Sunday , 21 October 2018

Home » खबर खास » ‘मजदूर संगठन समिति’ के प्रतिबन्ध पर एक रिर्पोट

‘मजदूर संगठन समिति’ के प्रतिबन्ध पर एक रिर्पोट

यहां यह बतान जरूरी है कि अब प्रतिबंधित हो चुका ‘मजदूर संगठन समिति’ एक पंजीकृत यूनियन है जिसकी पंजीयन संख्या 3113/89 है। यह संगठन कोयला खदान, थर्मल पाॅवर, फैक्टरी, खेत और पारसनाथ की धर्मनगरी के संगठित और असंगठित मजदूरों में काम करती है। यह संगठन मजदूरों और गरीब लोगों के लिए मधुबन, गिरीडीह में अस्पताल बनवाया जहां मजदूर और गरीब लोग अपना मुफ्त इलाज करा सकते हैं। यह संगठन अन्य जगहों पर भी मजदूरों के सेवार्थ कल्याणकारी कार्यक्रम चलाता रहा है।

December 30, 2017 12:28 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

‘मजदूर संगठन समिति’ के प्रतिबन्ध पर एक रिर्पोट

झारखंड सरकार ने अपराध नियंत्रण संशोधन कानून 1908 की धारा 16 के तहत ‘मजदूर संगठन समिति’ को प्रतिबंधित कर दिया है। यूएनआई की खबर के अनुसार इस संगठन ने तेलगू और भारतीय साहित्य के महान कवि वरवर राव को अपने कार्यक्रम में बुलाया था जिससे झारखंड के तीन जिलों में कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो गई थी। इसके साथ ही यह संगठन विवादों का निपटारा, लेवी लेना और जनअदालत लगाने का अपराध कर रही थी। 

झारखंड सरकार और उसकी पुलिस उपरोक्त ‘अपराध’ के लिए मजदूर संगठन समिति पर कभी कोई केस दर्ज नहीं किया है और संगठन का कोई सदस्य इस अपराध में दोषी नहीं पाया गया है। क्या वरवर राव को बुलाना अपराध की श्रेणी में आता है?

झारखंड सरकार और पुलिस के आला अफसर डोली मजदूर मोतीलाल बास्के को झूठे मुठभेड़ में मारकर पुरस्कार तो बटोर चुकी है लेकिन जब मजदूर संगठन समिति के नेतृत्व में शिबू सोरन से लेकर अन्य विपक्षी दल इस झूठी मुठभेड़ की जांच की मांग कर रहे हैं तो प्रतिबंध लगाने की राजनीति की जा रही है। आज तक मोतीलाल बास्के की पत्नी के द्वारा दिया गया ज्ञापन और दोषियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं किया गया है। जबकि सर्वोच्च न्यायधीषों ने प्रावधान दे रखा है कि एनकाउंटर के दौरान हुई मौतों पर एफआईआर दर्ज की जाय।

आज झारखंड में नक्सल खात्मा अभियान और ‘मोमेंटम झारखंड’ के तहत गांवों को उजाड़ने, सीपीआई-माओवादी के खिलाफ सेना और पुलिस का संयुक्त अभियान चलाने का डंका पीटा जा रहा है। अखबारों में खबरें भी छप रही हैं। रघुबर दास की भाजपा सरकार को डर है कि ‘मजदूर संगठन समिति’ इसका खुलकर विरोध करेगा और जनता में प्रचार अभियान चलायेगा।

आज सच्चाई यही है कि यह संगठन सिर्फ तीन जिलों में नहीं पूरे झारखंड में मजदूरों को संगठित करने वाला संगठन बन चुका है। बोल्शेविक क्रांति के सौ साल मनाने के दौरान पूरे झारखंड में कार्यक्रम हुए और उसमें हजारों लोगों ने शिरकत की।

साफ है कि ‘मजदूर संगठन समिति’ की राजनीति भाजपा की फासीवादी राजनीति के खिलाफ जाती है। यह संगठन खुलकर मार्क्सवाद-लेनिनवाद की बात करता है। दूसरे यह भी कि यह संगठन आदिवासी और मजदूर को संगठित कर रहा है जो झारखंड राज्य की मुख्य आबादी है। यह कार्य भी आरएसएस-भाजपा जैसे संगठन को नागवार गुजर रहा है। तीसरा, इसने अवैध खदानों, ठेकेदारों की लूट और माफिया-रंगदारों पर नियंत्रणकारी प्रभाव डालना शुरू कर चुका था।

यह प्रतिबंध लूट-खसोट की आय और राजनीति करने वालों की सेवा करने के लिए लगाया गया है। यह प्रतिबंध जनता को उसके संगठन से वंचित कर उसे और भी कमजोर और भूखमरी की तरफ ठेलने के लिए लगाया गया है।

यहां यह बतान जरूरी है कि अब प्रतिबंधित हो चुका ‘मजदूर संगठन समिति’ एक पंजीकृत यूनियन है जिसकी पंजीयन संख्या 3113/89 है। यह संगठन कोयला खदान, थर्मल पाॅवर, फैक्टरी, खेत और पारसनाथ की धर्मनगरी के संगठित और असंगठित मजदूरों में काम करती है। यह संगठन मजदूरों और गरीब लोगों के लिए मधुबन, गिरीडीह में अस्पताल बनवाया जहां मजदूर और गरीब लोग अपना मुफ्त इलाज करा सकते हैं। यह संगठन अन्य जगहों पर भी मजदूरों के सेवार्थ कल्याणकारी कार्यक्रम चलाता रहा है।

इसके साथ ही मजदूरों के हक के लिए रैली और सभा आयोजित कर मजदूरों को उचित हक की लड़ाई करती रही है। मजदूरों में काम करने के लिए उन्होंने मुख्यतः सेमिनार, सभा, रैली, विचार गोष्ठी, वर्कशाॅप को माध्यम बनाया है।

फासीवादी सत्ता पुंजीपतियों को जल-जगंल-जमीन लुटवाना चाहती है। इस लुट के  खिलाफ आदिवासीयों, मजदुरो की मजबुत आवाज मजदुर संघठन समिति को सरकार बन्द करना चाहती है। हम आवाम से अपील करते है कि एकजुट होकर सत्ता के इस फासीवादी फैंसले का विरोध कीजिये।

अंजनी कुमार की फेसबुक से……

 

‘मजदूर संगठन समिति’ के प्रतिबन्ध पर एक रिर्पोट Reviewed by on . ‘मजदूर संगठन समिति’ के प्रतिबन्ध पर एक रिर्पोट झारखंड सरकार ने अपराध नियंत्रण संशोधन कानून 1908 की धारा 16 के तहत ‘मजदूर संगठन समिति’ को प्रतिबंधित कर दिया है। ‘मजदूर संगठन समिति’ के प्रतिबन्ध पर एक रिर्पोट झारखंड सरकार ने अपराध नियंत्रण संशोधन कानून 1908 की धारा 16 के तहत ‘मजदूर संगठन समिति’ को प्रतिबंधित कर दिया है। Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top