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महिला दिवस पर बहे महिला मंत्री के आंसू: ये किस बात पे रोना आया

मेरी मंशा गलत नहीं थी, मंत्री वैसे ही बुरा मान गई, मंत्री चाहती तो मुझे जवाब दे सकती थी - गीता भुक्कल

March 9, 2017 10:57 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

geeta bhukkal coment on minister kavita jain

आओ हजूर, आपको बहारों में ले चलूं

दिल झूम जाए, ऐसी बहारों में ले चलू

पर मैं तो आपको बहारों में नहीं, हरियाणा की विधानसभा में ले जा रहा हूं। जहां महिला दिवस मनाया नहीं गया, लेकिन महिलाओं ने एक दूसरे को रूलाया। बात महिला दिवस ना मनाए जाने की हो रही थी। मंत्री कविता जैन ने कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल को बताया कि बजट सत्र होने के कारण महिला दिवस पर समारोह आयोजित नहीं किया गया। इस की सूुचना मीडिया के माध्यम से दी गई। इस पर गीता भुक्कल ने कह दिया कि आप को क्या मालूम, क्यों कि आपके पति ही आपकी फाईलें निपटाते हैं। बस, इतनी सी बात, एक तीर की तरह ऐसे निशाने पर लगी कि भाजपा विधायक विरोध में सीटों पर उठ खड़े हुए, जबकि कविता जैन के आंसू निकल आएं। भाजपा विधायकों ने गीता भुक्कल पर माफी मांगने का दबाव बनाया, लेकिन गीता ने माफी नहीं मांगी। इस पर सदन मेंं उसके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया गया। गीता भुक्कल को अपनी पूरी बात भी रखनी नहीं दी गई। उन्होंने बाद में कहा कि मेरी मंशा गलत नहीं थी। मंत्री वैसे ही बुरा मान गई। जैसे पंचायतों में सरपंच और निकायों में पार्षद पति का दखल रहता है, मैं तो उसी का उदाहरण देना चाहती थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को खूब सशक्त होना चाहिए। इसमें रोने जैसी कोई बात नहीं थी। मंत्री चाहती तो मुझे जवाब दे सकती थी।

                बाद में हरियाणा एमएलए होस्टल में कांग्रेस के दस विधायकों ने भी विधानसभा के बाद एक निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि महिला दिवस के अवसर पर एक दलित महिला विधायक को ना केवल सदन में अपनी बात रखने दी, बल्कि निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। यह कैसा सम्मान है महिला दिवस पर?

                इसी बीच एक ओर रौचक मामला सदन में हुआ। कांग्रेस विधायक सकुंतला खटक ने कहा कि हमारी बहन संतोष संतोष सारवान मेरे पास बातचीत के दौरान रो रही थी। वह कह रही थी कि सरकार में हमारी सुनवाई नहीं होती। संतोष सारवान मुलाना से भाजपा विधायक हैं और खट्टर विरोधी विधायकों में शामिल हैं। खटक को जवाब देते  संतोष सारवान ने कहा कि मैं रोती थी, रूलाती हूं। इस पर पूर्व स्पीकर कलदीप शर्मा ने कहा कि आप ने ठीक कहा बहनजी, आपने तो पूरी सरकार को रूलाया हुआ है।

                बजट सत्र में महिला दिवस पर स्पीकर कंवलपाल गुर्जर ने अपनी जगह डिप्टी स्पीकर संतोष यादव को अध्यक्षता करने का अवसर दिया। यह एक अच्छी शुरूआत थी, लेकिन गीता भुक्कल और कविता जैन के विवाद ने महिला दिवस पर निंदा प्रस्ताव ही पारित करवा दिए। एक सदन में, दूसरा एमएलए हास्टल में। कांग्रेस विधायक दल की न ेता किरण चौधरी ने अपनी ताकत दिखाने में कसर नहीं छोड़ी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा का नाम ही वक्ताओं की सूची में नहीं दिया। हालांकि हुड्डा ने मीडिया से कहा कि वे जानते हैं कि बीन कहा बजानी है। हुड्डा ने सरकार से आर्थिक स्थिती पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों ने कर्ज दोगुना कर दिया है। यह तो कर्ज लेकर घी पीने जैसी बात हो गइ्र। सबसे दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा के बाहर अभय चौटाला ने किसानों की हालत के बारे में सरकार केा ध्यान आकर्षित करने के लिए आलू के कट्टे रखे। एक बैनर भी लगाया जिस पर लिखा था- ना कंठा, ना बट्टा, पचास रूपए का कट्टा। आपको महिला दिवस पर हुआ हंगामा भूल जाएगा पर गीता भुक्कल और कविता जैन इसे शायद ही भूल जाए।

बाकि रोने का क्या है साहिर कहते हैं

कभी ख़ुद पे, कभी हालात पर रोना आया

बात निकली, तो हर इक बात पे रोना आया

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

 

महिला दिवस पर बहे महिला मंत्री के आंसू: ये किस बात पे रोना आया Reviewed by on . आओ हजूर, आपको बहारों में ले चलूं दिल झूम जाए, ऐसी बहारों में ले चलू पर मैं तो आपको बहारों में नहीं, हरियाणा की विधानसभा में ले जा रहा हूं। जहां महिला दिवस मनाया आओ हजूर, आपको बहारों में ले चलूं दिल झूम जाए, ऐसी बहारों में ले चलू पर मैं तो आपको बहारों में नहीं, हरियाणा की विधानसभा में ले जा रहा हूं। जहां महिला दिवस मनाया Rating: 0

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