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50 साल बाद जगी आवे-पंजावे की जमीन मिलने की उम्मीद, कुम्हार समुदाय खुश

October 15, 2016 10:57 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

kumhar samuday ko milegi jameen

अभी सरकार ने आवे पंजावे का जमीनी रिकॉर्ड जिला उपायुक्तों से मांगा है लेकिन कुम्हार समुदाय में इससे खुशी की लहर दौड़ गई है। उन्हें उम्मीद जगी है कि प्रत्येक गांव में जो पांच एकड़ जमीन इस समुदाय को अपने पुश्तैनी काम को करने के लिये आबंटित होने की घोषणा हुई थी वह वास्तव में उन्हें मिल जायेगी। इसी को लेकर समुदाय कांग्रेस की हुड्डा सरकार के कार्यकाल से नाराज भी है कि उन्होंनें दस साल तक उन्हें अंधेरे में रखा।

ध्यान देने लायक बात यह है कि जमीन न होने से कुम्हार समुदाय के लिये अपने पुश्तैनी काम को बचाये रखना यानि मिट्टी के बर्तन बनाना मुश्किल हो रहा है एक तो युवा पीढ़ी का रूझान वैसे ही इस ओर कम होता जा रहा है… दूसरा अब मिट्टी के बर्तनों का व्यवसाय भी पहले जैसा नहीं रहा… वहीं कोई अपनी इस परंपरा को बचाते हुए इसमें कुछ रचनात्मकता ला सके तो उसके लिये मिट्टी का होना जरुरी है लेकिन जब जमीन ही नहीं होगी तो मिट्टी कहां से मिलेगी… लगभग हर गांव में शामलात या कहें पंचायती जमीनों पर लोगों ने कब्जे कर रखे हैं। कई-गांवों में तालाबों तक को सूखाकर उनमें मिट्टी डालकर गांव के पानी निकासी के रास्ते तक बंद हो चुके हैं। ऐसे में पांच एकड़ जमीन कुम्हार समुदाय को आबंटित होने की घोषणा को अमलीजामा पहनाना मुश्किल हो सकता है। कई जगह तो मामले अदालतों में विचाराधीन भी हैं।

सरकार द्वारा सभी जिला उपायुक्तों से आवे पंजावे का जमीनी रिकॉर्ड तलब करने का फैसला समुदाय के लिये राहत भरा तो है लेकिन अभी किसी तरह की खुशफहमी पालना आगे चलकर तकलीफदेह हो सकता है।

आवे पंजावे की जमीनों का मिलना क्यों है मुश्किल

सबसे बड़ी मुश्किल जिससे झूझने की हिम्मत जाहिर है पूर्व सरकार न कर पायी हो वह है पंचायती जमीनों पर हो सालों से हो चुके कब्जों से जमीनें मुक्त कराना है। ज्यादातर जमीनें उन्हीं के कब्जे में हैं जिनका दबदबा होता है। सरपंच से लेकर अन्य स्थानीय नेता अपने वोट बैंक के चक्कर में इस आग में हाथ डालने से बचते हैं।

जातीय ध्रुवीकरण का भी लग सकता है आरोप

हाल ही में हरियाणा बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाऊंट से ट्विट कर जानकारी दी थी कि हरियाणा सरकार ने यह निर्णय लिया है कि उन सभी गांवों की गलियों को पक्का किया जायेगा जहां अनुसूचित जाति के लोगों की जनसंख्या 40 प्रतिशत से अधिक है। यानि जहां संख्या कम है वे बेशक कीचड़ में रहें। ये कैसा पैमाना है। विपक्षी दल तो पहले से ही हरियाणा की बीजेपी सरकार पर हरियाणा में जातीय वैमनस्य को बढ़ावा देकर आपसी भाईचारे के माहौल को खराब करने का आरोप लगा रहे हैं। जाट आंदोलन के दौरान बीजेपी नेताओं की कारस्तानी की आलोचना हरियाणा का बुद्धिजीवी तबका भी कर चुका है।

50 साल में कुछ नहीं हुआ अब कुछ तो हो रहा है

कमाल की बात यह भी है कि कुम्हार समाज को इस जमीन का आबंटन पंजाब ग्रामीण आम भूमि (विनियम ) 1964 के तहत देने का प्रावधान है। लेकिन पिछले 50 सालों से अभी तक समाज का संघर्ष रंग नहीं लाया है। सभी पूर्व और मौजूदा विधायको , पूर्व सांसदों से लेकर मौजूद सांसद और पूर्व मुख्यमंत्रियों से लेकर वर्तमान सीएम मनोहर लाल तक से इस मामले की अर्जी लगाने के बाद सरकार ने एक कदम बढ़ाया है यह अच्छी बात है लेकिन  कुम्हार समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता भी यदि व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर अपने अधिकारों के लिये संघर्ष करें तो शायद कुछ खुश होने का वाज़िब कारण मिल जाये अन्यथा अंत में पूर्व सरकार की तरह वर्तमान सरकार के लिये भी भविष्य में इसी तरह के बयान जारी करें। नहीं तब तक गालिब वाला अच्छा खयाल ही इसे समझना समझदारी होगी। वहीं सरकार को भी अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिये कि क्या गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को मिलने वाले 100-100 गज के प्लाट पूरी तरह मुहैया हो चुके हैं।

पूंडरी से संवाददाता कृष्ण प्रजापति की रिपोर्ट – प्रस्तुति जगदीप सिंह

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