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जो पहना, सो पहना, लोगों का काम है कहना…

December 28, 2016 10:40 am by: Category: खबर खास 2 Comments A+ / A-

shami

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना, छोड़ो बेकार की बातों को, बीत न जाए रैना। राजेश खन्ना की एक फिल्म में ये गाना है। सच, हम इसी बात से डरते हैं कि लोग क्या कहेंगे? पर लोगों का काम है कहना। बिग बी अमिताभ बच्चन ने कुछ समय पहले अपनी नातिन नव्या नवेली को पत्र लिखकर इस बात के प्रति चेतावनी दी थी और लिखा था कि अपनी स्कर्ट से किसी को भी अपने चरित्र को मत मापने दो। यह कोई चरित्र मापने का पैमाना नहीं है। हालांकि इस पत्र के बावजूद फिल्मी दुनिया पर ही कोई असर नहीं दिखा था बल्कि श्रद्धा कपूर के देर रात घर लौटने पर पिता शक्ति कपूर ने आपत्ति की थी।

अब देखिए न कि लॉन टेनिस या बैडमिंटन खेलते समय कैसी ड्रैस पहनें, इस पर भी टेढ़ी निगाहें की जाती रहीं। सानिया मिर्जा पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उसने साफ तौर पर जवाब दिया था कि बुर्का पहनकर तो लॉन टेनिस खेली नहीं जा सकती। अब इस छोटी मानसिकता के शिकार हुई है क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन। मोहम्मद शमी ने अपनी पत्नी हसीन के साथ एक खूबसूरत तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। हसीन के कपड़ों को लेकर टिप्पणियां शुरू हो गईं। हसी ने स्लीवलेस ड्रैस पहनी है, जिस पर कमेंट्स में कहा गया है कि इससे धर्म का अपमान होता है, अगली बार वे ऐसी ड्रैस में दिखाई न दें।

इसके बावजूद पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने शमी की पत्नी पर किए जाने वाले कमेंट्स के जवाब में लिखा- ये मुद्दे शर्मनाक हैं। मैं पूरी तरह शमी के समर्थन में हूं। देश में इससे बड़े मुद्दे हैं। बिल्कुल सही कहा कैफ ने कि और भी गम हैं जमाने में ड्रैस के सिवा। इसी तरह ‘भाग मिल्खा, भाग’ के हीरो फरहान अख्तर ने भी कहा कि डियर मिसेज शमी, हम कभी नहीं मिले, लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि आप इस गाउन में बेहतरीन दिख रही हैं। आपके प्राउड हस्बेंड को सलाम। पूर्व विकेटकीपर सैयद किरमानी ने भी ऐसे भद्दे कमेंट्स का विरोध करते लिखा- यह बेहद निजी मामला है कि कौन क्या पहनता है। इसमें किसी को  भी दखल देने का अधिकार नहीं है। निजी जिंदगी पर टिप्पणी ठीक नहीं। गीतकार व संवाद लेखक जावेद अख्तर का भी मानना है कि शमी की पत्नी ने जो ड्रैस पहनी है, वह बेहतरीन और शालीन है। इससे अगर किसी को दिक्कत है तो वह बीमार मानसिकता से ग्रस्त है। मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगा। बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने भी कहा कि हर महिला की अपनी पसंद होती है कि वह क्या पहनना चाहती है। इसका सम्मान करें।

सबसे तीखी टिप्पणी और भद्दे कमेंट्स के विरुद्ध खुद क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने जवाब दिया- हर किसी को जिंदगी में मुकाम नहीं मिलता। कुछ किस्मत वाले ही होते हैं, जिन्हें यह नसीब होता है। जलते रहो। ये मेरी जिंदगी और लाइफ पार्टनर है। मैं अच्छी तरह जानता हूं कि क्या करना है, क्या नहीं? शमी ने अंतिम पंक्ति में बहुत अच्छी बात कही है कि हमें अंदर देखना चाहिए कि हम कितने अच्छे हैं।

कभी कुछ बीमार मानसिकता के लोग यह भी कह चुके हैं कि चूंकि लड़कियां ड्रैस ही ऐसी पहनती है, जिससे वे यौन हिंसा का शिकार होती हैं। शमी की पत्नी ने तो सचमुच ऐसी ड्रैस नहीं पहनी है, जिस पर इतने भद्दे कमेंट्स किए जाएं। ऐसी ड्रैस तो आम भारतीय नारी भी पहनती है। फिर इस स्लीवलैस ड्रैस को लेकर इतनी हाय-तौबा क्यों? यह तो शुक्र है कि शमी के समर्थन में कितने ही लोग सामने आए और खुलकर उनकी पत्नी की ड्रैसिंग सेंस की सराहना की। आखिर इस छोटी और बीमार मानसिकता से कब ऊपर उठेंगे..? किसने क्या पहना, इससे कब पीछा छुड़ाएंगे?  शमी की पत्नी हसीन को यह कहने की नौबत न आए:-

नए कपड़े पहन कर जाऊं कहां…

मैं बाल बनाऊं किसके लिए?

kamlesh-bhartiya

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

-9416047075

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Comments (2)

  • kamlesh bhartiya

    big b amitabh bacchan ki nasihat ko bhi koyi nahin sunne wala. isliye shammi ki patni hasin par bhadhe coments kiye gaye. itna shukar hai ki shammi ko samarthan kiya. achhe log bhi hain. phir bhi aise mudhe uthne hi nahin chahiyen.

    • kamlesh bhartiya

      humen yeh haqk nahin ki hum doosron ko yeh batayen ki kya pehnen, kya nahin. sabko yeh maulik adhikar mila hua hai. ismen dakhal dene ki kya jarurat?

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