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नीतीश कुमार का इस्तीफा क्या हैं इसके मायने

July 26, 2017 8:35 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

जिस बीजेपी को पूरे देश में कहीं चुनौति तक मिलती नहीं नज़र आ रही थी वहां बिहार में राजद-जदयू व कांग्रेस गठबंधन ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखा। नीतिश कुमार की ईमानदार छवि के किले को प्रधानमंत्री मोदी तक का प्रचार भेद नहीं पाया था। लेकिन पिछले कुछ समय से बिहार में हुए इस महागठबंधन को लेकर तरह तरह के कयास लगाये जा रहे थे। नितीश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही यह कहा जा रहा था भ्रष्टाचार के मामलों में सजायाफ्ता लालू का साथ उन्हें कितने दिन भायेगा? तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री बनाते ही नितीश कुमार तक की मंशा पर सवाल उठे। पिछले दिनों भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही थी लेकिन लालू के 80 विधायकों की बदौलत नितीश कुमार कुछ निर्णय ले नहीं पा रहे थे आखिरकार उन्होंने अपनी अंतरआत्मा की आवाज़ को सुना और स्वयं ही इस्तीफा दे दिया। आइये समझने का प्रयास करते हैं कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के मायने क्या हैं?

चौतरफा सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के तमाम नेता जहां नीतीश कुमार के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। वहीं राजद सहित गठबंधन के दलों को फिलहाल कुछ समझ नहीं आ रहा है। दरअसल जिन परिस्थितियों में उन्होंने इस्तीफा दिया है उसकी हर तरफ सराहना हो रही है कि वे ईमानदारी के खिलाफ खड़े हैं। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस के वायदे को साबित किया है। नीतीश ने भी कहा है कि अब इस सरकार को चलाना उनके बस का नहीं रहा था इसलिये स्वयं ही नमस्कार कर लिया।

लालू की प्रेस कॉन्फ्रेस

नीतीश कुमार के बाद लालू यादव भी प्रेस वार्ता कर मीडिया को संबोधित किया। लालू यादव ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर कोई सफाई देने से साफ मना तो कर ही दिया कि आप कोई थानेदार नहीं हैं जो सफाई दें। सब आरोप मिथ्या हैं। समय आने पर पता चल जायेगा। मीडिया में इन आरोपों पर बयान देने से वकीलों ने मना किया था इसलिये सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा गया। लेकिन लालू सिर्फ यहां नहीं रूके। उन्होंने नीतीश कुमार पर हत्या करने के आरोपों का जिक्र किया है जो उन पर 1991 से चल रहा है। 2009 में इस मामले पर फिर संज्ञान भी लिया गया। उन्होंने कहा कि फिर से इस पर संज्ञान लिये जाने की चर्चा के भय से उन्होंने इस्तीफा दिया।

महागठबंधन का नया नेता चुना जाये

लालू ने कहा कि यदि नीतीश कुमार की अंतर्आत्मा नहीं कहती है कोई बात नहीं राजद जदयू और कांग्रेस के विधायकों को नया नेता चुनना चाहिये। उन्होंने शंका भी व्यक्त की कि राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीद्वार का समर्थन करने के पश्चात ही यह लगने लगा था कि नीतीश अब बीजेपी के साथ जायेगें। ये मोदी के साथ उनकी मिलीभगत है।

अब बिहार में महागठबंधन का टूटना तो लगभग तय है लेकिन बीजेपी के साथ नीतीश कुमार ने जाने के संकेत अवश्य दिये हैं। वहीं बिहार बीजेपी के नेता सुशील मोदी ने भी इसके सकारात्मक संकेत दिये हैं।

ये तो रहे घटनाक्रम अब इससे यह तो समझा जा सकता है कि नीतीश कुमार का यह इस्तीफा कोई अचानक लिया गया फैसला तो नहीं है। संभव है इसकी भूमिका बहुत पहले से बन रही हो जिसका पहला आभास नोटबंदी में केंद्र की बीजेपी सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करना है। इसके बाद गठबंधन के खिलाफ बड़ा फैसला राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीद्वार के पक्ष में खड़ा होना और इसके बाद बीजेपी के साथ जाने के संकेत से यह साफ हो रहा है कि नीतीश कुमार भले ही ईमानदार छवि बचाने का प्रयास कर रहे हों लेकिन जिस बिहार की जनता ने बीजेपी को हरा कर लालू और नीतीश के हाथ में प्रदेश की बागडोर सौंपी थी उस बिहार की जनता को धत्ता बताते हुए नीतीश बीजेपी के साथ सरकार बना सकते हैं।

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