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वसंत पर मिर्चपुर में ये कैसी बयार ?

February 1, 2017 9:50 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

हरियाणा में एक समुदाय आरक्षण को लेकर फिर से आंदोलनरत है । तीन दिन बीत चुके हैं । इस बार सरकार मुस्तैद है, चाक चौबंद है । इस सबके बीच अचानक हिसार के मिर्चपुर की राख में दबी चिंगारी फिर सुलग उठी है ।

पिछली बार जातीय तनाव एक कुतिया को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ था । इस बार भी वजह बच्चों की 1600 मीटर दौड को लेकर हुआ है । दलित युवक शिवकुमार ने यह दौड क्या जीत ली , वह आंखों में खटकने लगा । दिन में दौड जीती, रात को शिव गांव में चल रहे साइकिल शो को देखने चला गया । वहां दूसरे पक्ष के बच्चों ने शिव से अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया । विरोध करने पर मारपीट करने लगे । शिव ने अपने भाई सोमनाथ को बुला लिया । इस तरह शिव , सोम सहित नौ युवक घायल हो गए । इन्हें हिसार के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया । प्रशासनिक अधिकारी रात के रात ही मिर्चपुर पहुंचे । जैसे तैसे पलायन कर रहे दलित परिवारों को समझा बुझा कर गांव में ही रहने के लिए मनाया । इस तरह मिर्चपुर में फिर से जातीय तनाव की चिंगारी सुलग उठी ।

अभी पिछले माह ही मिर्चपुर से सीआरपीएफ की कंपनी हटाई गई थी । छह साल बाद ऐसा लगा था कि मिर्चपुर में अब वसंत आ रहा है । सद्भावना का माहौल बन रहा है पर बच्चों के बीच दौड को लेकर हुए विवाद ने एक बार फिर मिर्चपुर में जातीय तनाव की लपेट में ले लिया ।

खट्टर सरकार ने सीआरपीएफ की कंपनी हटाने की सिफारिश केंद्र से की थी और 18 लाख रुपए खर्च होने की दुहाई भी दी थी । केंद्र वे इसे स्वीकार कर लिया । पर एक महीने बाद ही इस घटना ने यह साबित कर दिया कि यह फैसला कितना गलत था । मिर्चपुर गांव के प्रेम,  सद्भाव व भाईचारे को किसी की नजर लग गई है । एसपी इसे सोचों का झगड़ा बता रहे हैं और इस संवेदनशील भी बता रहे हैं । पुलिस बल तैनात कर दिया गया है । अभी तक पौने सात साल पहले हुए जातीय तनाव के चलते मिर्चपुर के कुछ परिवार हिसार के एक फार्म हाउस में शरण लिए हुए हैंं । मानव अधिकार आयोग के संज्ञान में भी यह मामला हैंं ।

मिर्चपुर में पौने सात साल पूर्व जातीय तनाव के कारण दलित बस्ती में आग लगा दी गई थी । इस आग मे एक पिता पुत्री अपने प्राण गंवा बैठे थे । तब राहुल गांधी भी अपनी सरकार के बावजूद मिर्चपुर में पीडि़त परिवार से दर्द सांझा करने आए थे ।

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

(नोट: आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। जिन्हें ज्यों का त्यों यहां प्रस्तुत किया गया है। आलेख में व्यक्त किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है)

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