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लता दीदी, आपने शुभ पहल की…

September 25, 2016 6:58 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्मदिन 28 सितंबर को आ रहा है । पर वे उरी आर्मी कैंप हुए हमले से बुरी तरह आहत हैं। इसमें 18 जवानों ने देश के लिए अपने प्राण अर्पित कर दिए थे। बच्चे बच्चे को याद है कि सन् 1962 में चीन के खिलाफ हुए युद्ध के बाद जब दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मौजूदगी में कवि प्रदीप द्वारा लिखित गाना “ऐ मेरे वतन के लोगो, जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी,  इतने भावुक स्वर में गाया कि प्रधानमंत्री नेहरू समेत उस समय मौजूद हर शख्स की आंखें नम हुए बिना न रह सकीं। हर हिंदुस्तानी रो दिया। लता दीदी ने यह गाना गाया नहीं, बल्कि पूरी तरह जीया है।

अब कश्मीर के उरी आर्मी कैंप ऑफिस पर,  आतंकवादियों के हमले के बाद स्वर साम्राज्ञी लता दीदी ने अपना जन्मदिन न मनाने का फैसला किया है । उन्होंने देशवासियों को ‘जरा याद करो कुर्बानी’ की याद करने की अपील की है । इससे भी आगे बढ कर लता मंगेशकर ने यह अपील भी की है कि जो गिफ्ट आप मुझे देना चाहते हैं, उतनी ही धनराशि आर्मी वेलफेयर फंड में डाल दें ।

लता मंगेशकर ने ट्वीट किया कि हमारे देश के जवान जो देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में पीछे नहीं रहते, उन्हीं की वजह से हम सुरक्षित हैं। हमारा भी कर्त्तव्य है कि हम उनके लिए अपनी तरफ से जो कुछ हो सके जरूर करें। मैं अपने तरफ से कुछ वीर जवानों के लिए आर्मी वेलफेयर फंड में कुछ राशि अर्पित कर रही हूं। लता दीदी ने अपनी ओर से इस शुभ पहल के बाद अपील की है कि मेरे ऊपर आपका अहसान होगा अगर आप भी यथाशक्ति से इस कार्य में अपना योगदान देंगे ।

इस भावुक अपील से एक बात बिल्कुल साफ है कि लता दीदी ने 1962 में गाए अपने गीत को पूरी तरह सार्थक कर दिखाया है। यह संदेश भी दिया है कि शहीदों के परिवारों के लिए धनराशि अर्पित करें। यह सही भावना है जन्मदिन मनाने की ।यह भावना महात्मा गांधी के प्रिय भजन की याद दिलाती है

वैष्णव जन ते तैने रे कहिए

पीर पराई जाने रे…

लता मंगेशकर ने वीर जवानों के परिवारजनों के दर्द को दिल की गहराइयों से महसूस किया है । सिर्फ सरकारें ही नहीं, आम आदमी और बड़े कार्पोरेट घराने भी अपना दिल खोलें । खिलाड़ियों को प्रदर्शन पर करोड़ों रूपये और बीएमडब्ल्यू कारें भी, अच्छी बात है लेकिन शहीद की पत्नी को मात्र पांच लाख रूपये का चैक ? शहीद अशोक सिंह की पत्नी संगीता सिंह को मंत्री महोदय व बिहार सरकार को बताना पडा कि उनका पति देश की सीमा पर शहीद हुआ है, न कि किसी नाले में शराब पीने मरा है। जहरीली शराब पीकर मरने वाले को चार लाख और शहीद को पांच लाख ?  नहीं , हमारा बिहार इतना गंदा नहीं है । हम यह चेक लेकर बिहार की तौहीन नहीं होने देंगे , तब जाकर संगीता सिंह को ग्यारह लाख रुपये मिले। खिलाडियों को लें, पर शहीद परिवारों को भी भुलाएं नहीं। खिलाड़ी जीतकर तिरंगा फहराते हैं और सेना के जवान तिरंगे को थामे रखते हैं,  मरते दम तक।

इसलिए,  लता मंगेशकर की अपील सुनिए और उनके जन्मदिन पर शहीदों के परिवारजनों के लिए खुलकर धनराशि अर्पित करें । बस, जरा याद करो कुर्बानी । जयहिंद ।

लेखक परिचय

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लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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