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महेंद्र कपूर की आवाज और हरियाणवी फिल्में

September 26, 2016 3:29 pm by: Category: खबर खास, शख्सियत खास Leave a comment A+ / A-

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कुछ आवाजें कुछ कलाकारों को अमर कर देती है, या कहें कि कुछ कलाकार अपनी आवाज देकर शब्दों या गीतों को अमर कर देते हैं, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। 9 जनवरी 1934 को अमृतसर में जन्में महेन्द्र कपूर भी एक ऐसा ही नाम है जिनकी आवाज की चमक कभी फीकी नहीं पड़ सकती । वे अपनी आवाज की रोशनी से संगीत की दुनिया को आज भी रौशन किये हुए हैं।

देशभक्ति गानों में कपूर साहब

बताया जाता है कि उनकी आवाज में एक फोक जॉन था यही कारण था कि उनके गाए गीत आज भी लोगों के बेहद करीब है। उनकी आवाज में वो बात थी, जो लोगों गावों, खेतों, घरों और चूल्हों तक ले जाती थी। मनोज कुमार की फिल्म उपकार का मेरे देश की धरती, पूरब और पश्चिम का ‘भारत का रहने वाला हूं’ जैसे गीतों को सुनकर लगता है कि जैसे ये गीत उन्हीं के लिए ही लिखे गए हों।

अपनी पहचान कायम करना

मोहम्मद रफी, तलत महमूद, मुकेश, किशोर कुमार, हेमंत कुमार जैसे गायकों के चर्चित में भी अपनी पहचान दर्ज करवाना उनके लिए अहम बात थी। क्योंकि वो एक ऐसा दौर था जब लोग रफी और किशोर दा के अलावा कोई तीसरी आवाज ज्यादा सुनना पसंद नहीं करते थे।

हरियाणा के संदर्भ में महेंद्र कपूर

हरियाणा के संदर्भ में उनके कामों पर एक नजर डालें तो पहले ही फिल्मी कदमों पर उनके निशान मिलते हैं । 1973 में आई पहली हरियाणवी ब्लैक एंड़ व्हाइट फिल्म – बीरा शेरा – के सात गीतों में से तीन गीत उन्होने गाए । अगले ही साल 1974 में आई पहली रंगीन हरियाणवी फिल्म – चौधरी हरफूल सिंह , जाट जुलानी वाला – के पांच गीतों में से तीन गीत भी उन्ही ने गाए । इस फिल्म का थीम साँग भी उन्ही की आवाज में था ।

हरियाणवी फिल्म – पनघट – का यह मार्मिक गीत – साथ रहणीये संग के साथी दया मेरे पै फेर दियो – मूल रुप से फौजी मेहर सिंह की एक रागनी है , जिसे महेन्द्र कपूर जी ने अपनी आवाज देकर यादगार बना दिया । बीरा शेरा और चौधरी हरफूल सिंह , जाट जुलानी वाला के अलावा – घूंघट की फटकार , फागण आया रे , यारी , पनघट , भंवर चमेली, म्हारा पीहर सासरा , जनेत्ती – उनके गीतों से सजी कुछ हरियाणवी फिल्में हैं।

1968 में आई फिल्म उपकार के गीत ‘मेरे देश की धरती’ के उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, 1963  की गुमराह के गीत ‘चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाए हम दोनों’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इसके अलावा भी पदमश्री, महाराष्ट्र सरकार का लतामंगेश्कर अवार्ड जैसे कई सम्मान हासिल हैं

अपनी मधुर आवाज से कई फिल्मों को रोशन करने वाला ये सितारा 27 सितम्बर 2008 को दिल का दौरा पड़ने से सदा-सदा के लिए इस दुनिया से चला गया। मगर इनकी दी हुई आवाज आज भी लोगों के दिलों में इन्हें जिंदा किए हुए हैं।

पत्रकार एवं लेखक रोशन वर्मा द्वारा उपलब्ध जानकारी पर आधारित  

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