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नए धार्मिक आंदोलन के लिए चर्चित थे रजनीश

December 11, 2017 10:06 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

“ध्यान का अर्थ होता है- न विचार, न वासना, न स्मृति, न कल्पना। ध्यान का अर्थ होता है भीतर सिर्फ होना मात्र, ध्यान है मृत्यु। मन की मृत्यु। मैं की मृत्यु। विचार का अंत। शुद्ध चेतन्य रह जाए दर्पण जैसा खाली। कोई प्रतिबिंब न बने। तो एक तो यात्रा है ध्यान की… और फिर  ध्यान से ही ज्ञान का जन्म होता है। जो ज्ञान ध्यान के बिना तुम इकट्ठा करते हो वह ज्ञान नहीं, ज्ञान का धोखा है, मिथ्या ज्ञान है, शास्त्रों से, सिद्धांतों से, दूसरों से, अन्यों से तुम जो इकट्ठा करलेते हो वह ज्ञान नहीं है ज्ञान तो ध्यान में जन्मता है। ध्यान है शुद्ध बोध। उस बोध में तुम्हें दिखाई पड़ता है जीवन का अर्थ, जीवन का रहस्य….” ये शब्द हैं आचार्य रजनीश के।

आचार्य रजनीश, ओशो रजनीश या ओशो। पूरा नाम चंद्र मोहन जैन। जन्म जबलपुर, मध्य प्रदेश में….. और ख्याति…… दूर-दूर तक। जबलपुर, मध्यप्रदेश के कुचवाड़ा गांव की खामोश आबोहवा शायद ही ये बयां कर पाती होगी कि इस मिट्टी ने पूरे विश्व को एक दर्शन दिया है, फ़लसफ़ा दिया है, रजनीश-दर्शन। 11 दिसंबर 1931 को जैन परिवार में जन्में रजनीश मतवाले हुआ करते थे। वे नये धार्मिक आंदोलन के लिए काफी चर्चित माने जाते हैं। उन्होनें प्रचलित धर्मों की व्याख्या की और प्रेम, ध्यान और खुशी को जीवन का आधार बनाया। दर्शनशास्त्र के अध्यापक के रूप में सेवाएं देने वाले रजनीश ने समाजवाद, महात्मा गाँधी की विचारधारा और संस्थागत धर्मं पर जो बातें कही, वो हमेशा विवादों का कारण बनती गई।

वे जीवन के मूलभूत विषयों पर खुलकर बात करते थे। जीवन की स्वाभाविकताओं को सहज-स्वीकारने की बात कहते थे। यहां तक कि सेक्स के विषय को भी उन्होनें अपने दर्शन में सहजता से लिया। जो तथाकथित धार्मिक पंडित, पुरोहितों को अखरने का कारण भी बना। यही कारण था कि इनकी ‘संभोग से समाधि की ओर’ किताब काफी चर्चा में रही। भले ही वे खुद को 20वीं सदी के तमाशेबाजों में मानते थे, मगर अपने बुद्धि और कौशल से दुनिया भर में उन्होनें अपने अनुयायियों को जिस सूत्र में बांधा; वैसा कोई और नहीं कर पाया। जीवन का ऐसा कोई आयाम नहीं था जिसको उन्होनें न छूआ हो। यही कारण था कि दिन ब दिन उनके चाहने वालों की कतार बढती गई।

कई साल भारत में गुजारने के बाद रजनीश अमेरिका चले गए। वहां पर भी उनके अनुयायी एक-से-एक बढने लगे। नतीजा ये हुआ कि कुछ इसाई कट्टरपंथियों को उनके ये कारनामें अखरने लगे और उन्हे अप्रवास नियमों के उल्लंघन के 35मनगढंत आरोप लगाकर बिना गिरफ्तारी वारंट जेल में डाल दिया गया। जेल से छोड़े जाने के बाद रजनीश भारत लौट आए। बताया जाता है कि रजनीश को अमेरिकी जेल में धीमा जहर दे दिया गया था। जिसके कारण भारत लौटने के कुछ ही समय के बाद 19 जनवरी 1990 को वे इस दुनिया से चले गए, भले ही आचार्य रजनीश आज हमारे बीच न हो, मगर उनके प्रवचनों की सैंकड़ो सीडीयां और हजारों किताबें आज भी उनके दर्शन का प्रमाण दे रही है।

 

लेखक एस.एस.पंवार हरियाणा खास के कंटेंट एडिटर हैं। हरियाणा खास के अलावा भी वे देश की कई चर्चित पत्र-पत्रिकाओं में अपने लेख, कहानी और कविताओं के रूप में छपते रहे हैं।

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