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बड़े नोटों पर सर्जिकल स्ट्राइक, कितनी राइट ?

November 14, 2016 3:00 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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जितना शोर था कि प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी विदेशों से काला धन ले आएंगे और हर भारतवासी के खाते में 15-15 लाख रुपए जमा हो जाएंगे। बड़ा आकर्षक, लुभावना, मनभावन सपना दिखाया और आखिर जनता ने मोदी को प्रधानमंत्री बना दिया। दो-अढ़ाई साल तक विरोधी ही नहीं अपने सहयोगी भी सवाल करते रहे कि क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम वो इरादा? इस बीच पाकिस्तान ने कश्मीर में हालात बद से बदतर बना दिए। अब वहां भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार है। बुरहान वानी को मार गिराने से कश्मीर में देश का सबसे लंबी अवधि के लिए कफ्र्यू लगा।  पहले पठानकोट एयरबेस और बाद में उरी आर्मी कैंप ऑफिस पर हमले हुए, जिसके जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक किया गया। आतंकवाद का यह एक चेहरा था तो दूसरा चेहरा लगातार पांच सौ रुपए के जाली नोटों की बड़ी खेप के रूप में वाया नेपाल से हमला, यह अलग तरह का हमला था। भारत की असली करंटी के बदले नकली करंसी प्रचलन में आने लगी। यहां तक कि एटीएम से भी ऐसे नकली नोट निकलने लगे।

कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह से बैठकों में व्यस्त रहे। उन्होंने सेना के तीनों अंगों के अध्यक्षों के साथ भी मंत्रणा की। वित्तमंत्री, गृहमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ बैठक करने के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने गए। दिनभर यह चर्चा रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार की शाम राष्ट्र के नाम महत्वपूर्ण संदेश देंगे। सबको इन बैठकों से यही घोषणा तो हो गई। पर ऐसी जैसी कि देश के अंदर ही सर्जिकल स्ट्राइक कर दी गई हो। इसे आर्थिक आपातकाल भी कहा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने 500 व 1000 रुपए के नोट का चलन कल रात 12 बजे के बाद से बंद करने की घोषणा कर दी। इसके साथ 500 रुपए व 2000 रुपए के नए नोट शुरू करने की घोषणा की।

इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देशभर में हडक़ंप मच गया। पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं।  ऐसी लंबी कतारें कभी कुवैत के युद्ध  के दौरान लगी थीं, जब पेट्रोल की सप्लाई बंद हो गई थी। लोगों की यात्रा बीच में रुक गई, कोई टैक्सी, ऑटो रिक्शा या बस कंडक्टर 500 या 1000 रुपए के नोट लेने को तैयार ही नहीं था। रेलवे स्टेशनों पर पांच सौ की चेंज नहीं थी। तो राजकोट में क्रिकेट मैच की टिकट खिडक़ी के बाहर लिख कर लगा रखा था कि सरकार के आदेश के चलते पांच सौ व हजार रुपए के नोट स्वीकार्य नहीं होंगे। यानी क्रिकेट मैच के टिकटों की बिक्री पर इसका साया भी पड़ा। दर्शक कम आएंगे। क्रिकेट बोर्ड को मुश्किल से 59 लाख रुपए की राशि खर्च करने का आदेश मिला है। टोल प्लाजा पर भी झड़पें हो रही हैं।

अब रही बात आम जनता की, विपक्ष की। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि यह फैसला छोटे व्यापारी व फैक्टरी मालिकों को परेशान करेगा। दूसरा ब्याह-शादियों के सीजन का हवाला भी दिया जा रहा है, जिसके चलते ब्याह-शादी के भगवान के बनाए जोड़े व उनके अभिभावक परेशान होंगे। एक सवाल भी उठ रहा है कि यदि काला धन निकलवाने के लिए 1000 रुपए का नोट बंद किया जा रहा है तो 2000 रुपए का नोट क्या कालेधन को दोगुना करने के लिए लाया जा रहा है? सरकार ने फैसला इसलिए भी लिया कि उत्तर-प्रदेश, पंजाब व गोवा में चुनाव होने जा रहे हैं और वहां कालेधन का प्रभाव होने से रोका जा सके? पर क्या भाजपा नेता चुनाव खर्च में सफेद धन ही लगाने वाले थे? पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा कि मैं कालेधन और भ्रष्टाचार का विरोध करती हूं, लेकिन आम आदमी और छोटे व्यापारियों को लेकर मेरी चिंता है। वे छोटी जरूरतों का सामान कैसे खरीदेंगे? अरुण जेटली कह रहे हैं कि इससे कालेधन वाले परेशान होंगे, ईमानदार होंगे खुश। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद कह रहे हैं कि मोदी को ड्रामेटिक कदम उठाने का शौक है। यह कदम भी ड्रामे जैसा है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि एक 9/11 पर अमेरिका तो दूसरे 9/11 पर भारत हिल गया। दूसरी बात यह चुटकी लेकर कही जा रही है कि अमेरिकी वोट गिन रहे थे और भारतीय नोट गिन रहे हैं।

दुष्यंत कुमार के शब्दों में:-

कैसे-कैसे मंजर सामने आने लगे हैं,

गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।

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लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

 

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