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निर्जला एकादशी – ये व्रत है बड़ा कठिन

क्यों कहते हैं निर्जला क्या है इसकी कहानी

June 16, 2016 10:40 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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ज्येष्ठ यानि जेठ का महीने की तपती दुपहरी में आपको कदम कदम पर मीठे पानी और शरबत की छबीलें लगी दिखाई दें, आपको प्रेम से कोई तरबूज खिलाए, सफर कर रहे हैं तो वाहनों को रोक-रोक कर यात्रियों को पानी पिलाया जाये तो समझना चाहिये वह दिन निर्जला एकादशी का है। जी हां कुछ इसी तरह का नजारा होता है निर्जला एकादशी पर हरियाणा सहित पूरे उत्तर भारत का। वैसे तो इस त्यौहार का नाम निर्जला एकादशी है लेकिन इस दिन जल के भंडारे लगाये जाते हैं। राहगीरों की प्यास बुझाकर पुण्य कमाया जाता है। जाहिर सी बात है जब जगह जगह छबीलें लगती हैं तो इसे निर्जला क्यों कहते हैं।

 

क्यों कहते हैं निर्जला

 

दरअसल बात यूं है कि भगवान भगत की परीक्षा लेना चाहते हैं वह देखना चाहते हैं कि आपमें कितना समर्पण है कितना त्याग है। इस दिन बहुत सारे लोग पुण्य कमाने के लिये उपवास रखते हैं उपवास में व्रती को एक बूंद जल तक ग्रहण करना नहीं होता। उपवास भी सुबह से शाम तक नहीं बल्कि अगले दिन तक होता है यानि एकादशी तिथि के समाप्त होने के बाद द्वादशी को व्रत खोलना होता है हरियाणवी में कहूं तो ग्यास को बरती फिर दुवैस को चरती। तो इस व्रत में जल तक ग्रहण नहीं किया जाता इसलिये यह निर्जला एकादशी कहलाता है।

 

कहानियां

एक संदर्भ मीरा का लिया जाता है कहा जाता है कि मीरा भी इस उपवास को किया करती इसी कारण राणा के जहर के प्याला भी उसके लिये अमृत हो गया था। हालांकि इस मान्यता के पिछे सत्य कितना है कहा नहीं जा सकता क्योंकि मीरा असल में कृष्ण की उपासक तो थी लेकिन बाद में वे संत रविदास की शिष्या बन गई थी जो कि निर्गुण संत थे जिनका मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं था और इसे पाखंड मानते थे।

 

वहीं एक कहानी महाभारत काल की है व्यास के कहने पर सभी पांडव मुक्ति पाने के लिये एकादशी के उपवास को रखने लगे लेकिन भीम के लिये यह बहुत कठिन था। वह तो भोजन के बगैर रह ही नहीं सकते थे। साल में 24 एकादशियां आती है मलमास के समय ये 26 हो जाती हैं। साल में 26 दिन भूखे रहना। भीम तो भीतर तक दहल जाता उसने व्यास जी के सामने हाथ पैर जोड़े और उपाय पूछा तब व्यास जी ने कहा कि बेटे भीम तू सिर्फ ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को उपवास रख लेकिन याद रखना इसमें भोजन तो क्या पानी की एक बूंद तक नहीं पीनी है। मरता क्या न करता भीम ने अपनी छाती पर पत्थर रखकर आखिरकार इस उपवास को किया और मोक्ष प्राप्ति की इसी कारण भीम के तप को देखकर इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। पांडव भी उपवास रखते थे इसलिये पांडव एकादशी भी इसे कहते हैं, और हां जो लोग आज के दिन छबील लगाते हैं वह असल में व्रतियों की परीक्षा लेने के लिये होती है कि वे अपने आप पर कितना नियंत्रण रख पाते हैं बाकि भयंकर गर्मी में जल पिलाना धर्म का काम तो है ही उस पर जब पानी को लेकर हर तरफ इतनी मारोमार हो उसमें तो यह और भी पुण्य का काम हो जाता है। हरियाणा खास की और से आपको निर्जला एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

निर्जला एकादशी – ये व्रत है बड़ा कठिन Reviewed by on . ज्येष्ठ यानि जेठ का महीने की तपती दुपहरी में आपको कदम कदम पर मीठे पानी और शरबत की छबीलें लगी दिखाई दें, आपको प्रेम से कोई तरबूज खिलाए, सफर कर रहे हैं तो वाहनों ज्येष्ठ यानि जेठ का महीने की तपती दुपहरी में आपको कदम कदम पर मीठे पानी और शरबत की छबीलें लगी दिखाई दें, आपको प्रेम से कोई तरबूज खिलाए, सफर कर रहे हैं तो वाहनों Rating: 0

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