Saturday , 21 October 2017

Home » खबर खास » मोदी बनाम राहुल गांधी – यह अंदाजे गुफ्तगू क्या है?

मोदी बनाम राहुल गांधी – यह अंदाजे गुफ्तगू क्या है?

December 27, 2016 10:19 am by: Category: खबर खास 1 Comment A+ / A-

modi-rahul

बड़ा प्यारा कला महोत्सव था। वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के सांसद और काशी के बेटे होने के नाते आमंत्रित थे। कभी मदनमोहन मालवीय को तो कभी शहनाई वादक बिस्मिल्ला खां को याद किया। कला व कलाकारों को सम्मान देते यह भी कहा कि कला हमें रोबोट होने से बचाती है। लग रहा था कि कला महोत्सव के उद्घाटन समारोह को राजनीति से दूर रखेंगे। यह भ्रम था। जो जल्दी ही दूर हो गया। मोदी ने नोटबंदी को भ्रष्टाचार के विरूद्ध सफाई अभियान बताया। पंडाल में तालियां गूंजी। फिर इसे पाकिस्तान के उन हमलों के साथ जोड़ा, जो आतंकवादियों को सीमा पार करने के लिए कवर करने के लिए किए जाते हैं। विपक्ष के नोटबंदी के विरोध की उसी ‘कवर युद्ध’ से तुलना करते हुए बड़े व बेइमान लोगों को बचाने की कोशिश बताया। फिर एकदम कला का प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में नाम लिए बगैर कहा कि युवा नेता भाषण देना सीख रहा है। अच्छा हुआ युवा नेता बोलने लगा, देश भूकंप से बच गया। सच, गाना याद आ गया- आप हमें अच्छे लगने लगे पर जिस अंदाज में कला महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा नेता की मिमिक्री कर उनका मजाक उड़ाया, वह राहुल ने खुद भी देखा लाइव प्रोग्राम में। यदि अच्छे लगने लगे तो मजाक क्यों उड़ाने लगे? किसका है कालाधन और काला मन?

राहुल गांधी ने मेहसाणा की पाटीदार रैली में प्रधानमंत्री मोदी पर सहारा व बिड़ला ग्रुप से गुजरात के मुख्यमंत्री रहते समय करोड़ों रुपए लिए जाने का आरोप जो लगाया था। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तो रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस  प्रवक्ता के रूप में सामने आए थे। पर कल तो दोनों एक प्रकार से आमने-सामने ही आ गए। प्रधानमंत्री ने गरीबी, अशिक्षा व बिजली न होने को पूर्व प्रधानमंत्री व कांग्रेस का रिपोर्ट कार्ड बताया। मोदी ने कहा कि उन्होंने बिजली के तार नहीं काटे, अशिक्षित रहने पर भी कांग्रेस ही जिम्मेदार है। मोदी ने फिर भी आरोपों का जवाब नहीं दिया।

बहराइच की रैली में राहुल गांधी ने यही कहा कि मोदी, बेशक मेरा मजाक उड़ा लें, पर जो आरोप लगाए हैं, उनका जवाब तो देश को दीजिए। राहुल गांधी ने गालिब के शेर का भी सहारा लेते कहा:-

हरेक बात पे कहते हो कि तू क्या है,

अब आप ही बताएं यह अंदाजे गुफ्तगू क्या है?

सच, यह अंदाजे गुफ्तगू क्या है? आरोपों के जवाब में मजाक उड़ाना या केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद सिंह द्वारा मीडिया को यह कहना कि जिसे जनता ने नकार दिया, उसे टीआरपी क्यों दे रहे हो? यह संदेश एक प्रकार से मीडिया को ठंडा आदेश है कि क्या दिखाना है और क्या नहीं? ‘छोटा पैक’ हो या ‘बड़ा पैक’ पर राहुल पूछ रहे हैं कि 10 पैकेटों में क्या था? बेशक राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप लगाना जरूरी होता है। नेता भी चर्चाओं में इसे सही रणनीति बताते हैं। ज्यों-ज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब व गोवा के चुनाव का समय निकट आएगा, त्यों-त्यों ये आरोप-प्रत्यारोप के बाण और तीखे होते जाएंगे। संसद, विधानसभाएं तक हंगामे की भेंट चढऩे लगी हैं। त्रिपुरा विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायक सुदीप रॉय बर्मन स्पीकर का दंड उठाकर भागते दिखे। यह कहां जा रही है राजनीति? सिर्फ मजाक या हंगामा करने तक?

हम तो इतना ही कहेंगे, सभी राजनेताओं से:-

ये रास्ते हैं राजनीति के, चलना संभल संभल के…

kamlesh-bhartiya

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

मोदी बनाम राहुल गांधी – यह अंदाजे गुफ्तगू क्या है? Reviewed by on . बड़ा प्यारा कला महोत्सव था। वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के सांसद और काशी के बेटे होने के नाते आमंत्रित थे। कभी म बड़ा प्यारा कला महोत्सव था। वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के सांसद और काशी के बेटे होने के नाते आमंत्रित थे। कभी म Rating: 0

Comments (1)

  • kamlesh bhartiya

    rajneti se shalinta aur maryada samapat hoti ja rahi hai. pradhanmantri jaise pad par vyakti ko kaise vyavhar karna chahiye, ise lekar bare sankoch ke sath yeh baat kahi hai.

Leave a Comment

scroll to top