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हिंसा का बड़ा रूप ले सकते हैं मेवात के हालात

September 2, 2016 12:08 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

MEWAT

सरसरी निगाहों से अखबार छानने वालों के लिए बलात्कार की खबर एक खबर भर हो सकती है। या उन लोगों के लिए भी ये महज एक दिलचस्पी हो सकती है जो अखबार में सिर्फ रेप की खबर ढूंढते हैं। मनोरंजन की खबरें तलाशना तो कोई बड़ी बात नहीं और आश्चर्यजनक ये भी नहीं कि कुछ लोग अखबार केवल इसी तरह की खबरों के लिए ही पढते हैं। चलो मान लिया कि काम और हवश हर किसी के लिए भी इंटरस्ट का विषय हो सकता है। लेकिन क्या 24 अगस्त को मेवात में घटी घटना पर किसी की नजर नहीं पड़ी। क्या कोई नेता, मंत्री या प्रशासनिक अधिकारी उस कृत्य की खबर को नहीं देख पाया जिसमें दो लड़कियों को अपनी हवश का शिकार बनाने के लिए उनके मामा और मामी की हत्या कर दी गई।

मामला शर्मनाक तो है ही, चिंताजनक भी है कि मेवात के डिंगरहेड़ी गाँव में गत 24 अगस्त की रात को एक किसान जूरूदीन की ढाणी पर हत्या व बलात्कार की जघन्य दरिंदगी का कहर टूटा। हवश इस कदर हवश बना कि दो जिंदगियों को भी लील गया। पीड़ित परिवार को ढांढस बधाने के लिए सत्ता पक्ष के राजनीतिक गलियारों से भी लोग चिंता जताकर चले गए होंगे मगर अब चिंता मात्र जता देना कहां की बुद्धिमता होगी। स्वराज्य अभियान ने भी इसे लेकर पीड़ित परिवार से बातचीत की।

स्वराज्य अभियान का कहना है कि मेवात की यह दर्दनाक अपराधिक घटना हरियाणा सरकार व राज्य में कानून व्यवस्था के असफल होने का साफ़ सबूत है। जब किसी के घर में घुस कर कुछ लोग दोहरी हत्या व बलात्कार जैसे अपराध को तीन घंटे तक बेख़ौफ़ होकर अंजाम देते हैं, तो साबित होता है कि राज्य में अपराधी किस कदर बेख़ौफ़ हैं। जो इस अपराधिक घटना के पीछे बड़ी साजिश की ओर साफ इशारा करता है।

इन परिस्थितियों में उनकी हरियाणा सरकार से ये मांग भी वाजिब है कि इस निर्मम घटना की जाँच हरियाणा पुलिस की बजाय केंदीय जांच एजेंसी सी बी आई से करवाई जाये। जाँच ये भी होनी चाहिए कि इस घटना के पीछे दंगे भड़काने की नियत से किसी संगठन का हाथ तो नहीं ! उधर हरियाणा माकपा का राज्य नेतृत्व भी संवेदना प्रकट करने पीड़ित परिवार के घर पहुंचा। जिसके बाद पार्टी के राज्य सचिव सुरेंद्र सिंह, इंद्र जीत सिंह व खलील अहमद ने इस संबंध में जारी एक प्रैस बयान में कहा कि दो लड़कियों को गैंगरेप की हवश का शिकार बनाते हुए जिस तरह से उनके मामा व मामी की निर्मम हत्या की गई वह पूरे समाज के माथे पर कलंक है।

उन्होनें कहा कि इस जघन्य अपराध में पुलिस की भूमिका और खट्टर सरकार के रवैये पर पीड़ित परिवार व पूरे इलाके में जबरदस्त रोष व्याप्त है। पुलिस ने तो इस मामले में खुद ऐसा आपराधिक आचरण किया है जिसे माफ नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में हत्या की धारा 302 घटना के पूरे 6 दिन बाद लगाई गई है जबकि आज तक मुख्यमंत्री व सरकार की ओर से परिवार में शोक प्रकट तक करने तक कोई नहीं गया और न ही इस दरिंदगी पर कोई बयान जारी किया है, जो कि निंदनीय है। पार्टी ने मांग की है कि सभी दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा हो, परिवार व पीड़ितों के पुनर्वास हेतु आर्थिक राशि तुरंत दी जाए, मृतकों के बच्चों को भरपुर सहायता दी जाए, परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए और मामले को जानबूझकर बिगाड़ने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कारवाई हो।

फिलहाल अगर मेवात के हालातों पर नजर डाले तो स्थिति तनावपूर्ण है और हिंसा की आशंका भी यहां बनी हुई है। विदित हो कि मेवात के इस निर्भया कांड को बुलंदशहर कांड से भी जघन्य अपराध बताया जा रहा है। बता दें कि ऐसे में अगर पुलिस व प्रशासन की ओर से गंभीरता नहीं बरती गई तो ये हालात बेकाबू होकर हिंसा का बड़ा रूप ले सकते हैं। हाल-फिलहाल प्रशासन द्वारा घटनास्थल को भी सील नहीं किया गया है। पीड़ित परिवार मुस्लिम और अपराधी एक ख़ास जाति अहीर के होने की वजह से पुलिस द्वारा निष्पक्ष जाँच नहीं करने का आरोप भी लगाया जा रहा है। वहीं गौर करने वाली बात ये कि इतना बड़ा हत्या और दुष्कर्म कांड होने के बावजूद भी मेन स्ट्रीम मीडिया ने इसे अच्छे से नहीं उठाया जो कि और भी चिंतनीय है।

 

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