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संगीत आत्मा की खुराक फिर पाबंदी क्यों?

इस्लाम की तो अजान भी संगीतमय है लगती है फिर नाहिद आफरीन के गाने पर फतवा क्यों? ये फतवे कहीं धर्म की इज्ज़त की बजाय फज़ीहत तो नहीं करवा रहे हमें सोचना चाहिये।

March 16, 2017 10:58 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

हमारा देश गंगा-यमुना तहजीब का देश है। संगम में जैसे गंगा-यमुना मिलती हैं, तो कोई नहीं बता सकता कि गंगा कौन सी है और यमुना कौन सी है? संगम का अर्थ ही है मेल-मिलाप। फिर भी पिछले कुछ समय से ऐसे-ऐसे उदाहरण हैं, जिसमें इस तहजीब की अलग तस्वीर देखने को मिलती है। कभी क्रिकेटर मोहम्मद सामी की पत्नी की ड्रेस को लेकर, तो कभी मोहम्मद कैफ के सूर्य नमस्कार को लेकर। कभी जायरा वसीम इनके निशाने पर आ जाती है और उसे कहना पड़ता है कि मुझे रोल माडल मत समझो। मैं इस लायक नहीं हूं। वह भी सिर्फ सौलह साल की है। अब असम की सौलह साल की गायिका नाहिद आफरीन को निशाने पर लिया गया है। कभी संगीतकार एआर रहमान भी फतवे का शिकार हो चुके हैं।

                नाहिद आफरीन इंडियन आडडल की रनरअप रह चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि जब पहली बार नाहिद इस रियलिटी शो में भाग ले रही थी तब तो किसी ने इस पर कोई आपत्ति नहीं उठाई। जब वह एक कालेज में कन्सर्ट का कार्यक्रम देने की तैयारी में जुटी है, तब सब की नजरें उस पर एकाएक टेड़ी कैसे हो गई? उसके घर के बाहर असमी भाषा में जान से मारने की धमकी क्यूं दी जाने लगी? संगीत के बारे में कहा जाता है कि यह आत्मा की खुराक है और बहुत सी बीमारियां महज संगीत सुनकर ही दूर हो जाती हैं। मां की लोरी और संगीत एक जैसा काम करते हैं। बच्चों को मीठी-मीठी नींद की झपकी आने लगती है। उसी संगीत पर धमकी क्यूं?

                नाहिद आफरीन ने कहा है कि एक बार तो फतवे से उसका हलक सूख गया था पर मैं गाती रहूंगी। जैसे सानिया मिर्जा ने खेलना नहीं छोड़ा, वैसे ही नाहिद आफरीन अपने सूरों से फिजां में मिठास घोलती रहेगी। उसके सूरों पर पाबंदी लगाने के फतवे जारी किए जा रहे हैं। नाहिद आफरीन ने कहा कि मैं एक गायिका हूं और संगीत मेरी जिंदगी। अल्लाह ने मुझे आवाज से बख्शा है।

                सानिया मिर्जा, जायरा बशीन, नाहिद आफरीन, एआर रहमान अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं फिर भी इन पर इस तरह की पाबंदीयां क्यों? क्यां खेलना, अभिनय करना, गाना, संगीत देना सबकुछ मना है? खुदा द्वारा बख्शी नेमत पर ऐसे तेवर क्यों? सामी की पत्नी मनभावन ड्रेस नहीं पहन सकती, कैस सूर्य नमस्कार नहीं कर सकता, जायरा अभिनय नहीं कर सकती, नाहिद गा नहंी सकती। ये सब टारगेट क्यूं बन जाते हैं? पता तभी चलता है जब आफरीन की तरह घर के बाहर धमकी भरा पोस्टर लगा मिलता है।

                विश्व में भारत की गंगा-यमुनी तहजीब को सराहा जाता है। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक हर साल भारत आते हैं। ताजमहल देखने जरूर जाते हैं, जो प्रेम की अदभूत कहानी का प्रतीक है। फिर नाहिद आफरीन के प्रति प्रेमभाव क्यों नहीं? सोनाक्षी सिन्हा ने नाहिद को अपनी फिल्म अकीरा में पाश्र्व गायन का अवसर दिलाया। सोनाक्षी ने नाहिद से इंडियन आइडल में उससे किया गया वायदा पूरा किया। अब असम के मुख्यमंत्री सोनोवाल ने नाहिद को पूर्ण सुरक्षा का विश्वास दिलाया है।

                वैसे सवाल उठाए जा रहे हैं कि प्रसिद्ध गायक मोहम्मद रफी की सुरताल पर ऐसे एतराज किए जाते तो इतने बढिय़ा भजन हमें कैसे सुनने को मिलते? सबसे ज्यादा भजन रफी की ही आवाज में हैं। नाहिद आफरीन भी भजन गायिका हैं। आफरीन ने जो गाते रहने का दम दिखाया है, उसे देखते हुए सब तरफ आफरीन-आफरीन हो रही है।

kamlesh-bhartiya

लेखक परिचय

कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

 

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