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Menstrual Hygiene – ये कोटेक्स क्या है?

टेलीविजन में कोटेक्स का विज्ञापन देख कर मेरे अंकल ने मेरी माँ से पूछा, ये कोटेक्स क्या है? यह कहते हुए वो मुस्कुराई। तो मैंने जिज्ञासावंश पूछा 'तुम्हें पता है ये क्या है?

June 13, 2017 11:00 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

सारी दुनिया ख़ासकर महिला अधिकारों पर काम करने वाली संस्थाएं जब इस समय को माहवारी स्वच्छता दिवस के रूप में मना रही हैं। इसने मुझे भी अपनी जिंदगी के अनुभवों का सांझा करने के लिए प्रेरित किया।

बात तब की है जब मैं सातवीं कक्षा में पढ़ती थी, एक दिन हम स्कूल में गपशप कर रहे थे तो मेरी एक सहेली ने  कहा “तुम्हे पता है कल शाम टेलीविजन में कोटेक्स का विज्ञापन देख कर मेरे अंकल ने मेरी माँ से पूछा, ये कोटेक्स क्या है? यह कहते हुए वो मुस्कुराई। तो मैंने जिज्ञासावंश पूछा ‘तुम्हें पता है ये क्या है? उसने जवाब दिया-हाँ। बुद्धू  तुमको इतना भी नही पता। ‘यह सैनिटरी पैड है। इसको माहवारी (पीरियड्स) के दौरान इस्तेमाल करते हैं’, उसने थोड़ा विस्तार से बताया। अभी तक हमारे घर की सभी महिलाएं माहवारी के समय पुराने कपडों का इस्तेमाल करती थी। और हर महीने उसी कपड़े को धो के दोबारा इस्तेमाल करते। इस जानकारी के बाद मैं कोटेक्स ख़रीदने  के लिए अपने जेब खर्च में से पैसे जमा करने लगी। क्योंकि मैं ये जानना चाहती थी कि क्या सच मे ऐसा कुछ होता है या वो मुझे बेवकूफ़ बना रही है। अब तक मुझे सिखाया गया था कि ये सिर्फ महिलाओं के बीच की बात है पुरुषों के सामने इस बारे में बात करना वर्जित है। और ये बहुत गंदा होता है इसलिए पुराने कपड़े इस्तेमाल करते हैं जो घर मे नही रखते बल्कि जूते चप्पल की जगह  या छत के किसी कोने में थैले में छिपा कर रखते हैं। ख़ासकर ऐसी जगह जहां पुरुष देख न पायें। चार दिन बाद मैं कोटेक्स ख़रीदने के लिए 20 रुपये जमा कर चुकी थी। परन्तु ख़रीद नही पा रही थी क्योंकि मुझे कोई ऐसी दवॉई की दुकान नही मिली जहाँ कोई महिला दुकानदार हो। फिर मैंने अपनी परेशानी अपनी सहेली को बताई। उसने मुझे बताया कि ये तो हमारे स्कूल की किताबों की दुकान पर भी मिलता है। फिर हम लंच का इंतजार करने लगे। जैसे ही घण्टी बजी हम उस दुकान की तरफ दौड़े पर निराशा हाथ लगी क्योंकि वहाँ पहले से ही लड़के और लड़कियों की भीड़ जमा थी। तो हम दोनों एक कोने में सट कर खड़े हो गए और उन सबके जाने का इंतजार करने लगे, क्योंकि हमें जो चाहिये था हम ज़ोर से बोल के नही कह सकते थे। जैसे ही आधी छुट्टी खत्म हुई और सब लोग एक एक करके चले गए तो हम आंटी को बताए कि हमे क्या चाहिए। खतरा अभी टला नही था क्योंकि हमारे एक अध्यापक तभी वहां आ धमके और हमे डाँट कर कक्षा में भेजने लगे। हमने जवाब दिया कि सामान लेकर जा रहें हैं उन्होंने कहा जो भी लेना है मेरे सामने जल्दी लो और भागो। फिर क्या था हमारी तो सांस गले मे अटक गई। जैसे-तैसे दुकानदार आंटी ने मोर्चा संभाला और कहा सर मैं दे कर भेज रही हूँ आप निश्चिन्त हो कर जाए।

आखिरकार मैंने कोटेक्स ख़रीद ही लिया और घर जाकर छिपा दिया। अब अगली चुनौती मेरे सामने थी क्योंकि मुझे यह इस्तेमाल करना नही आता था। और अब मैं  अपनी सहेली से भी नही पूछना चाहती थी।

