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JNU ELECTION – क्या सन्देश छोड़ गए कन्हैया

September 11, 2016 12:49 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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शुक्रवार को जेएनयू में हुए छात्रसंघ के चुनावों का परिणाम घोषित हो चुका है। बता दें कि इन चुनावों में सेंट्रल पैनल की चारों सीटों पर एसएफआई और एआईएसए का कब्जा रहा है। एआईएसए के मोहित पांडे ने अध्यक्ष पर जीत दर्ज की है तो वहीं अमल पीपी इसके उपाध्यक्ष होंगे। वहीं शतरूपा चक्रवर्ती महासचिव एवं तबरेज हसन संयुक्त सचिव होंगे।

इस बार हुआ गठबंधन

सामान्यतः देखा जाता है कि एसएफआई और एआईएसए दोनों अलग-अलग अपने उम्मीद्वार मैदान में उतारते हैं जबकि इस बार दोनों ने गठबंधन किया और संयुक्त रूप से अपने प्रत्याक्षी मैदान में उतारे। जानकारी के लिए बता दें कि इस बार 59 फीसदी मतदान हुआ जो कि पिछले साल की तुलना में 6 फीसदी अधिक है।

कन्हैया का कार्यकाल समाप्त

वहीं इन चुनावों के साथ-साथ छात्रसंघ अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार का कार्यकाल भी पूरा हो गया, जो कि 9 फरवरी को जेएनयू में हुई घटना के बाद काफी चर्चा में रहे। वहीं शुक्रवार को अपने कार्यकाल पूरा होने के बाद कन्हैया ने सोशल मीडिया पर एक पत्रनुमा पोस्ट भी डाली जिसमें उन्होनें अपने समय के तमाम छात्रों, शुभचिंतकों और शिक्षकों को शुक्रिया कहा है।

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क्या लिखा कन्हैया ने अपनी पोस्ट में

साथियों,

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी से मुक्त होने के मौके पर अपने लोगों को शुक्रिया कहना बड़ा अजीब लग रहा है लेकिन पता नहीं क्यों बार-बार उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का मन कर रहा है जो संघर्ष के हर मुकाम पर किसी न किसी रूप में मेरे साथ खड़े रहे। जेएनयू के विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, पूर्व विद्यार्थियों और कैंपस के बाहर के तमाम शुभचिंतकों का शुक्रिया जो समाज में समानता, न्याय व लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए समाज को पीछे धकेलने वाली ताकतों के विरुद्ध जेएनयू छात्रसंघ के संघर्ष #StandWithJNU में शामिल हुए। जेएनयू और इसके छात्रसंघ को बदनाम और बर्बाद करने की हरसंभव कोशिश के दौर में आप जैसे साथियों ने उन्हें यह बता दिया कि जेएनयू जिस जनवादी सोच के साथ हमेशा से खड़ा रहता आया है उसकी ताकत तमाम दंगाइयों और षड्यंत्रकारियों की ताकत से कई गुना ज़्यादा है।

मुझे याद आ रहा है कि छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद मैंने विक्ट्री मार्च (विजय जुलूस) नहीं बल्कि यूनिटी मार्च निकाला था, क्योंकि मैं और मेरा संगठन हमेशा ही यूनिटी के पक्ष में खड़े हुए हैं, और मेरे पूरे कार्यकाल में मुझे उन तमाम लोगों का सहयोग मिला जो कई मसलों पर मुझसे वैचारिक तौर पर असहमत हैं। मेरे कार्यकाल में सबसे पहला विरोध प्रदर्शन एफ़टीआईआई के संघर्षरत साथियों के समर्थन में हुआ था और पूरे साल देश के तमाम कैंपसों में सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के विरुद्ध उठ रही आवाज़ों के पक्ष में जेएनयू छात्रसंघ ने अपनी आवाज़ बुलंद की और 9 फरवरी के बाद इन सभी कैंपसों में #StandWithJNU की आवाज़ गूँजी। चाहे छात्रवृत्ति को बचाने के लिए ऑक्यूपाई यूजीसी का आंदोलन हो या रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के दोषियों को सज़ा दिलाने का संघर्ष, या दादरी और ऊना में हुए अत्याचार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन, हर मौके पर आप सभी लोगों का जो सहयोग मिला उसके लिए शुक्रिया। हम जिशा और डेल्टा को न्याय दिलाने के लिए भी लड़े और आंबेडकर भवन को गिराने की साज़िशों के ख़िलाफ़ भी। कैंपस में लाइब्रेरी में बेहतर सुविधाओं के लिए भी संघर्ष किया और बलात्कारी छात्र को सजा दिलवाने के लिए भी।

