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दुर्गा शक्ति के आंसुओं को कमजोरी न समझें

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ साथ में अपना रंग दिखाओ

May 11, 2017 11:22 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-
एक बार फिर दुर्गा शक्ति और लेडी सिंघम कही जाने वाली पुलिस अधिकारी के आंसू झलके हैं। वह भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के गोरखपुर में। एक भाजपा विधायक राधा मोहन अग्रवाल ने सबके बीच पहले तो एसपी चारू निगम से बात ही नहीं की, यह कहकर कि वे एसडीएम से बात कर रहे हैं। फिर जब चारू निगम ने अपना पक्ष रखने की कोशिश की, तब बुरी तरह डांटते हुए बोले कि मुझे नियम न सिखाना तुम। यहां एसडीएम महोदय खड़े हैं, मैं उनके साथ बात कर रहा हूं। मैंने बताया न, बर्दाश्त के बाहर मत होइए। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के बाद बेटी को डांट लगाओगे?
यह कैसी मानसिकता? यह कैसी सोच? चारू उस मौके पर सीनियर अधिकारी थीं और सड़क जाम खुलवाना उन्हीं के कार्य का हिस्सा था। चारू निगम यही कर रही थी। माना कि सड़क जाम एक अच्छे, नेक काम के लिए किया गया था। माना कि महिलाएं शराब का ठेका उठाने के लिए अड़ी थीं, लेकिन जब एसपी को सड़क जाम हटवाने के लिए महिलाओं से झड़प के बाद मजबूर होकर लाठीचार्ज का आदेश देना पड़ा। फिर भी विधायक महोदय ने जिस भाषा में फटकार लगाई, वह तो लाठी चार्ज से भी बड़ी चोट कर गई। चारू निगम के लिए उसके सीनियर अधिकारी साहा ने पहुंचकर उनका पक्ष रखा तो लेडी सिंघम की आंखों से आंसू छलकने लगे। सीनियर अधिकारी के पीठ पीछे चारू निगम साफ आंसू पोंछती दिखाई दे रही हैं। यह घटना अप्रैल माह की है लेकिन लेडी सिंघम ने कल ही फेसबुक पर अपने दर्द और खुशी को साझा किया। चारू निगम ने साफ-साफ लिखा- मेरे आंसुओं को मेरी कमजोरी मत समझना। ट्रेनिंग ने मुझे कमजोर पडऩा नहीं सिखाया है। कठोरता से अश्क छल जाए।
महिला अधिकारी हूं, तुम्हारा गरूर न देख पाएगा
सच्चाई में जोर इतना कि अपना रंग दिखाएगा।
चारू निगम ने गोरखपुर में जो सहा, वही हरियाणा में फतेहाबाद की उस समय की एसपी संगीता कालिया ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के हाथों सहा। जब वे जनपरिवाद समिति की बैठक यह कहकर छोड़कर चले गए थे कि या तो वे जनपरिवाद समिति की बैठक में आएंगे या महिला एसपी। राजनीति जीत गई थी और संगीता कालिया को राई में भेज दिया गया था। संगीता कालिया भी अपने पिता के सपने को पूरा करना चाहती है और चारू निगम भी। इन महिला पुलिस अधिकारियों के जज्बे को यह कैसा जवाब? राजनीति ही क्यों सुनी जाती है? संगीता कालिया की भी अपना पक्ष रखने की कोशिश थी, जिस पर बिगड़ कर अनिल विज बैठक छोड़कर चले गए थे। क्या भाजपा के ये दो उदाहरण यह दिखाने के लिए काफी नहीं कि पुरुष मानसिकता में बदलाव की कितनी जरूरत है? चारू निगम ने इसी बात की ओर इशारा करते  हुए तो लिखा है कि महिला अधिकारी हूं, तुम्हारा गरूर न देख पाएगा…
उत्तर प्रदेश के एक उपमंडल की एसडीएम नागपाल को भी आधे घंटे के भीतर सपा नेता ने निलंबित करवा दिया है। आखिर नागपाल दंपत्ति, उस समय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से माफी मांगने गए थे, तब जाकर बहाली हुई। देश की पहली आईपीएस अधिकार किरण बेदी को भी दिल्ली की कमिश्नर बनाने से कांग्रेस ने उन्हें उपेक्षित किया। कब दुर्गा शक्ति के आंसू उसकी ताकत बनेंगे?
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