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दिल भी कितना पागल है, हर बात को सच माने है

November 14, 2016 3:09 pm by: Category: खबर खास 2 Comments A+ / A-

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मेरा दिल भी कितना पागल है, यह प्यार तो तुम से करता है, पर सामने जब तुम आते हो, कुछ भी कहने से डरता है। ऐसा हर भारतवासी का दिल है। दिल तो पागल है। दिल है कि मानता नहीं। कुछ-कुछ होता है। दिल वाले पता नहीं क्या-क्या ले जाएंगे। अब देखिए न कि चार हजार रुपए बदलवाने के लिए कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली में एसबीआई की ब्रांच में गए। विश्वास नहीं होता न कि राहुल कतार में लगकर नोट बदलवाने के लिए खड़े हुए और वहां 40 मिनट तक रुके। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बिना तैयारी के नोटबंदी कर दी, आम आदमी का दर्द प्रधानमंत्री की समझ में नहीं आया। आम आदमी का दर्द समझने के लिए ही कतार में लग कर नोट बदलवाने आया हूं। सहूलियत सबके लिए होनी चाहिए, न कि 15-20 लोगों के लिए।

राहुल गांधी कतार में लगकर नोट बदलवाने आए, पर मुलायम सिंह यादव, मायावती और केजरीवाल तो भाषणों तक ही सिमट कर रह गए। मुलायम सिंह यादव तो एक दिन की मोहल्लत और मांग रहे हैं, जबकि मायावती इसे आर्थिक आपातकाल कहने के साथ-साथ यह भी कह रही है कि भाजपा वालों ने तो अपने नोट ठिकाने लगा दिए। खैर, ये तो मुलायम सिंह यादव ही जाने कि एक दिन की मोहल्लत से वे आम आदमी के लिए क्या मांग रहे हैं या एक दिन से जनता का दर्द कैसे दूर हो जाएगा? यहां तो राहुल गांधी ही नहीं, सारा देश बैंकों में कतार में खड़ा दिखाई दे रहा है। सुबह नाश्ता जल्दी-जल्दी कर सब बैंकों की ओर दौड़ पड़ते हैं। फिर दोपहर का भोजन कर दूसरी शिफ्ट के लिए भागते हैं बैंकों की ओर। बाजार की रौनक गायब है। चेहरों से मुस्कान गायब है। तिजोरी से नोट गायब हैं। शोर फिल्म की बात याद आती है, कि थैलाभर नोट और मुट्ठीभर राशन भी नहीं मिल रहा। जम्मू कटरा में फंसे लोग ढाबे वालों की कृपा पर हैं। दिल्ली कनॉट पैलेस में लोग नोट लिए भी भूख से बेहाल फिर रहे हैं। कैसे बीच रास्ते में नोटबंदी से यात्री परेशान हुए जा रहे हैं। नीतिश कुमार ने तो शराबबंदी ही की थी, पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई कदम आगे बढक़र नोटबंदी ही कर डाली। अब शराबबंदी की जरूरत ही क्या? जब नोट ही नहीं तो शराब भी कहां से आएगी? ममता बनर्जी ने भी नोटबंदी को आम आदमी की परेशानी से जोड़ा।

राहुल गांधी कतार में क्या लगे कि मीडिया की सुर्खियों में आ गए। चैनलों के कैमरे उन पर रोशनी डालने लगे। लोगों ने बाद में कहा कि हमें तो राहुल गांधी के आने से परेशानी ही झेलनी पड़ी। कुछ न कुछ अफरा-तफरी तो हुई होगी। अब अगर हर वीआईपी कतार में लगने को आतुर हो गया तो कितनी परेशानी आम जनता की बढ़ेगी? खैर, राहुल बाबा लगे कतार में। पिया मोदी तो उड़ लिए जापान, कौन देख रहा है और क्या फर्क पडऩे वाला है? पर कतार में लगकर सचमुच नेता बनने की ओर कदम तो बढ़ाया है। राजनीति ड्रामेबाजी से कहीं ज्यादा ड्रामेबाजी बन चुकी है। हर नेता सुबह-सवेरे अखबार पढक़र नई स्क्रिप्ट लिखता है और घर से चल पड़ता है। भाजपा के अमित शाह कहते हैं कि इससे कुछ राजनीतिक दल गरीब हो गए।

अब कल शाम को देखिए न, जैसे ही लोग बैंकों से थके-हारे लौटे तो यूपी में किसी ने अफवाह फैला दी कि यूपी में नमक खत्म हो गया। लोग, दुकानों की ओर भागने लगे लोग नमक खरीदने। चुटकी भर नमक की कीमत देखते-देखते कहीं छह, कहीं सात तो कहीं आठ सौ रुपए तक पहुंच गई। पुलिस प्रशासन अफवाहों सच मान लेता है। जब सच सामने आता है, तो खुद पर ही हंसने लगता है या खिसिया जाता है। खैर, पहले तो फोन पर ही आवाज आती थी कि आप कतार में हैं। अब सारा देश कतार में है।

500 व 1000 रुपए के नोटबंदी पर यही कह सकते हैं:

रहते थे कभी जिनके दिल में, हम जान से भी प्यारों की तरह

हम आज उन्हीं के कूचे पर बैठे हैं गुनहगारों की तरह।

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लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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