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नोटबंदी: जुआ, आफत या राहत…? 

November 30, 2016 11:29 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

 

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कमलेश भारतीय

नोटबंदी के बाद स्वदेशी ही नहीं, विदेशी मीडिया भी इस साहसिक कदम पर न केवल नजरें जमाए हुए हैं बल्कि इस पर विचार भी प्रस्तुत कर रहे हैं। चीन के मीडिया में भारत में हुई नोटबंदी का मुद्दा छाया हुआ है। चीन   के मीडिया ने इसे ‘जुआ’ करार दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा कि मोदी का यह कदम एक मिसाल पेश करेगा। नोटबंदी का कदम सफल रहे या विफल लेकिन इसके बावजूद यह भी लिखा कि आम जनता की सहनशीलता भी दांव पर लगी है। इसी को लक्ष्य कर तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में कहा कि मोदी जी, पचास दिन आपके लिए जैसे भी हों लेकिन आम आदमी के लिए बहुत मुश्किलों से भरे हैं। नोटबंदी को लागू करने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। मीडिया यह कह रहा है कि प्रधानमंत्री का इरादा नेक है लेकिन सुधार करना हमेशा मुश्किल होता है। इसके लिए साहस के अलावा भी बहुत सी चीजों की जरूरत होती है। मोदी ने नेक इरादे से नोटबंदी की है लेकिन यह सफल होगी या नहीं, यह एक जुआ है और पूरे समाज के सहयोग पर निर्भर करता है। गाना भी याद आ रहा है: जिंदगी है इक जुआ… इसी तरह नोटबंदी भी है इक जुआ।

भाजपा नेता डॉ. हर्षवर्धन इसी परेशानी पर कहते हैं कि आज की परेशानी, कल की राहत बनेगी। चांदनी चौक क्षेत्र से सांसद डॉ. हर्षवर्धन जब व्यापारियों से मिले तब उनका दर्द छलक उठा, जिस पर उन्होंने कहा कि नोटबंदी से परेशानियां जरूर हैं लेकिन बाद में यह व्यापारियों को खुशहाली देगी। मजेदार बात है कि कभी भाजपा नोटबंदी के पक्ष में दिल्ली में प्रदर्शन करती है तो कभी कांग्रेस विरोध में प्रदर्शन करती है। अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर भाजपा कार्यकर्ता हंगामा करते हैं। दिल्ली में ही कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन ने इसे भारत का सबसे बड़ा घोटाला कहते हुए आम आदमी के लिए आफत भी करार दिया है। कांग्रेस ने थाली बजाकर अलग तरह से प्रदर्शन की बात भी कही है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने नोटबंदी के फैसले को जनविरोधी व राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से 90 प्रतिशत आबादी परेशान व मुसीबत में है, इसे कैसे सही कदम माना जा सकता है? इस नोटबंदी के मुद्दे पर लालू प्रसाद यादव व नीतिश कुमार में दूरियां बढ़ रही हैं क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार नोटबंदी का समर्थन किए जा रहे हैं और लालू प्रसाद यादव गुस्से में लाल हुए जा रहे हैं। ऐसा न हो कि महागठबंधन पर टिकी नीतिश कुमार की सरकार में हिलजुल हो जाए या सिंहासन डोलने लगे। यह नोटबंदी का साइड-इफेक्ट ही माना जाएगा। समाजवादी पार्टी के यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री मोदी की कडक़ चाय पीकर भी मुस्कुरा कर कहते हैं कि मैं तो सुझाव देने गया था। अब सुझाव देने के लिए ही कडक़ चाय गटक ली हो, ऐसा तो हो नहीं सकता। पहले भी रामकुमार यादव पर शिवपाल यादव ने भाजपा के संपर्क में होने के आरोप लगाए थे। मायावती के ‘बबुआ’ कहीं भाजपा के कमल को साइकिल पर सवार होकर चुनाव में न निकल पड़ें? राजनीति, प्रेम और दुश्मनी में सबकुछ जायज है। बबुआ क्या कर डाले, कुछ कह नहीं सकते क्योंकि मुलायम कह चुके हैं कि जो अपने पिता का कहा नहीं मानता, वह किसी और की क्या मानेगा? यह भी नोटबंदी का ही रंग होगा।

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लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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