जिन लोगो ने मुझे वोट देकर इस पद के काबिल समझा, उन सबका शुक्रिया। तहे दिल से उन लोगों का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जिन्होंने मुझे वोट नहीं दिया और शायद वे मेरी राजनीतिक विचारधारा से पूरी तरह सहमत भी नहीं थे, लेकिन जो मेरी बोलने की आज़ादी के समर्थन में बहुत बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। मैं जानता हूँ कि वे कन्हैया कुमार के लिए नहीं बल्कि अपने निर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष के लिए सड़कों पर उतरे थे। शुक्रिया उन सभी शिक्षकों का जो तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए जेएनयू छात्रसंघ के साथ खड़े रहे, जिन्होंने कहा कि “कन्हैया जब पुलिस रिमांड से अदालत में आएगा तो वहाँ उसे सबसे पहले अपने समर्थन में खड़े शिक्षकों के चेहरे दिखेंगे” और संघर्ष के हर मोड़ पर उन्होंने हर तरह की मदद इस आंदोलन में की। उन सभी कर्मचारियों को भी मेरा आभार जो हमारे इस संघर्ष में शामिल हुए ।

शुक्रिया उन सभी लोगों का जिन्होंने मेरे समर्थन में लेख और फ़ेसबुक पोस्ट लिखे और जिनके लिए ना जाने कितनी गालियाँ उन्हें मुझे देशद्रोही समझने वाले और संघी मानसिकता वाले लोगों से खानी पड़ी; जो मेरे और अन्य साथियों के संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में अपने घरवालों, मित्रों और देश के अन्य नागरिकों से तार्किक बहस करने में कभी पीछे नहीं रहे। आप हैं तो लोकतंत्र है। आज़ादी चौक पर हर दिन बड़ी संख्या में पहुँचकर प्रशासन के अन्याय के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले साथियों का भी आभारी हूँ। जेएनयू का पक्ष लोगों के सामने रखने के लिए की गई देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राओ में जिन लोगों ने हौसला बढ़ाया उनका भी शुक्रिया। मुझे इस बात का अहसास है कि मैं चुनाव से पहले आप लोगों से किए गए अपने कई वादे पूरे नहीं कर पाया, लेकिन जेएनयू पर इस तरह के अप्रत्याशित हमले के दौर में और मौजूदा राजनीतिक हालात में अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने का हरसंभव प्रयास मैंने किया है। मुझे याद आता है कि जेल से लौटकर आने के बाद आपको संबोधित करते हुए जब मैंने पहला शब्द कहा – ‘साथियों’ और जिस उत्साह के साथ आप सबने मेरा हौसला बढ़ाया, यह उत्साह और समर्थन ही पूरे संघर्ष के दौरान मेरी ऊर्जा बना रहा।

पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था पर जिस तरह का हमला सरकार और नवउदारवादी ताकतें कर रही हैं, समाज के वंचित वर्गों, दलितों, महिलाओं, पिछडों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जिस तरह से बढ़ा है, मुझे उम्मीद है कि नई चुनकर आने वाली यूनियन उसके विरुद्ध संघर्ष की मशाल को बुझने नहीं देगी। कैंपस में छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए की गई कोशिशों को आगे ले जाया जाएगा और बेहतर सुविधाओं और छात्रवृत्ति के लिए संघर्ष को जारी रखा जाएगा। मैं जेएनयू की जनवादी सोच के पक्ष में हमेशा खड़ा रहूँगा। रोहित एक्ट को लागू करने की लड़ाई हो या कैंपस लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए लिंगदोह सिफ़ारिशों के विरुद्ध संघर्ष; समाज में वंचित लोगो के हक को सुनिश्चित करने की लड़ाई हो या सांप्रदायिक फासीवादी ताकतों के विरुद्ध और श्रम की लूट के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने के प्रयास; सबको शिक्षा, सबको काम सुनिश्चित करने के लिए और समाज में समानता व न्याय स्थापित करने के संघर्ष के हर मोर्चे पर आप मुझे अपने साथ पाएँगे, यह मेरा वादा है।

कन्हैया कुमार,

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष (2015-16)

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Friends and Comrades!

