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नोटबंदी – रै मोदी.. तनै आच्छी गोभी खोदी

कवि इंद्रजीत, कपिन्दर शर्मा और अशोक बरोदा की हरियाणवी कविताएं

November 19, 2016 8:29 pm by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

Notebandi par haryanavi poet

बाएं तरफ उपर की तस्वीर में अशोक बरोदा उनके नीचे कपिन्दर दाये हरियाणवी परिधान में कवि इंदरजीत

रै मोदी तनै आच्छी गोभी खोदी कवि इंद्रजीत की यह कविता फेसबुक से लेकर व्हट्सएप तमाम सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई…. कुछ ने तो इस कविता को अपने नाम तो कुछ ने अज्ञात नाम से ही प्रकाशित किया….

 

रै मोदी रै मोदी
तन्नै अच्छी गोभी खोदी
करे बंद नोट पांच सौ, हजार के
ईब देखिए के होंगे हालात बाजार के
आया गरीब कै जी सा..
घलग्या उनकै घी सा
साहुकारा नै पकड़ा माथा
ईब खुलैगा उनका खाता
खुली तिजोरी पड़ी पुराणी
आंख्या के म्हां आया पाणी
खोदण लाग्गे गड़े खजाने
भेद खुलैंगे नए पुराणे
कितै बैड अर किते अलमारी
आज खुलैंगी जगहां वो सारी
छात फोड़ कै नोट झड़ैंगे
कूड़े की जूं खूब पड़ैंगे
ईब टूटैंगे सबके टोरे
लिकड़ैंगे ईब भर भर बोरे
बैंक आला की होगी चांदी
कस्टमारा की उड़ री आंधी
ए.टी.एम. भी हवा सै ले रे
नो करंसी का सिग्नल देरे
100 का नोट हुया ईब मुखिया
कालाबाजारी होग्या दुखिया
किसा मोदी तु भूकंप ल्याया
सारा देश तन्नै हिलाया

 

ashok-baroda8 नवंबर को 500 व 1000 के नोट चलन से बाहर करने की घोषणा होते ही सोने की तैयारी कर रहे लोगों की उंघ अचानक टूट गई…. पतियों की जेब से चोरी छुप्पे पैसा बचाने वाली महिलाओं की नींद भी उड़ी कैसे इस बारे में बता रहे हैं हरियाणवी कवि अशोक बरोदा

 

पत्नियां की नींद
मेरी नींद री आज उड़ाई री
नरेंद्र मोदी न
सारी कमाई दे आई री
नरेंद्र मोदी न
आँख्या मीचि करके मैने बड़े नोट निकाले थे,
मौज रह थी म्हारी जिनके पति भोले भाले थे,
हे कती शर्म ना आई री
नरेंद्र मोदी न
कुणसे मुँह ते उसने सारे नोट पकड़ाऊँगी,
लोग आगे पाणी होज्या डूबण भी न पाऊँगी,
मै तो कर दी घणी घबराई री
नरेंद्र मोदी न।

kapinder-sharma

ऐसा नहीं है कि सभी विरोध जता रहे हैं कुछ कवि मोदी जी को शाबासी भी दे रहे हैं पढ़ें कपिंदर शर्मा की यह कविता

 

गरीबों का मसीहा बणकै , यो काम करया सै खास तनै ।
डाकू चोर लगा दिए ठिकाणै , मोदी जी शाबाश तनै ।।    टेक

1 असली जड़ तक पहुंच गया तूं , तनै ढके डोल उघाड़ दिए
दो नम्बरी आदमी थे जितणे , तनै उनके फिल्टर पाड़ दिए
इब सारा सच स्याहमी आज्या , करया झूठ का पर्दा फास तनै ।।

2 नकली नोट बणावनियां का , इब जड़ तैं नाश होज्यागा
आतंकवादी इब चुपके रहज्यां , कति बन्द साँस होज्यागा
भ्रष्टाचार इब खत्म होवैगा , नयूं जगा दिया विश्वास तनै ।।

3 टैक्स चोरी इब होवैं कोन्या , और ना होवै रिश्व्त खोरी
जाली नोटों का व्यापार चलै ना , इब अर्थव्यवस्था की खुल्जया बोरी
महंगाई कम इब होज्या सारी , नयूं कर राक्खे सै प्रयास तनै ।

4 लाखण माजरे आला कहवै , तूं बब्बर शेर सै मोदी जी
दुश्मन भी तेरे नाम तैं कांपै , तूं इसा दिलेर सै मोदी जी
कपीन्द्र शर्मा इतणी कहवै , या करी जीण की गुंजास तनै ।।

 

कवि इंद्रजीत ने हाल ही में एक और कविता में अपनी पीड़ा व्यक्त की है आप इसे देखें और सुनें उन्हीं की जुबानी

 

नोटबंदी – रै मोदी.. तनै आच्छी गोभी खोदी Reviewed by on . [caption id="attachment_1386" align="aligncenter" width="630"] बाएं तरफ उपर की तस्वीर में अशोक बरोदा उनके नीचे कपिन्दर दाये हरियाणवी परिधान में कवि इंदरजीत[/cap [caption id="attachment_1386" align="aligncenter" width="630"] बाएं तरफ उपर की तस्वीर में अशोक बरोदा उनके नीचे कपिन्दर दाये हरियाणवी परिधान में कवि इंदरजीत[/cap Rating: 0

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