लगभग 6 महीने तक मैंने उसको अंडरगारमैंट में ऐसे ही रख के इस्तेमाल किया फिर एक दिन जब घर मे कोई नही था, मैंने दिन के उजाले में सैनिटरी पैड को ध्यान से देखा तो पैड के एक तरफ मुझे चिपकने वाला हिस्सा दिखा। अब मै उसका इस्तेमाल ठीक से करने लगी। जिसका मुझे माहवारी के दिनों में फायदा मिला। और अब गीलेपन, खुजली, गीले कपड़े से  छील जाना और इस दौरान बाहर जाने के डर की समस्या ख़त्म हुई।  इस दिन तक पहुंचने के लिए मैंने लंबा सफर तय किया था जो मैंने अपनी बड़ी बहन से सांझा किया। और एक साल बाद अपनी छोटी बहन से भी जब उसकी माहवारी शुरू हुई। इस तरह हम तीनों बहनो को इन ख़ास दिनों में कपड़े के इस्तेमाल से आज़ादी मिली। पर अभी भी हमारे जेब खर्च का एक हिस्सा कोटेक्स ख़रीदने में जाता था ।

जब मेरी माँ को इस बारे में पता चला तो वो बहुत चिल्लाई और बोला कि ये सिर्फ पैसे की बर्बादी है। हमने तो हमेशा कपड़ा ही इस्तेमाल किया है और कोई परेशानी भी नही हुई चार बच्चों को जन्म दिया है।आजकल लोग बाजार में पैसा कमाने के लिए जाने क्या-क्या बनाते हैं।  हमारे घर और आस पड़ोस में सभी महिलाएं कपड़े का ही इस्तेमाल करती हैं

फिर बारिश के मौसम में एक दिन उनके पास सूखा कपड़ा नही था। क्योंकि वो हमेशा छत के किसी कोने में रखती थी जो बारिश में भीग चुका था। फिर उन्होंने हमसे पूछा कि तुम्हारे पास वो है क्या जो तुम लोग इस्तेमाल करते हो? अब मैं बहुत उत्साहित थी क्योंकि अब मेरी बारी थी अपनी माँ को सिखाने की। मैंने उनको कोटेक्स इस्तेमाल करना सिखाया। इसके बाद वो भी कपड़े को छोड़कर कोटेक्स इस्तेमाल करने लगी। मजे की बात ये रही कि अब हमें अपने जेब खर्च से  पैड ख़रीदने से छुटकारा मिल गया।

कहानी यहीं ख़त्म नही हुई। क्योंकि मेरी 13 साल की उम्र से 26 साल तक सैनिटरी पैड या अंत:वस्त्र (अंडर गारमेंट्स) ख़रीदना मेरे हिस्से में रहा। उन्हें अभी भी इन सब बातों में शर्म महसूस होती है। अब मेरी शादी के बाद वो ले तो आते हैं पर जब भी मौका मिलता है मुझे ही ये काम सौंप देते हैं। और अभी पिछले हफ्ते ही रात के करीब 11 बजे मुझे उनके घर जाकर देकर आना पड़ा। जब मेरे पति ने कहा कि मैं देकर आता हूँ। तो मेरा जवाब था तुम तो दे आओगे पर वो शरमा जाएंगी। और डाँट मुझे पड़ेगी।

तो इस बात को स्वीकारने में कोई हर्ज नही की अभी भी हमें माहवारी और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है।

 लेखक परिचय – *बीमा साउ*

(बीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से बंगाली साहित्य में स्नातक किया है उसके बाद लगभग 3 साल डेवलोपमेन्ट सेक्टर और इंसोरेंस सेक्टर में बतौर कंटेंट राइटर कार्य किया। और अब अपनी 2 छोटी बेटियों के साथ-साथ अपने पूरे परिवार को संभालती हैं। और अपने लेखन के प्रयास को जारी रखने की दिशा में प्रयासरत हैं।)

Menstrual Hygiene – ये कोटेक्स क्या है? Reviewed by on . सारी दुनिया ख़ासकर महिला अधिकारों पर काम करने वाली संस्थाएं जब इस समय को माहवारी स्वच्छता दिवस के रूप में मना रही हैं। इसने मुझे भी अपनी जिंदगी के अनुभवों का सां सारी दुनिया ख़ासकर महिला अधिकारों पर काम करने वाली संस्थाएं जब इस समय को माहवारी स्वच्छता दिवस के रूप में मना रही हैं। इसने मुझे भी अपनी जिंदगी के अनुभवों का सां Rating: 0

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