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राहुल का समाजवादोन्मुखी भाषण

December 17, 2017 10:22 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

शनिवार के दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी का अध्यक्ष पद  अपने बेटे राहुल गांधी को सौंप दिया। बता दें कि इससे एक दिन पहले ही सोनिया गांधी ने राजनीति से रिटायर होने का ऐलान किया। शनिवार को आयोजित पार्टी के कार्यक्रम में देश के अलग-अलग कोनों से पार्टी कार्यकर्ता इकट्ठे हुए और पटाखों के शोर के साथ राहुल की ताजपोशी का स्वागत किया।

उधर कुछ नेताओं की ओर से भी राहुल का स्वागत किया गया। आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधीर कुलकर्णी ने राहुल को देश की जरूरत बताया और कहा कि वे देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। तो वहीं उन्होनें सोनिया को साहसी महिला कहा। आप नेता अरविंद केजरीवाल और आशुतोष ने भी राहुल गांधी को बधाई दी। जानकारी के लिए बता दें कि 2004 में पहली बार सांसद बनकर राहुल ने राजनीति में कदम रखा था जिसे अब तेरह से भी ज्यादा साल का वक्त बीत चुका है।

24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर हुए इस कार्यक्रम में बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिंदी और अंग्रेजी में बारी-बारी स्पीच भी दिया। इससे पहले सभी को मालूम है कि राहुल अपनी आवाज के लड़खड़ाहट या कहें हिंदी पर असाधारण पकड़ न होने के कारण उनके भाषणों का, बयानों का मजाक बनता रहा है। लेकिन शनिवार को दिए उनके भाषण को इस तरह के मजाक का हिस्सा नहीं बनना पड़ा। इस दौरान उन्होनें देश में आपसी भाईचारे की सीख दी और नफरत का मुकाबला प्यार से करने की बात भी कही। उनकी कुछ हू-ब-हू पंक्तियां इस प्रकार हैं

 

“देखिए.. एक बार आग लग जाती है उसको बुझाना बहुत मुश्किल होता है। यही हम बीजेपी के लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं…

कि एक बार आपने देश में आग लगा दी… उसको बुझाना बहुत मुश्किल है।

और आज बीजेपी के लोग पूरे देश में आग और हिंसा को फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, और इसको रोकने के लिए पूरे देश में सिर्फ एक शक्ति है, वो है कांग्रेस पार्टी का प्यारा कार्यकर्ता, और नेता।

वो तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं।

वो आग लगाते हैं हम बुझाते हैं।

वो गुस्सा करते हैं हम प्यार करते हैं, ये फर्क है हममें और उनमें।

इस दौरान उन्होनें कहा कि पार्टी के सारे कार्यकर्ता, चाहे वो बच्चा हो, बड़ा हो, बूढा हो; मेरा परिवार है, मैं उन्हें पूरा प्यार दूंगा। कांग्रेस को हम ग्रेंड ओल्ड एंड यंग पार्टी बनाने जा रहे हैं। उन्होनें युवाओं से आग्रह किया कि…

आप सब युवा चाहे आप कोई भी हो आप आईए, हम प्यार का हिंदुस्तान बनाएंगे। क्रोध की गुस्से की राजनीति से हम लड़ेंगे और हम उनको हरायेगें।

जो कांग्रेस कार्यकर्ता इस पार्टी की विचारधारा को अपने खून-पसीने से देश के हर गांव-शहर तक पहुंचाता है; संगठन में उसकी रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है। और मैं आपको आश्वासन देना चाहता हूं कि आने वाले समय में आपकी आवाज पूरे हिंदुस्तान में सुनाई देगी।“

ये थे राहुल गांधी के भाषण के हिंदी अंश।

अपनी पार्टी के लिए कौन नेता प्रचार नहीं करता होगा। कौन नेता पार्टी को मजबूत नहीं करना चाहता होगा। और कौन नेता ये नहीं चाहता होगा कि उसकी पार्टी की विचारधारा देश के जन-जन तक पहुंचे।  लेकिन देश के जो मौजूदा हालात हैं, जिस तरह की सांम्प्रदायिक आग में देश झुलस रहा है, उसे देखकर तो यही लगता कि कांग्रेस के इस नये अध्यक्ष का भाषण माहौल को संतुलित करने में कारगर साबित होगा। चाहे वो सत्ता परिवर्तन की बात हो या बीजेपी को खुद के अंदर झांककर देखने या आत्म-मंथन करने की बात हो। मौजूदा संकटमयी दौर में राहुल के इन शब्दों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति के रूप में भी देखा जा सकता है कि ‘वो तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं। वो आग लगाते हैं हम बुझाते हैं। वो गुस्सा करते हैं हम प्यार करते हैं, ये फर्क है हममें और उनमें।’ राहुल गांधी की इस तमाम बातों को अति-साम्प्रदायिकता के मौजूदा दौर में एक विराम स्थिति के रूप में समाजवादोन्मुख अभिव्यक्ति के रूप में भी लिया जा सकता है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि पार्टी-पार्टी सब एक होती है। दृष्टिकोण, विचारधारा का फर्क उन्हें अलग-अलग खंडों में विभक्त करता है, अलग-अलग वर्गों में बांटता है। बीजेपी कार्यकाल के तुरंत बाद जो सांप्रदायिक रूख सामने आया है, वो कहीं न कहीं देश को और पीछे धकेल रहा है। कट्टर हिंदुत्व, लव जेहाद, घर-वापसी, बीफ, असहिष्णुता सरीखे शब्दों से जनता इसी कार्यकाल में वाकिफ हुई है। यहां पर मैं कोई जीडीपी या देश के आर्थिक पैमानों की बात नहीं करूंगा। न आर्थिक नीतियों को बुरा भला कहूंगा, न नोटबंटी को बुरा साबित करूंगा, तो न किसी अनुबंधो या बुलेट ट्रेन पर चर्चा चाहूंगा। सिर्फ एक  मौजूदा सांप्रदायिक रूख, जिससे मैं बुरी तरह आहत हूं वैसा पहले कभी देखने को नहीं मिला। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस छोटे से स्पीच से कहीं न कहीं देश के आलाओं को सीखने की जरूरत है। हम क्या कहते हैं, वो क्या कहते हैं। वो क्या करते हैं और हम क्या करते है, इन तमाम बातों से जनता अच्छी तरह से वाकिफ है, पब्लिक सब जानती है और पब्लिक में जैसा समझ होगी वैसा ही तंत्र देश में निर्मित होगा।

( लेखक एस.एस.पंवार स्वतंत्र पत्रकार एवं हरियाणा खास के कंटेंट एडिटर हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख, कविताएं और कहानियां प्रकाशित होती रही हैं।)

राहुल का समाजवादोन्मुखी भाषण Reviewed by on . शनिवार के दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी का अध्यक्ष पद  अपने बेटे राहुल गांधी को सौंप दिया। बता दें कि इससे एक दिन पहले ही सोनिया गांधी ने राजनीति शनिवार के दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी का अध्यक्ष पद  अपने बेटे राहुल गांधी को सौंप दिया। बता दें कि इससे एक दिन पहले ही सोनिया गांधी ने राजनीति Rating: 0

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