My tenure as JNUSU President is over now. Though it feels quite strange to say thanks to the people whom you believe to be yours, yet I constantly feel like expressing my gratitude to all those people who stood with us at every step of our struggle in every way possible. I express my gratefulness to the students, teachers, workers and alumni of JNU and all the other people from outside the campus who stood for ensuring equality, justice and democracy against the dogmatic forces which attempted to pull the society towards backwardness; during the #StandWithJNU movement led by JNUSU. During this entire period when all sorts of efforts were made to malign and destroy the image and spirit of JNU and JNUSU, all of you together made sure to prove again that the strength of people-oriented ideology which JNU supports since its origin, is much more powerful than the onslaughts of these rioters and conspirators.

I can recall that after winning the mandate of JNU students as their President, I gave a call for a ‘Unity March’ instead of a ‘Victory March’ because both my organization and me have always stood for unity; and during my entire tenure I also received support from all those who do not agree with my political ideology over various issues. The first protest organized after my election as the President stood up in solidarity with the struggle by FTII students, which was followed by JNUSU’s support in all the struggles to resist communal and fascist forces at various campuses across the country. And all these voices came up in favor of the #StandWithJNU movement at these campuses after the 9th February incident. I thank you for standing up with us at each and every step- whether it was the #OccupyUGC movement to restore our fellowships or it was the movement that stood up after the institutional murder of Rohith Vemula and to fight for #JusticeForRohith, or it was the protests against the atrocities on minorities at Dadri and Una. We fought for #JusticeForJisha and #JusticeForDelta as well as against the conspiracy to demolish the Ambedkar Bhawan. In the campus as well we fought for better facilities in the library and raised our voices against the incident of rape and sexual violence.

The people who voted for me during the elections, I thank you all for showing confidence in my ideology and me. And I am also equally grateful to all those who didn’t give their vote to me, yet they came out on the streets of the country to defend my freedom of speech and expression and my right to dissent. I know that it wasn’t Kanhaiya Kumar for whom they raised their voices; rather it was their Union’s elected President. I also thank all the teachers who stood with us shoulder-to-shoulder despite having to face a lot of problems; and fearlessly said that “When Kanhaiya will be brought to the Court from Police remand, the first faces he will see standing in his support will be that of his teachers.” They have supported us in all ways possible and at all stages of the struggle. Moreover, I want to express my gratitude to all those workers who took part in our struggle and gave us strength.

I sincerely thank all those supporters who wrote articles and Facebook posts in my defense and by doing so made themselves targets to abuses of Sanghis and all those who were made to believe that I was ‘Anti-national’; and all those who never left their positions in defense of the constitutional rights of me and my fellow activists, even if they had to debate with their own family and friends along with the other citizens. You are the pillars that uphold Democracy! I am also thankful to all those supporters who gathered at the Azadi Chowk everyday in solidarity with our struggle against injustice by the administration as well. And I thank all those people who met me during my visits across the different parts of the country and supported JNU’s struggle against state repression.

I realize it very well that I was unable to fulfill all the promises I made to you before the elections; but during this entire period of unprecedented attacks on JNU and under the given current political situations, I have tried to the best of my abilities to fulfill all the responsibilities of the JNUSU President. I still remember that while addressing you all at the Azadi Chowk after I returned from the prison, it was the applause I received at my first word – ‘Sathiyon!,’ which still gives me the strength and energy during each step of this struggle.

I believe that the Union that is going to be elected will not let the fire of this struggle die out and will continue to fight against the ways in which the state and the neo-liberal forces have been attacking the education system and the ways in which atrocities have increased manifold on the deprived sections of the society including Dalits, women, OBC’s, Adivasis and minorities. The efforts to address the various problems of the student community will be further intensified in the campus and the struggle to ensure better facilities and fellowships will be carried forward. I will always believe in and stand by the Progressive ideologies of JNU, whether it is the struggle to enact #RohithAct, or the fight against the Lyngdoh Committee Recommendations to strengthen the democratic ethos of this campus; whether it is the struggle to ensure the rights of the deprived sections of the society, or it is the fight against communal fascist forces and the exploitation of the labor-class; whether it is to struggle to ensure education and employment for all, or it is the fight to establish equality and justice in the society – you will find me standing with you at every stage. This is my promise to you.

Kanhaiya Kumar

JNUSU President (2015-16)

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