Saturday , 25 November 2017

Home » साहित्य खास » किसान नै के ठाया रै

किसान नै के ठाया रै

नोटबंदी पर किसानों के दुख को व्यक्त करती डॉ रणबीर सिंह दहिया की हरियाणवी कविता

December 9, 2016 9:50 am by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

चित्र गूगल से साभार

नोटबंदी पर किसानों के दुख को व्यक्त करती डॉ रणबीर सिंह दहिया की हरियाणवी कविता – किसान नै के ठाया रै

 

किसान नै मनै खोल बतादे यो थारा के ठा राख्या रै।।

खेती करनी मुश्किल करदी जमा कूण मैं ला राख्या रै।।

किसान मरया खेत में तो कैसे देश महान बचैगा

किसान बरबाद हुया तो जरूरी यो घमशान मचैगा

दर दर का भिखारी क्यों यो अन्नदाता बणा राख्या रै।।

काले धन के नाम पर म्हारा धौला काबू कर लिया

पुराने जमा कराकै तनै बैंकां का भोभा भर दिया

म्हारी खेती चौपट होगी काढ़न पै रोक लगा राख्या रै।।

ब्याह शादी की मुश्किल होरी दाल सब्जी का टोटा होग्या

थारा नोटबंदी का फैसला यो जी का फांसा मोटा होग्या

देश भक्ति का नाम लेकै यो देश जमा भका राख्या रै।।

इसे ढाल बात करै सै बण गरीबों का हिमाती रै

इब बेरा लाग्या हमनै घणा कसूता सै उत्पाती रै

रणबीर सिंह इब क्यों बढ़ा कैशलेश का भा राख्या रै।।

dr-ranbeer-dahiya

लेखक परिचय

डॉ. रणबीर सिंह दहिया पीजीआई रोहतक के सेवानिवृत सर्जन हैं और हरियाणवी साहित्य व समाज की गहरी समझ रखते हैं…. फौजी मेहर के गांव बरौणा में पैदा हुए डॉ. दहिया उनकी विरासत को रागनी लेखन के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में भी निशुल्क ओपीडी की सेवाएं जरुरत मंद लोगों के लिये देते हैं और समाज के प्रति समर्पित एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका अदा कर रहे हैं।

किसान नै के ठाया रै Reviewed by on . [caption id="attachment_1234" align="aligncenter" width="650"] चित्र गूगल से साभार[/caption] नोटबंदी पर किसानों के दुख को व्यक्त करती डॉ रणबीर सिंह दहिया की हरि [caption id="attachment_1234" align="aligncenter" width="650"] चित्र गूगल से साभार[/caption] नोटबंदी पर किसानों के दुख को व्यक्त करती डॉ रणबीर सिंह दहिया की हरि Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top