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मेरीकॉम का खत, देश के बेटों के नाम

October 11, 2016 10:38 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

mary kom ka khat

कुछ दिन पहले ही बिग बी अमिताभ बच्चन ने अपनी नातिन नव्या नवेली  व पौत्री आराध्या के बहाने देश की बेटियों के नाम ट्विटर पर एक खत लिखा था। अब लगता है कि चिट्ठियां लिखने का लौट आया है जमाना। यह अलग बात है कि अब पुराने दिनों की तरह ‘डाकिया डाक लाया, खुशी का पैगाम लाया’ की आवाज नहीं लगती और न ही ‘मेरे ढोल दी चिट्ठी ते नई आई, देखीं भाई डाक वालेया’ भी सुनने को नहीं मिलता। इस पेपरलेस सोसायटी में खत भी ट्विटर पर लिखे जाते हैं और कुछ महत्वपूर्ण खत या संदेश चर्चा का विषय बनते हैं। बिग बी ने देश की बेटियों को नसीहत दी थी तो बॉक्सर और राज्यसभा सांसद मेरीकॉम ने अपने बेटों के नाम खत लिखा है। देखा जाए तो दोनों खतों में महिलाओं, युवतियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गयी हैं। बिग बी ने युवतियों को अपने मन के सपनों को साकार करने के लिए दूसरों से ज्यादा अपने मन की बात सुनने की सलाह दी तो अब मेरीकॉम ने अपने बेटों के नाम लिखे खत को एक प्रकार से देश के बेटों के नाम लिख कर न केवल लड़कियों से हो रहे दुष्कर्म के प्रति गहरी चिंता जाहिर करते हुए, आगे बढक़र इसे रोकने का आह्वान किया है। मेरीकॉम ने महिलाओं से रोज होने वाली यौन हिंसा व जहां-तहां मौका मिलने पर युवतियों से छेडख़ानी की घटनाओं पर अपने बेटों को जागरुक कर कहा है कि जब कभी तुम किसी महिला के साथ छेडख़ानी होते हुए देखना तो तुम उस महिला की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाना।

हालांकि मेरीकॉम पर उन्हीं के नाम से फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें प्रियंका चोपड़ा ने उनकी भूमिका निभाई थी। फिर भी वे एक संकेत करती हैं कि रोड पर चलता हुआ हर व्यक्ति मुझे पहचान नहीं सकता। जैसा धोनी और विराट को पहचानते हैं, लेकिन मैं तो यह भी डिजर्व नहीं करती कि कोई मुझे नाटी और चपटी होने के कारण ‘चिंकी’ कहे। मेरीकॉम ने यह बताने में भी संकोच नहीं किया कि मेरे बेटो, आपकी मां भी छेड़छाड़ का शिकार हुई थी। वो भी तीन-तीन बार। सत्रह साल की थी जब मणिपुर मेरे अपने गृह राज्य में मेरे साथ छेडख़ानी हुई। फिर मेरे दोस्तों के साथ दिल्ली और हरियाणा में भी इस तरह की घटनाओं से जूझना पड़ा। बेशक मेरीकॉम ने रिक्शा पर जाते समय छेडख़ानी का शिकार होने पर चप्पल उतार लिया और मनचले का पीछा किया पर वह भाग निकला। इस तरह कराटे व बॉक्सिंग भी किसी काम नहीं आई। प्रिय पाठक, मेरीकॉम ने हरियाणा के हिसार स्थित स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी साई केंद्र में बॉक्सिंग का प्रशिक्षण शिविर लगाया था।

मेरीकॉम के तीन बेटे हैं। इनमें से नौ साल के जुड़वां और तीन साल का बेटा शामिल हैं। जाहिर है कि वे ये खत पढक़र भी अभी इसके गहरे अर्थों को नहीं सकते। लेकिन मेरीकॉम ने देश भर में होने वाली यौन हिंसा व दुष्कर्म की घिनौनी घटनाओं के विरुद्ध आवाज उठाते लिखा है कि मैं लोगों को जागरूक करूंगी। यह दुनिया उतनी ही महिलाओं की है, जितनी मर्दों की। मेरीकॉम लिखती हैं कि मुझे समझ नहीं आता कि किसी महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ छूने से मर्दों को क्या मिलता है?

मेरीकॉम लिखती हैं कि अब मैं 33 साल की हूं। लोग एक मेडलिस्ट के तौर पर मेरी तारीफ करते हैं लेकिन मैं चाहती हूं कि एक औरत के तौर पर भी मेरा उतना ही सम्मान हो। नवरात्रों में नारी के शक्तिरूपा नौ रूपों की पूजा की जाती है। ऐसे में मेरीकॉम का खत बहुत मायने रखता है। आज तो ऐसा भी समाचार बहुत हृदय विदारक है कि बिजनेस में फायदे के लिए एक पिता मात्र तेरह वर्षीय बेटी आराध्या से 68 दिन तक उपवास करवाता है, जिससे वह उसके जीवन की अंतिम साधना साबित होती है। राजेंद्र यादव की प्रसिद्ध कहानी ‘जहां कैद है’ सहज ही मन में बिजली की तरह चमक उठती है।

नवरात्रों पर जहां मेरीकॉम का खत जागरुक करता है, वहीं आराधना की अंतिम साधना दिल को अंदर तक हिला कर रख देने वाली है। जयशंकर प्रसाद के शब्दों में:-

नारी, तुम केवल श्रद्धा हो…

काश! इस पर सबको विश्वास हो।।

-कमलेश  भारतीय (लेखक हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं।)

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