं करेंगे तो ये रोग हो ही नहीं सकते। बात यह है कि जब पूरे संसार में पूँजीवादी विलासिता दुष्प्रभावों की लहर चला रही हो, तो उसमें नशे को व्यक्तिगत तौर पर क्यों चुना जाए। भोजन दूषित हो चुका है, व्यायाम नदारद है, तनाव चरम पर है। ऐसे में धूम्रपान करके एक और जोखिम लेकर हम सिद्ध क्या करना चाहते हैं?

Dr. Skand  Shukla

 

 

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