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नोटबंदी पर विपक्ष: सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं

संसद ठप, क्या यह है नोटबंदी का हल?

November 24, 2016 3:31 pm by: Category: खबर खास 2 Comments A+ / A-

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कमलेश भारतीय

नोटबंदी की घोषणा किए पंद्रह दिन बीत गए और बैंकों के सामने कतारों में लोग अब तक खड़े हैं। ब्याह-शादी वाले परिवार सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सरकार ने अढ़ाई लाख रुपए शादी वाले परिवारों को देने की घोषणा की पर पहले तो बैंकों ने कहा कि उनके पास सर्कुलर ही नहीं आया और फिर इतनी शर्तें लगा दीं कि लगा जैसे अपने पैसे निकलवाने नहीं बल्कि बैंक से लोन लेने जा रहे हों। दुल्हनें भी शादियों के कार्ड्स लेकर बैंकों की कतारों में लगीं। छोटे-छोटे कारोबार करने वाले तक परेशान हैं। इस सबके बीच जनता को आस थी कि संसद शुरू होगी तो विपक्षी दल उसकी आवाज उठाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।

पहले तो राज्यसभा में कांग्रेस दल के नेता गुलाम नबी आजाद के बयान से ही हंगामा खड़ा हो गया। उन्होंने उरी आर्मी कैंप ऑफिस के शहीदों और नोटबंदी के दौरान मरने वालों की तुलना जो कर कर डाली। फिर श्रद्धांजलि में भी इन्हें शामिल करने की मांग कर डाली। नोटबंदी के दौरान मरने वाले भी इसी देश के वासी हैं, उन्हें भी श्रद्धांजलि दी जाए, यह भी गुलाम नबी आजाद ने मांग उठाई। लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्यसभा में आकर नोटबंदी पर बयान देने के मुद्दे को लेकर विपक्ष सदन की कार्यवाही ठप करता रहा। अरूण जेटली कहते आ रहे हैं कि यह जरूरी नहीं कि हर सवाल का जवाब प्रधानमंत्री ही देंगे। राहुल गांधी कह रहे हैं कि जब प्रधानमंत्री बाहर के कार्यक्रमों में अपने मन की बात कह रहे हैं तो सदन में क्यों नहीं आते? फिर यह भी कह दिया कि मैं कुछ कहूंगा तो प्रधानमंत्री और भावुक हो जाएंगे। लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडसे शायराना अंदाज में कहते हैं स्पीकर सुमित्रा महाजन को लक्ष्य कर कि मां कभी रोने नहीं देती। जवाब में स्पीकर कहती हैं कि मां यह भी तो चाहती है कि बच्चे मिलजुल कर रहें। खैर, न राज्यसभा चल रही और न ही लोकसभा। अरूण जेटली कह रहे हैं कि विपक्ष बहस से, नोटबंदी पर चर्चा से भाग रहा है और कुल जमा जोड़ बात सामने आ रही है कि इस तरह विपक्ष द्वारा संसद ठप किए जाने से अब तक 95 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। संसद को सबसे बड़ी पंचायत कहा जाता है और वहां भी सिर्फ हंगामा हो रहा है या शोर-ओ-गुल के बाद संसद का बहिष्कार। यह कैसा हंगामा, कैसा माजरा? प्रधानंत्री मोदी को संसद में आने से संकोच कैसा?

सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह संसद ठप करना क्या नोटबंदी की समस्या का हल है? क्या आम जनता की खून-पसीने की कमाई के 95 करोड़़ रुपए हंगामे की भेंट चढ़ा देना क्या उचित है? पर कांग्रेस सांसद भाजपा के विपक्ष में रहते इसी तरह मुद्दों को लेकर संसद ठप करने की याद दिला रहे हैं और केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज का बयान भी सुना रहे हैं कि वे तब कहती थीं कि हम राजनीति करने आए हैं, कीर्तन करने नहीं। तो क्या विपक्ष पर कोई जिम्मेवारी नहीं? क्या विपक्ष को जिम्मेदार नहीं होना चाहिए? सरकार के साथ-साथ विपक्ष भी नोटबंदी से बढ़ते संकट के प्रति जवाबदेह है या नहीं? विपक्ष को ज्यादा गंभीरता दिखानी चाहिए। संख्या चाहे कांग्रेस या विपक्ष के सांसदों की कम हो, पर नोटबंदी से जो आर्थिक आपातकाल लगा है, उस पर सदन के अंदर सार्थक चर्चा होनी चाहिए पर जिस तरह से विरोध प्रदर्शन करने पर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व मंत्री कपिल मिश्रा को हिरासत में लिया गया, वह भी उचित नहीं है। प्रदर्शन करना, विरोध जताना, मार्च निकालना, धरना देना यही तो लोकतंत्र है। दुष्यंत कुमार के

शब्दों में:

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,

मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए।

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

नोटबंदी पर विपक्ष: सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं Reviewed by on . कमलेश भारतीय नोटबंदी की घोषणा किए पंद्रह दिन बीत गए और बैंकों के सामने कतारों में लोग अब तक खड़े हैं। ब्याह-शादी वाले परिवार सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना कर र कमलेश भारतीय नोटबंदी की घोषणा किए पंद्रह दिन बीत गए और बैंकों के सामने कतारों में लोग अब तक खड़े हैं। ब्याह-शादी वाले परिवार सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना कर र Rating: 0

Comments (2)

  • Kamlesh bhartiya

    धन्यवाद,जगदीप। हरियाणा खास अपनी पहचान बना रही है । बधाई ।

  • Kamlesh bhartiya

    हरियाणा खास अपनी पहचान बना रही है । बधाई ।

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